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डिजिटल गोल्ड ऐप ‘Jar’ पर FIR रद्द करने से कर्नाटक हाईकोर्ट का इनकार, कहा – निवेशकों की शिकायतों के बीच जांच जरूरी

Shivam
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कर्नाटक हाईकोर्ट ने ‘Jar’ डिजिटल गोल्ड ऐप से जुड़े मामले में दर्ज FIR को रद्द करने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि निवेशकों की शिकायतों और गंभीर आरोपों के बीच प्रारंभिक चरण में जांच रोकना उचित नहीं होगा। कोर्ट ने माना कि मामले में कई विवादित तथ्य हैं जिनकी जांच जरूरी है। - निश्चय बाबू अरकलगुड और जार गोल्ड रिटेल प्राइवेट लिमिटेड बनाम कर्नाटक राज्य

डिजिटल गोल्ड ऐप ‘Jar’ पर FIR रद्द करने से कर्नाटक हाईकोर्ट का इनकार, कहा – निवेशकों की शिकायतों के बीच जांच जरूरी

कर्नाटक हाईकोर्ट ने डिजिटल गोल्ड प्लेटफॉर्म जार गोल्ड रिटेल प्राइवेट लिमिटेड और उसके निदेशक की ओर से दायर याचिका खारिज करते हुए पुलिस जांच जारी रखने की अनुमति दी है।

न्यायमूर्ति एम. नागप्रसन्ना की एकल पीठ ने कहा कि मामले में गंभीर आरोप सामने आए हैं और इस चरण पर FIR को रद्द करना जांच प्रक्रिया को बाधित करेगा। अदालत ने यह भी कहा कि डिजिटल या सोने के रूप में निवेश को केवल इस आधार पर कानून से बाहर नहीं माना जा सकता कि वह पारंपरिक नकद जमा नहीं है।

यह आदेश Writ Petition No. 5968 of 2026 में दिया गया, जिसमें याचिकाकर्ताओं ने पुलिस द्वारा दर्ज FIR को रद्द करने की मांग की थी।

मामले की पृष्ठभूमि

मामले की शुरुआत तब हुई जब कोरामंगला पुलिस स्टेशन, बेंगलुरु में 16 जनवरी 2026 को एक FIR दर्ज की गई। यह FIR Banning of Unregulated Deposit Schemes Act, 2019 (BUDS Act) की धारा 21(1) और 21(2) के तहत दर्ज की गई थी।

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पुलिस का आरोप था कि जार गोल्ड रिटेल प्राइवेट लिमिटेड अपने मोबाइल ऐप के माध्यम से लोगों से डिजिटल गोल्ड में निवेश ले रही थी, जिसमें ₹10 से लेकर लाखों रुपये तक निवेश किया जा सकता था।

शिकायत के अनुसार, कंपनी निवेशकों को रेफरल बोनस और अन्य आकर्षक लाभ का वादा करती थी तथा निवेश को डिजिटल रूप में दर्ज दिखाया जाता था, जबकि यह स्पष्ट नहीं था कि वास्तव में उतनी मात्रा में भौतिक सोना मौजूद है या नहीं।

इसके बाद पुलिस और जांच एजेंसियों ने कंपनी के दफ्तर और निदेशकों के घरों पर तलाशी लेकर दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए।

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कंपनी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने अदालत में कहा कि:

• कंपनी केवल सोने की खरीद-फरोख्त का डिजिटल प्लेटफॉर्म चलाती है

• हर लेनदेन के लिए इनवॉइस जारी किया जाता है

• ग्राहक द्वारा खरीदे गए सोने के बराबर भौतिक सोना सुरक्षित वॉल्ट में रखा जाता है

• यह किसी प्रकार की “डिपॉजिट स्कीम” नहीं है

याचिकाकर्ताओं ने यह भी कहा कि पिछले कई वर्षों में किसी निवेशक ने धोखाधड़ी की शिकायत नहीं की है और इसलिए FIR दर्ज करना अनुचित है।

राज्य की ओर से अतिरिक्त सरकारी वकील ने तर्क दिया कि:

• कंपनी का कारोबार हजारों करोड़ रुपये का हो चुका है

• इस पर SEBI या RBI का प्रत्यक्ष नियमन नहीं है

• यदि जांच न की गई तो यह बड़ा वित्तीय घोटाला बन सकता है

सरकार ने अदालत से अनुरोध किया कि कम से कम जांच जारी रहने दी जाए।

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अदालत ने अपने आदेश में कई महत्वपूर्ण टिप्पणियां कीं।

कोर्ट ने कहा कि आज के डिजिटल दौर में वित्तीय धोखाधड़ी केवल नकद जमा तक सीमित नहीं रह गई है। यह सोना, डिजिटल एसेट्स या अन्य निवेश योजनाओं के रूप में भी हो सकती है।

अदालत ने टिप्पणी की:

“कानून लेनदेन के बाहरी रूप से नहीं बल्कि उसकी वास्तविक प्रकृति और आर्थिक सार से संबंधित होता है।”

न्यायालय ने यह भी कहा कि:

• डिजिटल गोल्ड जैसी योजनाओं में निवेशकों की सुरक्षा महत्वपूर्ण है

• कई शिकायतें सामने आई हैं जिनकी जांच आवश्यक है

• विवादित तथ्यों का निर्धारण केवल जांच और ट्रायल में ही संभव है

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अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय कप्तान सिंह बनाम उत्तर प्रदेश राज्य का हवाला देते हुए कहा कि FIR को रद्द करना एक अपवाद है और जांच के प्रारंभिक चरण में ऐसा करना उचित नहीं होता।

कर्नाटक हाईकोर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि इस मामले में FIR रद्द करने के लिए कोई असाधारण परिस्थिति नहीं है।

अदालत ने कहा कि:

• मामले में गंभीर आरोप हैं

• निवेशकों की शिकायतें सामने आई हैं

• कई तथ्य जांच के दौरान ही स्पष्ट हो सकते हैं

इसी आधार पर कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी और पुलिस जांच जारी रखने की अनुमति दे दी।

Case Title: Nishchay Babu Arkalgud & Jar Gold Retail Pvt. Ltd. v. State of Karnataka

Case Number: Writ Petition No. 5968 of 2026

Decision Date: 4 March 2026

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