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गुजरात हाईकोर्ट ने हत्या की सजा बदली: धारा 302 से 304 पार्ट-I में दोष सिद्ध, 10 साल की सजा बरकरार

Vivek G.
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रावल शैलेशभाई रमेशभाई वीरचंदभाई बनाम गुजरात राज्य, गुजरात हाईकोर्ट ने हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा बदली, धारा 302 से 304 पार्ट-I में दोष सिद्ध, 10 साल की सजा बरकरार।

गुजरात हाईकोर्ट ने हत्या की सजा बदली: धारा 302 से 304 पार्ट-I में दोष सिद्ध, 10 साल की सजा बरकरार

अहमदाबाद स्थित गुजरात हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में हत्या के मामले में सुनाई गई उम्रकैद की सजा को बदलते हुए उसे गैर-इरादतन हत्या (Culpable Homicide) की श्रेणी में रखा। अदालत ने आरोपी की धारा 302 आईपीसी के तहत दोषसिद्धि को बदलकर धारा 304 पार्ट-I के तहत कर दिया, लेकिन 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा को बरकरार रखा।

यह फैसला 17 फरवरी 2026 को सुनाया गया। अदालत ने कहा कि घटना अचानक हुए झगड़े का परिणाम थी, न कि पूर्व नियोजित हत्या।

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मामला क्या था?

रिकॉर्ड के अनुसार, 20 जून 2016 को महेसाणा में वाइड एंगल सिनेमा के पास मृतक गोविंदभाई रावल अपने सोडा रिक्शा के पास खड़े थे। उसी दौरान आरोपी शैलेशभाई रावल वहां पहुंचे। शुरुआत में दोनों के बीच मजाक और हल्की-फुल्की नोकझोंक हुई, लेकिन देखते ही देखते बात बढ़ गई।

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प्रॉसीक्यूशन के अनुसार, आरोपी ने जेब से चाकू निकालकर मृतक पर पेट, सीने, गर्दन और हाथों पर कई वार किए। घायल को पहले महेसाणा सिविल अस्पताल और फिर अहमदाबाद सिविल अस्पताल ले जाया गया, जहां आठ दिन बाद उसकी मौत हो गई।

इस मामले में सत्र न्यायालय ने आरोपी को धारा 302 आईपीसी के तहत उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसी फैसले के खिलाफ अपील दायर की गई थी।

सत्र अदालत में क्या हुआ?

ट्रायल के दौरान अभियोजन पक्ष ने 23 गवाह पेश किए। हालांकि मुख्य प्रत्यक्षदर्शी और शिकायतकर्ता गवाही के दौरान मुकर गया।

लेकिन डॉक्टरों की गवाही और अस्पताल में दर्ज मृतक के बयान (डाइंग डिक्लेरेशन) पर अदालत ने भरोसा किया। दोनों अस्पतालों में दर्ज बयानों में मृतक ने स्पष्ट रूप से आरोपी का नाम लिया था।

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बचाव पक्ष ने कहा कि घटना अचानक हुई बहस का परिणाम थी। कोई पूर्व योजना या दुश्मनी नहीं थी। आरोपी करीब 8 साल 10 महीने की सजा पहले ही काट चुका है, इसलिए उसे राहत दी जानी चाहिए।

राज्य पक्ष ने कहा कि चाकू से शरीर के महत्वपूर्ण हिस्सों पर कई वार किए गए थे। मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार, कुछ चोटें ऐसी थीं जो सामान्य परिस्थितियों में मौत का कारण बन सकती थीं।

अदालत की महत्वपूर्ण टिप्पणी

खंडपीठ ने कहा कि:

“रिकॉर्ड से यह स्पष्ट है कि झगड़ा अचानक हुआ। पूर्व नियोजन का कोई ठोस प्रमाण नहीं है। हालांकि, आरोपी को यह ज्ञान अवश्य था कि वह जो कर रहा है उससे मृत्यु हो सकती है।”

अदालत ने यह भी माना कि मरने से पहले दिए गए बयानों में आरोपी का नाम साफ तौर पर लिया गया था और वे विश्वसनीय थे।

कोर्ट ने विस्तार से समझाया कि हर हत्या, हत्या की श्रेणी में नहीं आती। अगर इरादा स्पष्ट न हो लेकिन आरोपी को यह ज्ञान हो कि उसके कृत्य से मौत हो सकती है, तो मामला धारा 304 पार्ट-I के अंतर्गत आता है।

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पीठ ने कहा कि यहां वार गंभीर थे, लेकिन घटना अचानक हुई और पहले से कोई योजना नहीं थी। इसलिए यह मामला धारा 302 के बजाय धारा 304 पार्ट-I में आता है।

अंतिम फैसला

हाईकोर्ट ने सत्र अदालत का फैसला आंशिक रूप से बदलते हुए कहा:

• धारा 302 आईपीसी के तहत दोषसिद्धि को बदलकर धारा 304 पार्ट-I किया जाता है।

• उम्रकैद की सजा को घटाकर 10 वर्ष के कठोर कारावास में परिवर्तित किया जाता है।

• आरोपी को कुल 10 वर्ष की वास्तविक सजा पूरी करने के बाद ही रिहा किया जाएगा।

• जुर्माना और डिफॉल्ट सजा यथावत रहेगी।

इसी के साथ अपील आंशिक रूप से स्वीकार कर ली गई।

Case Title: Raval Shaileshbhai Rameshbhai Virchandbhai vs State of Gujarat

Case No.: R/Criminal Appeal No. 1456 of 2018

Decision Date: 17 February 2026

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