Logo

दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला: इस्तीफा देने पर पूर्व सेवा समाप्त, KVS की पूर्व शिक्षक को ग्रेच्युटी नहीं मिलेगी

Vivek G.
Add Court Book as a preferred source on Google

विमला सिंह (पूर्व पीजीटी इतिहास) बनाम आयुक्त, केंद्रीय विद्यालय संगठन, दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि इस्तीफा देने पर CCSP नियमों के तहत पूर्व सेवा समाप्त हो जाती है, इसलिए KVS की पूर्व शिक्षिका को ग्रेच्युटी नहीं मिलेगी।

दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला: इस्तीफा देने पर पूर्व सेवा समाप्त, KVS की पूर्व शिक्षक को ग्रेच्युटी नहीं मिलेगी

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि यदि कोई कर्मचारी सेवा से इस्तीफा देता है और उसकी सेवा शर्तें केंद्रीय सिविल सेवा (पेंशन) नियमों के तहत नियंत्रित हैं, तो उसका पूर्व सेवा रिकॉर्ड समाप्त माना जाएगा। इसी आधार पर कोर्ट ने केन्द्रीय विद्यालय संगठन (KVS) की पूर्व इतिहास शिक्षिका की ग्रेच्युटी की मांग को खारिज कर दिया।

न्यायमूर्ति अनिल क्षेतरपाल और न्यायमूर्ति अमित महाजन की खंडपीठ ने यह निर्णय सुनाया।

Read also:-ओडिशा हाईकोर्ट ने पुलिस उत्पीड़न के आरोपों पर याचिका खारिज की, कहा-उपलब्ध वैकल्पिक कानूनी उपाय अपनाएं

मामले की पृष्ठभूमि

याचिकाकर्ता विमला सिंह को 9 जुलाई 1995 को केन्द्रीय विद्यालय संगठन के स्कूल में पोस्ट ग्रेजुएट टीचर (इतिहास) के रूप में नियुक्त किया गया था। उन्होंने लगभग 13 वर्ष तक सेवा दी और 18 अगस्त 2008 को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण इस्तीफा दे दिया।

Court Book subscription: bare acts, legal drafts, court judgments and ad-free legal news, plans from ₹30/month

उनका इस्तीफा 23 अप्रैल 2009 को स्वीकार कर लिया गया। इसके बाद उन्होंने पेंशन और ग्रेच्युटी जैसे सेवानिवृत्ति लाभों की मांग की।

हालांकि KVS ने यह कहते हुए इन लाभों से इंकार कर दिया कि सेवा से इस्तीफा देने पर केंद्रीय सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 1972 के नियम 26 के तहत पूर्व सेवा स्वतः समाप्त हो जाती है।

इसके बाद याचिकाकर्ता ने भुगतान ग्रेच्युटी अधिनियम, 1972 के तहत ग्रेच्युटी की मांग की और संबंधित प्राधिकरण से राहत भी प्राप्त की। लेकिन इस आदेश को चुनौती देते हुए मामला आगे न्यायिक मंचों तक पहुंच गया।

Read also:-पुलिसकर्मी को कार से टक्कर मारकर बोनट पर घसीटने के आरोप में आरोपी को जमानत नहीं: मध्यप्रदेश हाईकोर्ट

ट्रिब्यूनल का निर्णय

मामला केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) के समक्ष भी गया।

ट्रिब्यूनल ने 30 मई 2023 के आदेश में कहा कि चूंकि याचिकाकर्ता ने स्वयं इस्तीफा दिया था और उनकी सेवा शर्तें CCSP नियमों के तहत आती हैं, इसलिए नियम 26 के अनुसार उनकी पूर्व सेवा समाप्त मानी जाएगी।

इसके परिणामस्वरूप उन्हें पेंशन या अन्य पेंशन संबंधी लाभ नहीं दिए जा सकते। बाद में दायर पुनर्विचार याचिका भी 17 जुलाई 2023 को खारिज कर दी गई।

इन आदेशों को चुनौती देते हुए याचिकाकर्ता ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

अदालत में मुख्य दलीलें

याचिकाकर्ता की दलील

याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि भुगतान ग्रेच्युटी अधिनियम के तहत यदि कर्मचारी ने कम से कम पांच वर्ष की निरंतर सेवा की है, तो उसे ग्रेच्युटी मिलनी चाहिए।

वकील ने तर्क दिया कि चूंकि याचिकाकर्ता ने 13 वर्ष से अधिक सेवा दी है, इसलिए उन्हें इस अधिनियम के तहत लाभ मिलना चाहिए।

प्रतिवादी की दलील

KVS की ओर से कहा गया कि नियुक्ति के समय ही याचिकाकर्ता ने CCSP नियमों को स्वीकार किया था।

इन नियमों के तहत स्पष्ट प्रावधान है कि इस्तीफा देने पर कर्मचारी की पूर्व सेवा समाप्त हो जाती है और वह पेंशन या उससे जुड़े लाभों के लिए पात्र नहीं रहता।

Read also:-कर्नाटक हाईकोर्ट का अहम फैसला: पिता का नाम रहते हुए भी बच्चे के सरनेम में मां का नाम जोड़ने की अनुमति

अदालत की टिप्पणियां

हाईकोर्ट ने सबसे पहले यह जांच की कि क्या याचिकाकर्ता भुगतान ग्रेच्युटी अधिनियम के तहत “कर्मचारी” की परिभाषा में आती हैं या नहीं।

पीठ ने कहा कि इस अधिनियम की धारा 2(e) में स्पष्ट रूप से उन कर्मचारियों को बाहर रखा गया है जो ऐसे पद पर हैं जहां ग्रेच्युटी का प्रावधान किसी अन्य कानून या नियमों द्वारा नियंत्रित होता है।

अदालत ने कहा कि KVS के कर्मचारियों की सेवा शर्तें CCSP नियमों द्वारा नियंत्रित होती हैं और उन्हीं नियमों में ग्रेच्युटी का प्रावधान मौजूद है।

पीठ ने कहा:

“एक बार जब कर्मचारी की सेवा शर्तें ऐसे नियमों द्वारा नियंत्रित हों जिनमें ग्रेच्युटी का प्रावधान हो, तब वह समानांतर रूप से भुगतान ग्रेच्युटी अधिनियम का सहारा नहीं ले सकता।”

अदालत ने यह भी कहा कि नियम 26 स्पष्ट रूप से कहता है कि इस्तीफा देने पर पूर्व सेवा समाप्त हो जाती है और ऐसे में पेंशन या उससे जुड़े लाभों का दावा नहीं किया जा सकता।

Read also:-मद्रास हाईकोर्ट: औद्योगिक उपयोग न होने पर SIPCOT को अतिरिक्त जमीन वापस लेने का अधिकार, कंपनी की अपील खारिज

अदालत का निर्णय

सभी पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण के आदेश में कोई त्रुटि नहीं है।

अदालत ने माना कि याचिकाकर्ता की सेवा CCSP नियमों द्वारा नियंत्रित थी और इस्तीफा देने के बाद नियम 26 के तहत उनकी पूर्व सेवा स्वतः समाप्त हो गई।

इसी आधार पर कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया और ट्रिब्यूनल के आदेशों को बरकरार रखा।

Case Title: Vimla Singh (Ex PGT History) v. Commissioner, Kendriya Vidyalaya Sangathan

Case No.: W.P.(C) 14081/2023

Decision Date: 25 February 2026

Take CourtBook Everywhere

Access your account on the go with our mobile app.

Get it on Google PlayDownload on the App Store
Join the Court Book WhatsApp channel for latest judgments, notifications, legal news and exam updates