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हार्ट अटैक को ‘एम्प्लॉयमेंट इंजरी’ नहीं माना जा सकता बिना सबूत: गुजरात हाईकोर्ट ने ESI मुआवजा आदेश रद्द किया

Shivam
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गुजरात हाईकोर्ट ने कहा कि बिना ठोस सबूत के हार्ट अटैक को रोजगार से जुड़ी चोट नहीं माना जा सकता और ESI मुआवजा आदेश रद्द कर दिया। - कर्मचारी राज्य बीमा निगम बनाम सुधाबेन रमनभाई पटेल एवं अन्य

हार्ट अटैक को ‘एम्प्लॉयमेंट इंजरी’ नहीं माना जा सकता बिना सबूत: गुजरात हाईकोर्ट ने ESI मुआवजा आदेश रद्द किया

गुजरात हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि केवल ड्यूटी के दौरान हार्ट अटैक से हुई मौत को स्वतः “रोजगार से जुड़ी चोट” (employment injury) नहीं माना जा सकता, जब तक इसके पीछे काम से जुड़ा सीधा संबंध साबित न हो।

मामले की पृष्ठभूमि

मामला कर्मचारी राज्य बीमा निगम बनाम सुधाबेन रमणभाई पटेल से जुड़ा है। मृतक रमणभाई पटेल एक फैक्ट्री में फिटर के रूप में कार्यरत थे और ESI योजना के अंतर्गत बीमित थे।

6 सितंबर 2004 को काम के दौरान उन्हें अचानक सीने और पेट में दर्द हुआ। बाद में अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मृत्यु का कारण “कोरोनरी हार्ट डिजीज के कारण कार्डियो-रेस्पिरेटरी अरेस्ट” बताया गया।

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परिवार ने ESI से मुआवजे की मांग की, जिसे पहले खारिज कर दिया गया, लेकिन ESI कोर्ट ने बाद में दावा स्वीकार कर लिया। इसी आदेश को ESI कॉर्पोरेशन ने हाईकोर्ट में चुनौती दी।

न्यायमूर्ति जे.सी. दोषी की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि ESI अधिनियम एक सामाजिक कल्याण कानून है, इसलिए इसका उदार व्याख्या की जानी चाहिए।

हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि:

“किसी भी लाभ के लिए यह साबित करना आवश्यक है कि चोट या बीमारी का सीधा संबंध रोजगार से हो।”

कोर्ट ने पाया कि मृतक के परिवार ने यह साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत पेश नहीं किए कि काम के तनाव या परिस्थितियों ने हार्ट अटैक को जन्म दिया।

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पीठ ने कहा:

“सिर्फ यह तथ्य कि कर्मचारी ड्यूटी के दौरान मृत हुआ, यह पर्याप्त नहीं है। रोजगार और मृत्यु के बीच स्पष्ट ‘कारण संबंध’ (causal nexus) स्थापित होना चाहिए।”

मुख्य प्रश्न यह था कि क्या साधारण हार्ट अटैक को “एम्प्लॉयमेंट इंजरी” माना जा सकता है।

कोर्ट ने कहा कि:

• “एम्प्लॉयमेंट इंजरी” के लिए यह जरूरी है कि चोट या बीमारी काम से उत्पन्न हुई हो या उससे जुड़ी हो

• केवल बीमारी या प्राकृतिक कारण से हुई मृत्यु को रोजगार से जोड़ना पर्याप्त नहीं

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कोर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि इस मामले में:

• रोजगार और मृत्यु के बीच कोई ठोस संबंध साबित नहीं हुआ

• ESI कोर्ट का मुआवजा देने का आदेश कानूनी रूप से गलत था

इसलिए हाईकोर्ट ने:

• ESI कोर्ट का आदेश रद्द कर दिया

• मुआवजा दावा खारिज कर दिया

हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि:

“अब तक जो भी निर्भरता लाभ (dependency benefit) दिया जा चुका है, उसकी वसूली नहीं की जाएगी।”

Case Details

Case Title: Employees State Insurance Corporation vs Sudhaben Ramanbhai Patel & Ors.

Case Number: First Appeal No. 656 of 2011

Judge: Justice J. C. Doshi

Decision Date: April 2, 2026

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