Logo

दिल्ली हाईकोर्ट: S 125 CrPC के तहत अंतरिम भरण-पोषण आवेदन की तारीख से दिया जाना चाहिए

Shivam
Add Court Book as a preferred source on Google

संयोगिता गुप्ता और अन्य बनाम अशोक कुमार गुप्ता - दिल्ली उच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया है कि पत्नी और बेटियों के लिए भरण-पोषण की शुरुआत धारा 125 सीआरपीसी के तहत याचिका दायर करने की तारीख से होनी चाहिए, न कि पारिवारिक न्यायालय के आदेश से।

दिल्ली हाईकोर्ट: S 125 CrPC के तहत अंतरिम भरण-पोषण आवेदन की तारीख से दिया जाना चाहिए

दिल्ली हाईकोर्ट ने भरण-पोषण से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि पत्नी और बच्चों को दिया जाने वाला अंतरिम भरण-पोषण सामान्यतः आवेदन की तारीख से ही लागू होना चाहिए। अदालत ने फैमिली कोर्ट के उस आदेश में संशोधन किया जिसमें भरण-पोषण 2019 से देने का निर्देश था, जबकि याचिका 2016 में दाखिल की गई थी।

न्यायमूर्ति डॉ. स्वर्णा कांता शर्मा की पीठ ने यह स्पष्ट किया कि लंबित न्यायिक प्रक्रिया का नुकसान आश्रित पत्नी और बच्चों को नहीं उठाना चाहिए।

मामले की पृष्ठभूमि

मामले में याचिकाकर्ता संयोगिता गुप्ता और उनकी दो बेटियों ने अपने पति/पिता अशोक कुमार गुप्ता के खिलाफ दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 125 के तहत भरण-पोषण की मांग की थी।

Read also:- सुप्रीम कोर्ट का आदेश: दिव्यांग उम्मीदवारों को राहत, SSC को 2 हफ्ते में भेजने होंगे डोज़ियर; CAG करेगा नियुक्ति पर विचार

Court Book subscription: bare acts, legal drafts, court judgments and ad-free legal news, plans from ₹30/month

दंपति का विवाह 27 मई 2001 को हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार दिल्ली में हुआ था। इस विवाह से दो बेटियों का जन्म हुआ। बाद में वैवाहिक विवाद बढ़ने पर दोनों अलग रहने लगे।

पत्नी ने अदालत को बताया कि वह गृहिणी हैं और उनके पास कोई स्वतंत्र आय नहीं है। बच्चों की पढ़ाई और रोजमर्रा के खर्चों के लिए उन्हें रिश्तेदारों और दोस्तों से आर्थिक मदद लेनी पड़ रही थी। उनका आरोप था कि पति पर्याप्त आय होने के बावजूद उनकी देखभाल की जिम्मेदारी नहीं निभा रहे थे।

2019 में कड़कड़डूमा स्थित फैमिली कोर्ट ने अंतरिम भरण-पोषण के रूप में पत्नी और दोनों बेटियों को ₹5,500 प्रति माह प्रत्येक (कुल ₹16,500) देने का आदेश दिया, लेकिन इसे 1 जनवरी 2019 से लागू किया। इसी आदेश को पत्नी और बेटियों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी।

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि भरण-पोषण कानून का उद्देश्य आर्थिक रूप से निर्भर पत्नी और बच्चों को असहाय स्थिति में जाने से बचाना है।

Read also:- चंडीगढ़ SPCA में कुत्तों को पर्याप्त भोजन नहीं मिलने पर हाईकोर्ट सख्त: CCTV निगरानी और पोषण पर हलफनामा मांगा

अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि आम तौर पर भरण-पोषण आवेदन की तारीख से दिया जाना चाहिए।

पीठ ने कहा,

“यदि भरण-पोषण के मामलों में निर्णय में देरी होती है तो उसका नुकसान आश्रित पत्नी और बच्चों को नहीं होना चाहिए।”

अदालत ने यह भी पाया कि फैमिली कोर्ट ने यह स्पष्ट नहीं किया कि भरण-पोषण 2016 की जगह 2019 से क्यों लागू किया गया। आदेश में इस देरी के लिए कोई ठोस कारण दर्ज नहीं था।

Read also:- LPG सिलेंडर की कमी पर बॉम्बे हाईकोर्ट सख्त: केंद्र और DGFT से जवाब तलब, घरेलू आपूर्ति को प्राथमिकता देने का निर्देश

न्यायालय ने यह भी कहा कि धारा 125 CrPC एक सामाजिक कल्याण से जुड़ा प्रावधान है जिसका उद्देश्य पत्नी और बच्चों को आर्थिक संकट से बचाना है। इसलिए इस कानून की व्याख्या भी उसी उद्देश्य को ध्यान में रखकर की जानी चाहिए।

हाईकोर्ट ने कहा कि फैमिली कोर्ट द्वारा तय की गई राशि ₹5,500 प्रति माह प्रत्येक (कुल ₹16,500) को अत्यधिक नहीं कहा जा सकता और इस स्तर पर इसमें हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।

हालांकि अदालत ने आदेश में संशोधन करते हुए कहा कि अंतरिम भरण-पोषण याचिका दायर करने की तारीख यानी 5 मार्च 2016 से देय होगा, न कि 1 जनवरी 2019 से।

अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि पहले से दिए गए किसी भी भुगतान को कुल देय राशि में समायोजित किया जाएगा। इसके साथ ही याचिका का निस्तारण कर दिया गया।

Case Title:- Sanyogita Gupta & Ors. vs Ashok Kumar Gupta

Case Number:- CRL.REV.P. 520/2024 & CRL.M.A. 17787/2023

Judgment Pronounced On:- 27 February 2026

Advocates:

• For Petitioners: Mr. S. D. Windlesh, Advocate

• For Respondent: Mr. Nitin Saluja and Ms. Ishita Soni, Advocates

Download Judgment

Take CourtBook Everywhere

Access your account on the go with our mobile app.

Get it on Google PlayDownload on the App Store
Join the Court Book WhatsApp channel for latest judgments, notifications, legal news and exam updates