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दिल्ली हाईकोर्ट ने मां को बेटे संग अमेरिका जाने की दी इजाजत, पढ़ाई पूरी करने तक बदला विज़िटेशन शेड्यूल

Shivam
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X & Y - दिल्ली उच्च न्यायालय ने मां को नाबालिग बच्चे को पढ़ाई के लिए अमेरिका ले जाने की अनुमति दी, साथ ही पिता के मिलने के अधिकार और बच्चे के कल्याण की रक्षा के लिए कड़ी शर्तें निर्धारित कीं।

दिल्ली हाईकोर्ट ने मां को बेटे संग अमेरिका जाने की दी इजाजत, पढ़ाई पूरी करने तक बदला विज़िटेशन शेड्यूल

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक संवेदनशील कस्टडी विवाद में मां को बड़ी राहत देते हुए उन्हें अपने नाबालिग बेटे के साथ अमेरिका जाने की अनुमति दे दी है। कोर्ट ने कहा कि बच्चे की भलाई सर्वोपरि है, लेकिन मां के व्यक्तिगत विकास और पढ़ाई के अधिकार को भी नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। यह आदेश जस्टिस सौरभ बनर्जी ने सुनाया।

मामले की पृष्ठभूमि

माता-पिता की शादी 2014 में हुई थी और 2017 में बेटे का जन्म हुआ। 2019 में मतभेद बढ़ने पर मां बच्चे के साथ अलग रहने लगी। फैमिली कोर्ट ने पिता को मुलाक़ात के अधिकार दिए थे, जिस पर बाद में हाईकोर्ट में सुनवाई चली। इसी बीच मां को अमेरिका की मैरीमाउंट यूनिवर्सिटी में मास्टर्स प्रोग्राम में दाख़िला मिला और वह पढ़ाई पूरी करना चाहती थीं। पिता ने इसका विरोध करते हुए कहा कि इससे उनकी मुलाक़ात के अधिकार प्रभावित होंगे।

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मां की ओर से दलील दी गई कि वह पहले से एक सेमेस्टर पूरा कर चुकी हैं और आगे पढ़ाई के लिए कैंपस में मौजूद रहना ज़रूरी है। उन्होंने कहा कि यह पढ़ाई भविष्य में बच्चे के लिए बेहतर स्थिरता लाएगी। दूसरी तरफ़, पिता के वकील ने कहा कि बच्चे का देश से बाहर जाना उसके स्थिर माहौल और पिता-पुत्र संबंधों पर असर डालेगा।

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अदालत की टिप्पणियाँ

कोर्ट ने साफ़ कहा कि “बच्चे का कल्याण सबसे अहम है, लेकिन इसे मां के मौलिक अधिकारों से अलग करके नहीं देखा जा सकता।” जज ने यह भी जोड़ा कि उच्च शिक्षा “व्यक्तिगत विकास और सम्मानजनक जीवन” का अहम हिस्सा है। कोर्ट ने नोट किया कि मां ने पहले भी कोर्ट के आदेशों का पालन किया है और पढ़ाई में अच्छा प्रदर्शन किया है, जिससे उनकी नीयत पर शक नहीं किया जा सकता।

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फ़ैसला और शर्तें

हाईकोर्ट ने मां को बेटे के साथ अमेरिका जाने की अनुमति दे दी, लेकिन कुछ शर्तों के साथ। मां को अपना पूरा पता, बच्चे के स्कूल की जानकारी और खर्चों का ब्योरा देना होगा। पिता को हर हफ्ते वीडियो कॉल के ज़रिए बच्चे से बात करने का समय मिलेगा।

इसके अलावा, गर्मियों और सर्दियों की छुट्टियों में बच्चे को भारत लाने और पिता से मिलने की व्यवस्था भी तय की गई है। कोर्ट ने कहा कि पढ़ाई पूरी होते ही मां को बच्चे के साथ भारत लौटना होगा।

Case Title:-X & Y

Case Number:- CM(M) 159/2023

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