Logo

विदेशी कोर्ट का तलाक आदेश मान्य नहीं: सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 142 के तहत विवाह समाप्त किया

Shivam
Add Court Book as a preferred source on Google

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि विदेशी अदालत का तलाक आदेश भारतीय कानून के अनुरूप न हो तो मान्य नहीं होगा, लेकिन Article 142 के तहत विवाह समाप्त घोषित किया। - किशोरकुमार मोहन काले बनाम कश्मीरा काले

विदेशी कोर्ट का तलाक आदेश मान्य नहीं: सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 142 के तहत विवाह समाप्त किया

विदेश में दिए गए तलाक के आदेश की वैधता पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। अदालत ने कहा कि यदि विदेशी अदालत का तलाक आदेश उस कानून के आधार पर दिया गया है जो भारत में मान्य नहीं है, तो उसे भारतीय अदालतें मान्यता नहीं देंगी।

हालांकि, लगभग 18 साल से अलग रह रहे पति-पत्नी के विवाद को समाप्त करने के लिए कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 की विशेष शक्तियों का उपयोग करते हुए विवाह को समाप्त घोषित कर दिया।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला किशोरकुमार मोहन काले बनाम कश्मीरा काले से जुड़ा है। दोनों की शादी 25 दिसंबर 2005 को मुंबई में हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार हुई थी। शादी के समय दोनों अमेरिका में रह रहे थे और बाद में वहीं साथ रहने लगे।

कुछ समय बाद वैवाहिक संबंधों में विवाद पैदा हुआ। पत्नी ने सितंबर 2008 में अमेरिका के ओकलैंड काउंटी की सर्किट कोर्ट में तलाक की याचिका दाखिल की।

Court Book subscription: bare acts, legal drafts, court judgments and ad-free legal news, plans from ₹30/month

Read also:- पत्नी की हत्या मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त, आरोपी पति की उम्रकैद की सजा बरकरार

फरवरी 2009 में अमेरिकी अदालत ने विवाह समाप्त करते हुए तलाक का आदेश दे दिया और संपत्ति के बंटवारे सहित कुछ आर्थिक निर्देश भी दिए।

इसी बीच पति ने अक्टूबर 2008 में पुणे फैमिली कोर्ट में हिंदू विवाह अधिनियम के तहत तलाक की याचिका दायर कर दी।

पुणे फैमिली कोर्ट ने 2009 में कहा कि चूंकि शादी भारत में हिंदू रीति-रिवाजों से हुई थी, इसलिए हिंदू विवाह अधिनियम (HMA) लागू होगा और पुणे कोर्ट को मामले की सुनवाई का अधिकार है।

लेकिन पत्नी ने इस आदेश को बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी।

हाईकोर्ट ने 2010 में फैसला दिया कि दोनों पति-पत्नी अमेरिका में बसे हुए थे और वहीं अंतिम बार साथ रहे थे, इसलिए अमेरिकी अदालत का अधिकार क्षेत्र सही है। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने पुणे फैमिली कोर्ट का आदेश रद्द कर दिया।

इसके बाद पति ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

Read also:- आपसी सहमति से हुआ ‘मुबारा’ तलाक मान्य: गुजरात हाईकोर्ट ने शादी समाप्त घोषित की

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने सुनवाई के दौरान विदेशी अदालतों के तलाक आदेश की मान्यता पर महत्वपूर्ण सिद्धांत स्पष्ट किए।

पीठ ने कहा कि किसी विदेशी अदालत के तलाक आदेश को भारत में तभी स्वीकार किया जा सकता है जब:

• वह उसी वैवाहिक कानून के आधार पर दिया गया हो जो पक्षों पर लागू होता है

• दोनों पक्षों ने विदेशी अदालत की कार्यवाही में प्रभावी रूप से भाग लिया हो

• प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन किया गया हो

अदालत ने कहा:

“विदेशी अदालत का तलाक आदेश तभी मान्य होगा जब वह उस वैवाहिक कानून के अनुरूप हो जो पक्षों पर लागू होता है।”

कोर्ट ने पाया कि अमेरिकी अदालत ने विवाह को “irretrievable breakdown of marriage” (विवाह का पूर्ण टूट जाना) के आधार पर समाप्त किया था, जबकि यह आधार हिंदू विवाह अधिनियम में मान्य नहीं है।

Read also:- चेक बाउंस केस में राजपाल यादव को बड़ी राहत, दिल्ली हाईकोर्ट ने फिलहाल जेल भेजने से रोका

साथ ही, पति ने अमेरिकी अदालत की कार्यवाही में प्रभावी रूप से भाग भी नहीं लिया था।

इन तथ्यों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अमेरिकी अदालत द्वारा दिया गया तलाक आदेश भारतीय कानून के तहत मान्य नहीं माना जा सकता।

हालांकि अदालत ने यह भी माना कि पति-पत्नी 2008 से अलग रह रहे हैं और उनके बीच सुलह की कोई संभावना नहीं बची है।

इस स्थिति में कोर्ट ने कहा:

“लगभग अठारह वर्षों से पक्ष अलग रह रहे हैं और वैवाहिक संबंध समाप्त हो चुका है।”

अंततः सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का उपयोग करते हुए विवाह को समाप्त घोषित कर दिया।

इसके साथ ही बॉम्बे हाईकोर्ट का आदेश रद्द कर दिया गया और मामले का निपटारा कर दिया गया।

Case Title: Kishorekumar Mohan Kale v. Kashmira Kale

Case Number: Civil Appeal No. 1342 of 2013

Decision Date: 15 January 2026

Download Judgment

Take CourtBook Everywhere

Access your account on the go with our mobile app.

Get it on Google PlayDownload on the App Store
Join the Court Book WhatsApp channel for latest judgments, notifications, legal news and exam updates