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एक ही विवाद पर बार-बार मध्यस्थता नहीं: सुप्रीम कोर्ट ने नई आर्बिट्रेशन याचिका खारिज की

Shivam
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एक ही विवाद पर दोबारा आर्बिट्रेशन की मांग नहीं की जा सकती, और पहले छोड़ी गई कार्यवाही के आधार पर नई याचिका खारिज की। - राजीव गद्ध बनाम सुबोध प्रकाश

एक ही विवाद पर बार-बार मध्यस्थता नहीं: सुप्रीम कोर्ट ने नई आर्बिट्रेशन याचिका खारिज की

नई दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में साफ कर दिया कि एक ही कारण (cause of action) पर बार-बार मध्यस्थता (arbitration) की मांग नहीं की जा सकती। अदालत ने कहा कि यदि पहले की कार्यवाही छोड़ दी गई हो, तो बिना अनुमति के उसी विवाद को दोबारा उठाना कानूनन स्वीकार्य नहीं है।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला राजीव गड्डा बनाम सुभोध प्रकाश के बीच भूमि और वित्तीय लेनदेन से जुड़े विवाद का है। दोनों पक्षों ने पंजाब के होशियारपुर में जमीन की नीलामी में संयुक्त रूप से भाग लिया था। इसके बाद उनके बीच कई समझौते हुए, जिनमें शेयर, ऋण और संपत्ति के अधिकार शामिल थे।

समझौतों में एक आर्बिट्रेशन क्लॉज भी था, जिसके तहत विवाद को मध्यस्थता के जरिए सुलझाने का प्रावधान था।

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वर्ष 2015 में प्रतिवादी (सुभोध प्रकाश) ने पहली बार आर्बिट्रेशन शुरू किया, लेकिन बाद में कार्यवाही में भाग लेना बंद कर दिया और मध्यस्थ पर पक्षपात का आरोप लगाकर प्रक्रिया से अलग हो गए।

मध्यस्थ ने 2020 में फैसला देते हुए अपीलकर्ता (राजीव गड्डा) के पक्ष में निर्णय दिया और प्रतिवादी के दावे खारिज कर दिए।

इसके बाद, 2021 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा नीलामी की वैधता बरकरार रखने के फैसले के आधार पर, प्रतिवादी ने फिर से आर्बिट्रेशन की मांग की और नई याचिका दायर की।

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने इस नई याचिका को स्वीकार करते हुए कहा कि ‘res judicata’ (पहले से तय मुद्दे) का सवाल आर्बिट्रेशन ट्रिब्यूनल तय करेगा।

सुप्रीम कोर्ट की पीठ न्यायमूर्ति आलोक अराधे एवं न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा ने मामले की सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि धारा 11 के तहत अदालत का दायरा सीमित होता है और यह मुख्य रूप से यह देखती है कि आर्बिट्रेशन एग्रीमेंट मौजूद है या नहीं।

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हालांकि, अदालत ने यह भी कहा कि:

“यदि कोई पक्ष पहले की कार्यवाही को स्वयं छोड़ देता है, तो उसे उसी विवाद पर नई कार्यवाही शुरू करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।”

पीठ ने पाया कि प्रतिवादी ने 2019 में स्पष्ट रूप से आर्बिट्रेशन कार्यवाही में भाग लेने से इनकार कर दिया था, जिससे यह साबित होता है कि उसने अपनी दावेदारी छोड़ दी थी।

अदालत ने यह भी कहा कि 2021 के फैसले से कोई नया कारण उत्पन्न नहीं हुआ, क्योंकि वह मामला केवल नीलामी की वैधता से जुड़ा था, न कि दोनों पक्षों के आपसी विवाद से।

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“एक ही कारण पर दोबारा याचिका दाखिल करना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है,” अदालत ने टिप्पणी की।

सुप्रीम कोर्ट ने यह निष्कर्ष निकाला कि नई आर्बिट्रेशन याचिका उसी पुराने कारण पर आधारित थी और सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 23 नियम 1 के तहत प्रतिबंधित है।

अदालत ने हाईकोर्ट के आदेश को रद्द करते हुए कहा कि यह याचिका कानूनी रूप से अस्वीकार्य (not maintainable) है।

इसके साथ ही अपील स्वीकार कर ली गई और मामले का निस्तारण कर दिया गया।

Case Details

Case Title: Rajiv Gaddh v. Subodh Parkash

Case Number: Civil Appeal (arising out of SLP (C) No. 4430 of 2025)

Judges: Justice Pamidighantam Sri Narasimha & Justice Alok Aradhe

Decision Date: April 1, 2026

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