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डीएनए रिपोर्ट में आरोपी का मेल नहीं, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दी जमानत; यूपी की फोरेंसिक व्यवस्था पर जताई गंभीर चिंता

CB News Desk
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एटा की महिला हत्या मामले में आरोपी को जमानत देते हुए यूपी की फोरेंसिक प्रयोगशालाओं में आधुनिक उपकरणों और पर्याप्त संसाधनों की कमी पर गंभीर चिंता जताई। - मनोज बनाम उत्तर प्रदेश राज्य

डीएनए रिपोर्ट में आरोपी का मेल नहीं, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दी जमानत; यूपी की फोरेंसिक व्यवस्था पर जताई गंभीर चिंता

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एटा जिले की एक महिला की हत्या और कथित दुष्कर्म से जुड़े मामले में आरोपी को जमानत देते हुए उत्तर प्रदेश की फोरेंसिक जांच व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। अदालत ने कहा कि वैज्ञानिक साक्ष्यों की कमी और डीएनए प्रोफाइल तैयार न हो पाने के कारण न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।

मामले की पृष्ठभूमि

अभियोजन के अनुसार, 18 नवंबर 2025 को महिला अपने घर से खेत की ओर गई थी, लेकिन वापस नहीं लौटी। बाद में उसका शव नदी के पास बरामद हुआ। प्रारंभिक प्राथमिकी अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ दर्ज की गई थी।

जांच के दौरान कुछ गवाहों ने दावा किया कि उन्होंने आरोपी मनोज को घटना स्थल के आसपास देखा था। पुलिस ने आरोपी की निशानदेही पर मृतका की कथित घड़ी भी बरामद करने का दावा किया। इसके बाद आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।

जमानत याचिका में आरोपी की ओर से तर्क दिया गया कि उसका नाम एफआईआर में नहीं था और बाद में दर्ज किए गए बयानों के आधार पर उसे मामले में जोड़ा गया। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि फोरेंसिक रिपोर्ट आरोपी को अपराध से जोड़ने में असफल रही है।

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मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल ने फोरेंसिक रिपोर्ट का अवलोकन किया। रिपोर्ट में बताया गया कि मृतका के नमूनों से प्राप्त डीएनए का आरोपी के डीएनए से मिलान नहीं हो सका क्योंकि पर्याप्त डीएनए प्रोफाइल तैयार नहीं हो पाई।

अदालत ने कहा, “इस न्यायालय को आरोपी को जमानत देने के लिए बाध्य होना पड़ रहा है क्योंकि उपलब्ध फोरेंसिक रिपोर्ट यह स्थापित नहीं करती कि मृतका के नमूने में मिला डीएनए आरोपी का है।”

न्यायालय ने यह भी कहा कि महिलाओं के विरुद्ध गंभीर अपराधों के कई मामलों में ऐसी स्थिति सामने आती है, जहां वैज्ञानिक जांच अधूरी रह जाती है और अदालतों को पर्याप्त फोरेंसिक साक्ष्य नहीं मिल पाते।

सुनवाई के दौरान अदालत ने उत्तर प्रदेश की फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाओं में आधुनिक मशीनों और पर्याप्त कर्मचारियों की कमी पर चिंता व्यक्त की।

न्यायालय ने कहा कि पुरानी मशीनें और अधूरी आधारभूत सुविधाएं डीएनए प्रोफाइल तैयार करने में बाधा बन रही हैं। अदालत ने टिप्पणी की कि ऐसी कमियों का असर सीधे आपराधिक मामलों की जांच और न्यायिक प्रक्रिया पर पड़ता है।

अदालत ने राज्य सरकार से अपेक्षा जताई कि फोरेंसिक प्रयोगशालाओं को अत्याधुनिक उपकरण और पर्याप्त मानव संसाधन उपलब्ध कराए जाएं। इस संबंध में आदेश की प्रति मुख्य सचिव, उत्तर प्रदेश को भेजने का निर्देश भी दिया गया ताकि इसे मुख्यमंत्री के समक्ष रखा जा सके।

सभी तथ्यों, उपलब्ध साक्ष्यों, फोरेंसिक रिपोर्ट और मामले की परिस्थितियों पर विचार करने के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मनोज को जमानत देने का आदेश दिया।

अदालत ने स्पष्ट किया कि जमानत आदेश में की गई टिप्पणियां केवल जमानत याचिका के निस्तारण तक सीमित हैं और इनका प्रभाव मुकदमे की सुनवाई पर नहीं पड़ेगा।

आरोपी को व्यक्तिगत बंधपत्र और जमानतदार प्रस्तुत करने सहित निर्धारित शर्तों के अधीन रिहा करने का निर्देश दिया गया।

Case Details

Case Title: Manoj v. State of Uttar Pradesh

Case Number: Criminal Misc. Bail Application No. 13242 of 2026

Judge: Justice Arun Kumar Singh Deshwal

Decision Date: May 21, 2026

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