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गुजरात हाईकोर्ट ने बहाल करने से किया इनकार, 16 बार गैरहाजिरी पर खारिज सूट बहाल नहीं होगा

Vivek G.
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सरदार हिम्मतभाई खोकर एवं अन्य का एलआर बनाम जेसंगभाई अमथाभाई एवं अन्य का एलआर, गुजरात हाईकोर्ट ने 16 बार गैरहाजिरी के बाद खारिज सिविल सूट बहाल करने से इनकार किया, देरी माफी याचिका भी खारिज।

गुजरात हाईकोर्ट ने बहाल करने से किया इनकार, 16 बार गैरहाजिरी पर खारिज सूट बहाल नहीं होगा

गुजरात हाईकोर्ट ने एक पुराने जमीन विवाद में सख्त रुख अपनाते हुए वह याचिका खारिज कर दी, जिसमें 2018 में गैरहाजिरी के कारण खारिज हुई सिविल सूट को फिर से बहाल करने की मांग की गई थी। अदालत ने साफ कहा-जो पक्षकार खुद अपने मुकदमे में दिलचस्पी नहीं दिखाता, उसे अदालत की सहानुभूति नहीं मिल सकती।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला LR of Sardar Himmatbhai Khokar & Ors. बनाम LR of Jesangbhai Amthabhai & Ors. से जुड़ा है LR OF SARDAR HIMMATBHAI KHOKAR। मूल वाद 2002 में दायर हुआ था, जिसमें 1970 की एक बिक्री विलेख (Sale Deed) को फर्जी और धोखाधड़ी बताकर रद्द करने की मांग की गई थी।

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26 दिसंबर 2016 को ट्रायल कोर्ट ने मुद्दे तय किए। इसके बाद वादी को सबूत पेश करने थे। रिकॉर्ड से पता चला कि उन्हें नोटिस भी दिया गया। इसके बावजूद वे लगातार अनुपस्थित रहे। करीब 16 तारीखों पर मौका मिलने के बाद भी कोई गवाही नहीं दी गई। अंततः 15 अक्टूबर 2018 को अदालत ने मुकदमा गैरहाजिरी के आधार पर खारिज कर दिया।

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करीब 14 महीने 15 दिन बाद वादियों ने देरी माफी (Condonation of Delay) और मुकदमा बहाल करने की संयुक्त अर्जी लगाई। ट्रायल कोर्ट ने इसे 28 अक्टूबर 2021 को खारिज कर दिया। इसी आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई।

याचिकाकर्ता की दलील

याचिकाकर्ताओं के वकील ने दलील दी कि उनके पुराने वकील ने उन्हें केस की प्रगति नहीं बताई। उन्हें मुकदमे के खारिज होने की जानकारी तब हुई, जब प्रतिवादी जमीन बेचने की प्रक्रिया शुरू करने लगे।

दलील दी गई कि “वादियों को अपने वकील की गलती की सजा नहीं मिलनी चाहिए।” उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का भी हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि न्याय तकनीकी आधार पर नहीं, बल्कि वास्तविक न्याय के आधार पर होना चाहिए।

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दूसरी ओर, प्रतिवादी के वकील ने कहा कि वादी को नोटिस मिला था। उन्हें 16 बार मौका दिया गया। इसके बावजूद वे अदालत में उपस्थित नहीं हुए।

उन्होंने कहा, “इतनी लंबी देरी का कोई ठोस कारण नहीं बताया गया है। सिर्फ वकील पर दोष डालना पर्याप्त नहीं है।”

अदालत की टिप्पणियां

माननीय न्यायमूर्ति देवेन एम. देसाई ने रिकॉर्ड का विस्तार से अध्ययन किया। कोर्ट ने पाया कि वादियों ने अपनी अर्जी में यह तक स्पष्ट नहीं किया कि उन्हें मुकदमा खारिज होने की जानकारी कब और कैसे मिली।

अदालत ने कहा,“जो पक्षकार यह नहीं बताता कि उसे आदेश की जानकारी कब मिली, उसके बारे में यही माना जाएगा कि उसे उसी दिन जानकारी थी जिस दिन आदेश पारित हुआ।”

कोर्ट ने यह भी कहा कि एक सतर्क वादी को अपने मुकदमे की प्रगति पर नजर रखनी चाहिए। सिर्फ यह कहना कि वकील ने जानकारी नहीं दी, पर्याप्त नहीं है।

न्यायालय ने टिप्पणी की,“आधुनिक समय में सभी आदेश और फैसले अदालत की वेबसाइट पर उपलब्ध होते हैं। कोई भी वादी यह बहाना नहीं बना सकता कि उसे आदेश की जानकारी नहीं थी।”

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि देरी माफी के मामलों में उदार दृष्टिकोण अपनाया जाता है, लेकिन यह तभी संभव है जब वादी की नीयत और आचरण रिकॉर्ड पर साफ दिखे। यहां रिकॉर्ड से लापरवाही साफ नजर आई।

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अंतिम निर्णय

सभी तथ्यों पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने पाया कि ट्रायल कोर्ट का आदेश सही था।

अदालत ने कहा कि याचिका में कोई दम नहीं है और इसे खारिज किया जाता है। साथ ही, यदि कोई अंतरिम राहत दी गई थी, तो वह भी तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई।

Case Title: LR of Sardar Himmatbhai Khokar & Ors. v. LR of Jesangbhai Amthabhai & Ors.

Case No.: R/Special Civil Application No. 3651 of 2022

Decision Date: 09 February 2026

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