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गोवा में पोर्ट की जमीन पर शिवाजी महाराज की मूर्ति पर विवाद: बॉम्बे हाईकोर्ट ने हटाने का दिया आदेश, प्रशासन की निष्क्रियता पर सख्त टिप्पणी

Shivam
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गोवा हाईकोर्ट ने पोर्ट की जमीन पर बिना अनुमति बनी शिवाजी महाराज की मूर्ति हटाने का आदेश दिया और प्रशासन की निष्क्रियता पर सख्त टिप्पणी की। - मोरमुगाओ पोर्ट अथॉरिटी बनाम गोवा राज्य और अन्य।

गोवा में पोर्ट की जमीन पर शिवाजी महाराज की मूर्ति पर विवाद: बॉम्बे हाईकोर्ट ने हटाने का दिया आदेश, प्रशासन की निष्क्रियता पर सख्त टिप्पणी

गोवा में स्थित मोर्मुगाओ पोर्ट अथॉरिटी (MPA) की जमीन पर बिना अनुमति स्थापित की गई छत्रपति शिवाजी महाराज की मूर्ति को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट (गोवा बेंच) ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने राज्य प्रशासन और पुलिस की निष्क्रियता पर गंभीर सवाल उठाते हुए मूर्ति और उससे जुड़े निर्माण को हटाने के निर्देश दिए।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला तब शुरू हुआ जब मोर्मुगाओ पोर्ट अथॉरिटी ने आरोप लगाया कि कुछ अज्ञात लोगों ने उसकी जमीन पर जबरन प्रवेश कर एक स्थायी मूर्ति का निर्माण शुरू कर दिया।

पोर्ट अथॉरिटी ने 16 फरवरी और 20 फरवरी 2026 को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, लेकिन आरोप है कि पुलिस ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। इसके बावजूद निर्माण कार्य जारी रहा और 19 फरवरी को एक सार्वजनिक कार्यक्रम में मूर्ति का अनावरण भी कर दिया गया।

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सुनवाई के दौरान न्यायालय ने पाया कि संबंधित जमीन पोर्ट अथॉरिटी की है और इस पर किसी प्रकार का स्वामित्व विवाद नहीं है।

अदालत ने प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा:

“यह स्पष्ट है कि पोर्ट की संपत्ति पर अतिक्रमण हुआ और राज्य के अधिकारी मूकदर्शक बने रहे।”

कोर्ट ने यह भी कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना राज्य का कर्तव्य है और वह यह नहीं कह सकता कि संबंधित संस्था खुद अपनी सुरक्षा करे।

“जहां कानून-व्यवस्था का प्रश्न हो, वहां केवल राज्य की एजेंसियां ही प्रभावी ढंग से हस्तक्षेप कर सकती हैं।”

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राज्य सरकार ने तर्क दिया कि पोर्ट अथॉरिटी के पास खुद अपनी जमीन की सुरक्षा के लिए पर्याप्त साधन हैं और वह वैधानिक उपायों जैसे पब्लिक प्रिमाइसेस एक्ट के तहत कार्रवाई कर सकती है।

साथ ही यह भी कहा गया कि स्थानीय लोग उस जगह को सार्वजनिक स्थान मानते थे और धार्मिक भावनाओं के चलते मूर्ति स्थापित की गई।

कोर्ट ने इन तर्कों को खारिज करते हुए कहा कि:

• बिना अनुमति निर्माण स्पष्ट रूप से अवैध है

• यह मामला केवल सिविल विवाद नहीं बल्कि कानून-व्यवस्था का मुद्दा भी है

• राज्य की निष्क्रियता से अतिक्रमण को बढ़ावा मिला

अदालत ने यह भी माना कि जब निर्माण करने वाले लोग अज्ञात हों, तब वैकल्पिक वैधानिक उपाय पर्याप्त नहीं होते।

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अंतरिम आदेश में हाईकोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए:

• संबंधित क्षेत्र में किसी भी प्रकार का आगे का निर्माण तुरंत रोका जाए

• पुलिस और प्रशासन पर्याप्त सुरक्षा प्रदान करें

• मोर्मुगाओ पोर्ट अथॉरिटी को मूर्ति, प्लेटफॉर्म और अन्य निर्माण हटाने की अनुमति दी जाए

• क्षेत्र को उसकी मूल स्थिति में बहाल किया जाए

कोर्ट ने पुलिस अधीक्षक को व्यक्तिगत रूप से आदेश के पालन की जिम्मेदारी दी और 4 मई 2026 तक अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने को कहा।

Case Details

Case Title: Mormugao Port Authority vs State of Goa & Ors.

Case Number: Writ Petition No. 511 of 2026

Judge: Justice Valmiki Menezes & Justice Amit S. Jamsandekar

Decision Date: 7 April 2026

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