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चुनाव ड्यूटी में हादसा: सुप्रीम कोर्ट ने कहा राज्य देगा मुआवजा, बीमा कंपनी नहीं

Vivek G.
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चुनाव ड्यूटी के लिए अधिग्रहित (requisition) किए गए वाहन की दुर्घटना में बीमा कंपनी नहीं, बल्कि संबंधित सरकारी प्राधिकरण जिम्मेदार होगा। - जिला मजिस्ट्रेट एवं जिला निर्वाचन अधिकारी एवं कलेक्टर, ग्वालियर बनाम नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड एवं अन्य।

चुनाव ड्यूटी में हादसा: सुप्रीम कोर्ट ने कहा राज्य देगा मुआवजा, बीमा कंपनी नहीं

नई दिल्ली में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया कि यदि कोई निजी वाहन सरकारी कार्य जैसे चुनाव के लिए अधिग्रहित (requisition) किया जाता है और उस दौरान दुर्घटना होती है, तो जिम्मेदारी बीमा कंपनी की नहीं बल्कि उस सरकारी प्राधिकरण की होगी जिसने वाहन को अपने नियंत्रण में लिया था।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला 23 जनवरी 2010 की एक सड़क दुर्घटना से जुड़ा है, जिसमें एक बस और मोटरसाइकिल की टक्कर में बाइक सवार की मृत्यु हो गई थी।

बस एक निजी स्कूल की थी, लेकिन उस समय उसे ग्राम पंचायत चुनाव ड्यूटी के लिए जिला प्रशासन द्वारा requisition किया गया था। मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT), ग्वालियर ने मृतक के परिजनों को ₹5.13 लाख मुआवजा देने का आदेश दिया था।

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बाद में, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मुआवजा बढ़ाकर ₹27.01 लाख कर दिया और बीमा कंपनी की बजाय जिला प्रशासन (राज्य) को भुगतान के लिए जिम्मेदार ठहराया।

सुप्रीम कोर्ट के सामने मुख्य सवाल था:

क्या इस मामले में बीमा कंपनी जिम्मेदार होगी या वह सरकारी प्राधिकरण जिसने वाहन को चुनाव कार्य के लिए अपने नियंत्रण में लिया था?

न्यायमूर्ति संजय करोल की पीठ ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि जब कोई वाहन सरकार द्वारा requisition किया जाता है, तो उसका नियंत्रण पूरी तरह से राज्य के पास चला जाता है।

कोर्ट ने कहा:

“जब वाहन राज्य के नियंत्रण में होता है, तो उसके संचालन, उपयोग और जोखिम की जिम्मेदारी भी उसी के साथ जाती है।”

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पीठ ने यह भी जोड़ा कि वाहन मालिक उस अवधि में वाहन के उपयोग पर कोई नियंत्रण नहीं रखता, और न ही वह यह तय कर सकता है कि वाहन कब और कैसे चलेगा।

कोर्ट ने पहले के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि:

“जिसके पास वाहन का नियंत्रण और कब्जा होता है, वही कानूनन ‘मालिक’ माना जाएगा, भले ही वह पंजीकृत मालिक न हो।”

सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि बीमा पॉलिसी सामान्य परिस्थितियों के लिए होती है यानी जब वाहन मालिक के नियंत्रण में हो।

यदि वाहन को सरकारी आदेश के तहत सार्वजनिक कार्य के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है, तो यह बीमा अनुबंध की सामान्य शर्तों से बाहर हो जाता है।

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कोर्ट ने कहा:

“बीमा कंपनी को उस जोखिम के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता जो सरकारी नियंत्रण में उत्पन्न हुआ हो।”

सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए जिला प्रशासन की अपील खारिज कर दी।

अदालत ने अंतिम रूप से यह निर्णय दिया कि:

• दुर्घटना के समय वाहन सरकारी नियंत्रण में था

• इसलिए मुआवजा देने की जिम्मेदारी राज्य/प्राधिकरण की होगी

• बीमा कंपनी इस मामले में जिम्मेदार नहीं होगी

“जहां राज्य नियंत्रण लेता है, वहां उससे उत्पन्न कानूनी जिम्मेदारी भी उसी पर होगी।”

Case Title: District Magistrate & District Election Officer & Collector, Gwalior v. National Insurance Company Ltd. & Ors.

Case Number: Civil Appeal arising out of SLP (C) No. 22910 of 2025

Judge: Justice Sanjay Karol, Justice Nongmeikapam Kotiswar Singh

Decision Date: March 23, 2026

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