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दिल्ली उच्च न्यायालय ने न्यूजलॉन्ड्री मामले में मीडिया मानहानि के दावों पर सवाल उठाए, फैसला सुरक्षित रखा

Shivam
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टीवी टुडे नेटवर्क प्राइवेट लिमिटेड और अन्य संबंधित मामला - दिल्ली उच्च न्यायालय ने न्यूजलॉन्ड्री द्वारा इस्तेमाल की गई आपत्तिजनक भाषा की आलोचना की, लेकिन कहा कि आज तक या इंडिया टुडे की सभी मीडिया आलोचनाएं मानहानिकारक नहीं हैं।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने न्यूजलॉन्ड्री मामले में मीडिया मानहानि के दावों पर सवाल उठाए, फैसला सुरक्षित रखा

दिल्ली उच्च न्यायालय ने गुरुवार 22 जनवरी को न्यूज़ चैनल समूह टीवी टुडे नेटवर्क और डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म न्यूज़लॉन्ड्री के बीच चल रहे विवाद की सुनवाई के दौरान कड़े मौखिक टिप्पणी की। अदालत ने जहां न्यूज़लॉन्ड्री की एक पत्रकार द्वारा इस्तेमाल की गई आपत्तिजनक भाषा पर गंभीर आपत्ति जताई, वहीं यह भी साफ किया कि हर तीखी टिप्पणी को मानहानि या अपमान नहीं कहा जा सकता।

मामले की पृष्ठभूमि

यह विवाद वर्ष 2021 में शुरू हुआ था, जब टीवी टुडे नेटवर्क जो आज तक और इंडिया टुडे जैसे प्रमुख न्यूज़ चैनलों का मालिक है ने न्यूज़लॉन्ड्री के खिलाफ दीवानी मुकदमा दायर किया।

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टीवी टुडे का आरोप था कि न्यूज़लॉन्ड्री ने उसके कार्यक्रमों के वीडियो क्लिप्स का अनुचित उपयोग किया और अपने वीडियो व लेखों के जरिए चैनल, एंकर और प्रबंधन के खिलाफ झूठे और अपमानजनक बयान दिए। नेटवर्क ने कॉपीराइट उल्लंघन और मानहानि के लिए ₹2 करोड़ के हर्जाने की मांग की।

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जुलाई 2022 में, एकल न्यायाधीश ने टीवी टुडे को अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया था, हालांकि यह कहा गया था कि प्रथम दृष्टया मामला बनता है। इस आदेश के खिलाफ दोनों पक्षों ने अपील दायर की।

भाषा के प्रयोग पर न्यायालय की टिप्पणियाँ

सुनवाई के दौरान जस्टिस सी हरि शंकर और जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला ने न्यूज़लॉन्ड्री की पत्रकार मनीषा पांडे द्वारा एक वीडियो में इस्तेमाल किए गए शब्द “shit” पर कड़ी आपत्ति जताई। यह शब्द गुड न्यूज़ टुडे चैनल के एक कार्यक्रम के संदर्भ में प्रयोग किया गया था।

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न्यायमूर्ति हरि शंकर ने कहा,

“यह बेहद आपत्तिजनक भाषा है। रिपोर्टिंग में शालीनता की बुनियादी समझ होनी चाहिए। हर चीज़ की एक सीमा होती है।”

अदालत ने यह भी चेतावनी दी कि यदि आवश्यक हुआ तो पत्रकार को व्यक्तिगत रूप से पक्षकार बनाया जा सकता है और ऐसे आदेश पारित किए जा सकते हैं जो उनके करियर को प्रभावित करें।

आलोचना और अपमान में फर्क

हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि टीवी टुडे हर आलोचनात्मक टिप्पणी को अपमानजनक नहीं कह सकता।

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खंडपीठ ने कहा कि “method anchoring”, “थोड़ा ड्रामा, थोड़ा गिमिक”, “soap opera” या “आज तक स्टाइल में खेल पत्रकारिता की हत्या” जैसे शब्द आलोचना के दायरे में आते हैं।

न्यायमूर्ति हरि शंकर ने टिप्पणी की,

“अगर कोई कहता है कि आपका कार्यक्रम बकवास है, तो वह टिप्पणी है। हर कड़ी बात अपमान नहीं होती।”

अदालत ने टीवी टुडे को यह भी कहा कि वह जरूरत से ज्यादा संवेदनशील रवैया अपना रहा है और हर वीडियो को विवाद में शामिल कर अपने ही मामले को कमजोर कर रहा है।

कॉपीराइट और फेयर यूज़ पर बहस

टीवी टुडे की ओर से दलील दी गई कि न्यूज़लॉन्ड्री ने पूरे-पूरे वीडियो क्लिप इस्तेमाल किए, जो कॉपीराइट कानून के तहत ‘फेयर यूज़’ नहीं है।

इस पर अदालत ने सवाल उठाया कि क्या किसी सामग्री की आलोचना करने के लिए उसके अंश दिखाना पूरी तरह प्रतिबंधित हो सकता है।

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न्यूज़लॉन्ड्री की ओर से कहा गया कि हर वीडियो में साफ तौर पर बताया गया कि क्लिप टीवी टुडे का है और उसे केवल संदर्भ और आलोचना के लिए दिखाया गया।

अदालत का निर्णय

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद खंडपीठ ने कहा कि वह मौजूदा मीडिया पर कोई व्यापक टिप्पणी नहीं करना चाहती।

न्यायमूर्ति हरि शंकर ने कहा,

“हम अपने विचार व्यक्त नहीं करना चाहते। हम खुद को सीमित रखेंगे।”

इसके बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने दोनों अपीलों पर फैसला सुरक्षित रख लिया।

Case Title:- TV Today Network Pvt Ltd and Other Connected Matter

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