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AI डीपफेक और फर्जी प्रमोशन पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, विवेक ओबेरॉय के पक्ष में एक्स-पार्टी रोक

Vivek G.
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विवेक आनंद ओबेरॉय बनाम कलेक्टर बाज़ार और अन्य। दिल्ली हाईकोर्ट ने AI डीपफेक और फर्जी प्रमोशन मामले में अभिनेता विवेक ओबेरॉय के पक्ष में अंतरिम रोक लगाई, ऑनलाइन कंटेंट हटाने के आदेश।

AI डीपफेक और फर्जी प्रमोशन पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, विवेक ओबेरॉय के पक्ष में एक्स-पार्टी रोक

दिल्ली हाईकोर्ट में गुरुवार को सुनवाई के दौरान एक गंभीर डिजिटल धोखाधड़ी का मामला सामने आया। अभिनेता और उद्यमी विवेक आनंद ओबेरॉय ने अदालत का दरवाजा खटखटाते हुए आरोप लगाया कि उनकी पहचान, तस्वीर, आवाज और नाम का बड़े पैमाने पर बिना अनुमति दुरुपयोग किया जा रहा है। मामला खास तौर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डीपफेक तकनीक के जरिए बनाए गए फर्जी कंटेंट से जुड़ा है।

मामले की पृष्ठभूमि

यह वाणिज्यिक वाद (CS(COMM) 105/2026) दिल्ली हाईकोर्ट में दायर किया गया। वादी की ओर से कहा गया कि कई वेबसाइट्स, सोशल मीडिया अकाउंट्स और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर विवेक ओबेरॉय के नाम और चेहरे का इस्तेमाल कर पोस्टर, वीडियो, रील्स, GIF और यहां तक कि फर्जी प्रमोशनल कंटेंट बेचा और फैलाया जा रहा है।

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अदालत को बताया गया कि कुछ अकाउंट्स खुद को अभिनेता का “ऑफिशियल” अकाउंट बताकर लोगों को गुमराह कर रहे हैं। कई जगह AI टूल्स से चेहरे को किसी और के शरीर पर जोड़कर वीडियो बनाए गए हैं, जिससे आम लोग भ्रमित हो रहे हैं।

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अदालत की कार्यवाही

मामले की सुनवाई जस्टिस तुषार राव गेडेला की पीठ के समक्ष हुई। वादी के वकीलों ने अदालत के सामने सैकड़ों लिंक, स्क्रीनशॉट और ऑनलाइन उदाहरण रखे। कोर्ट ने रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री और दस्तावेजों का अवलोकन किया।

पीठ ने कहा कि प्रथम दृष्टया यह स्पष्ट है कि वादी एक स्थापित अभिनेता और सार्वजनिक व्यक्तित्व हैं, जिनकी पहचान आम जनता में स्पष्ट और विशिष्ट है।

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कोर्ट की अहम टिप्पणी

अदालत ने कहा,

“वादी की छवि, नाम, आवाज और व्यक्तित्व से जुड़े अन्य गुण पूरी तरह से उनकी पहचान से जुड़े हैं। इनका बिना अनुमति व्यावसायिक उपयोग प्रथम दृष्टया अवैध प्रतीत होता है।”

कोर्ट ने यह भी माना कि अगर तुरंत रोक नहीं लगाई गई, तो वादी को ऐसी क्षति हो सकती है जिसकी भरपाई केवल पैसों से संभव नहीं होगी।

कोर्ट का फैसला

दिल्ली हाईकोर्ट ने विवेक ओबेरॉय के पक्ष में एक्स-पार्टी अंतरिम निषेधाज्ञा (ex-parte ad-interim injunction) जारी की।

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अदालत ने आदेश दिया कि:

• सभी प्रतिवादी और अज्ञात व्यक्ति (John Doe) विवेक ओबेरॉय के नाम, तस्वीर, आवाज, या व्यक्तित्व के किसी भी पहलू का उपयोग नहीं करेंगे।

• AI, डीपफेक, फेस मॉर्फिंग या किसी भी तकनीक से तैयार किया गया ऐसा कंटेंट तुरंत रोका जाएगा।

• संबंधित वेबसाइट्स और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स को 72 घंटे के भीतर आपत्तिजनक लिंक हटाने का निर्देश दिया गया।

• कुछ प्लेटफॉर्म्स को यूज़र डिटेल्स और लॉग-इन जानकारी वादी को उपलब्ध कराने को कहा गया।

कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि प्रतिवादी तय समय में जवाब दाखिल करें और आगे की सुनवाई निर्धारित तारीख पर होगी।

Case Title: Vivek Anand Oberoi vs Collector Bazar & Ors.

Case No.: CS(COMM) 105/2026

Decision Date: 05 February 2026

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