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2020 दंगे मामले में केस डायरी को लेकर देवांगना कालिता की याचिका पर हाईकोर्ट का फैसला सुरक्षित

Shivam Y.

दिल्ली हाईकोर्ट ने 2020 दिल्ली दंगों के एफआईआर 48/2020 में केस डायरी को संरक्षित और पुनर्निर्माण करने की देवांगना कालिता की याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा। सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की प्रमुख दलीलें।

2020 दंगे मामले में केस डायरी को लेकर देवांगना कालिता की याचिका पर हाईकोर्ट का फैसला सुरक्षित

दिल्ली हाईकोर्ट ने 7 जुलाई 2025 को देवांगना कालिता द्वारा दायर उस याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया जिसमें उन्होंने 2020 दिल्ली दंगों की एफआईआर संख्या 48/2020, थाना जाफराबाद, में जांच से संबंधित केस डायरी को संरक्षित और पुनर्निर्माण करने की मांग की थी।

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कालिता ने 6 नवंबर 2024 के ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी, जिसने उनकी मांग को खारिज कर दिया था। उन्होंने दिल्ली पुलिस को निर्देश देने की अपील की थी कि वे बुकलेट नंबर 9989 और 9990 को संरक्षित और पुनर्निर्मित करें, जो राज्य बनाम फैजान एवं अन्य शीर्षक वाले मामले में जांच के दौरान उपयोग किए गए थे।

"दलीलें सुनी गईं। आदेश के लिए सुरक्षित रखा गया।"
— जस्टिस रविंदर डूडेजा, दिल्ली हाईकोर्ट

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हाईकोर्ट ने इससे पहले 2 दिसंबर 2024 को निर्देश दिया था कि इस मामले से संबंधित सभी केस डायरी, विशेष रूप से वॉल्यूम 9989 और 9990 को संरक्षित किया जाए और ट्रायल कोर्ट का कोई भी निर्णय इस याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन होगा।

सुनवाई के दौरान, याचिकाकर्ता की ओर से पेश एडवोकेट अदित पुजारी ने दलील दी कि केस डायरी में धारा 161 CrPC के तहत दर्ज बयान एंटी-डेटेड पाए गए हैं।

"केस डायरी को क्रमवार पृष्ठांकित किया जाता है... ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि जांच का क्रम समझा जा सके,"
— एडवोकेट अदित पुजारी

उन्होंने कहा कि उनकी मांग केवल संरक्षण के लिए है, न कि डायरी देखने के लिए।

"संरक्षण का मतलब है पूरी पुलिस डायरी को सुरक्षित रखना,"
— पुजारी ने कोर्ट में कहा

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पुजारी ने बताया कि ट्रायल कोर्ट में भी उन्होंने बुकलेट 9989 और 9990 को सुरक्षित रखने की मांग की थी। हालांकि, राज्य के विशेष लोक अभियोजक (SPP) ने आपत्ति जताई थी कि ये बुकलेट अन्य मामलों में भी उपयोग की गई थीं, और इन्हें बुलाने से मामला और लंबा हो जाएगा।

"अगर आज केस डायरी संरक्षित नहीं की गई तो आगे चलकर भारी परेशानी हो सकती है,"
— अदित पुजारी

राज्य की ओर से पेश वकील ने जवाब दिया कि पूरी पुलिस फाइल पहले ही मजिस्ट्रेट के पास संरक्षित है, और जिन बुकलेट्स की बात की जा रही है, उनके अधिकांश पृष्ठ पहले ही सुरक्षित हैं, सिर्फ 2-3 पेज जांच के दौरान इधर-उधर हो सकते हैं।

"ये वॉल्यूम पहले से ही केस डायरी का हिस्सा हैं... हो सकता है 4-5 पेज किसी और मामले में इस्तेमाल हुए हों,"
— राज्य के वकील

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कोर्ट ने इस पर सवाल उठाया:

"बुकलेट 9989 और 9990 को पूरी तरह से संरक्षित करने में क्या आपत्ति है?"
— कोर्ट का राज्य के वकील से सवाल

पुजारी ने स्पष्ट किया कि उनकी मांग में केवल संरक्षण और पुनर्निर्माण की बात है, और वे इन डायरी को देखने की मांग नहीं कर रहे।

"हम सिर्फ संरक्षण और पुनर्निर्माण की मांग कर रहे हैं। हमें इन्हें दिखाने की जरूरत नहीं है,"
— अदित पुजारी

कोर्ट ने कहा कि जो दस्तावेज मौजूद हैं, वे केस डायरी का हिस्सा हैं, और यदि कोई बयान एंटी-डेटेड है, तो ट्रायल कोर्ट उचित समय पर उस पर विचार करेगा।

"अगर कोई बयान एंटी-डेटेड लगता है, तो ट्रायल कोर्ट अपनी राय बना सकता है,"
— कोर्ट की मौखिक टिप्पणी

अंततः, सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया।

मामला: देवांगना कालिता बनाम राज्य (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली)

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