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गुजरात हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: देरी खारिज होने पर भी सिविल अपील होगी मान्य, जिला कोर्ट का आदेश रद्द

Vivek G.
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राठवा मीनाबेन पहाड़सिंह एवं अन्य बनाम सोलंकी करणसिंह गेमलसिंह एवं अन्य। गुजरात हाईकोर्ट ने कहा कि देरी माफी अर्जी खारिज होने पर भी सिविल अपील मान्य है, जिला कोर्ट का आदेश रद्द।

गुजरात हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: देरी खारिज होने पर भी सिविल अपील होगी मान्य, जिला कोर्ट का आदेश रद्द

गुजरात हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में साफ कर दिया है कि अगर किसी सिविल मामले में देरी माफ करने की अर्जी खारिज होती है, तो उसके खिलाफ सिविल मिक्स अपील दायर की जा सकती है। अदालत ने जिला कोर्ट का वह आदेश रद्द कर दिया जिसमें अपील को “गैर-मान्य” बताया गया था।

यह फैसला न्यायमूर्ति डी.एम. देसाई ने 2 फरवरी 2026 को सुनाया।

मामले की पृष्ठभूमि

यह याचिका Rathva Meenaben Pahadsinh & Anr. vs Solanki Karansinh Gemalsinh & Ors. मामले में दायर की गई थी।

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मूल वाद वर्ष 2016 में दायर हुआ था। बाद में अदालतों के स्थानांतरण के कारण यह केस अलग-अलग कोर्ट में जाता रहा और अंततः बोडेली की सिविल कोर्ट में पहुंचा।

14 नवंबर 2017 को वादी पक्ष की अनुपस्थिति के कारण मुकदमा खारिज कर दिया गया। वादियों का कहना था कि उन्हें इस आदेश की जानकारी काफी समय बाद मिली। इसके बाद उन्होंने देरी माफ करने के साथ-साथ मुकदमा बहाल करने की अर्जी दाखिल की।

ट्रायल कोर्ट ने देरी माफ करने से इनकार कर दिया। इसके खिलाफ सिविल मिक्स अपील दाखिल की गई, लेकिन जिला अदालत ने यह कहते हुए अपील खारिज कर दी कि ऐसी अपील सुनवाई योग्य ही नहीं है।

याचिकाकर्ताओं की दलील

याचिकाकर्ताओं के वकील ने अदालत में तर्क दिया कि सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC) के आदेश 9 नियम 9 के तहत यदि मुकदमा अनुपस्थिति में खारिज होता है, तो उसे बहाल करने की अर्जी दी जा सकती है।

उन्होंने कहा, “जब देरी माफ करने की अर्जी खारिज होती है, तो असल में बहाली की मुख्य अर्जी भी खारिज हो जाती है। ऐसे में यह आदेश अपील योग्य है।”

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उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के दो फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि “रिजेक्ट” शब्द का मतलब केवल मेरिट पर खारिज करना नहीं होता, बल्कि किसी भी तरह की अस्वीकृति इसमें शामिल है।

प्रतिवादी पक्ष ने जिला अदालत के आदेश का समर्थन किया। उनका कहना था कि देरी माफ करने की अर्जी एक अलग आवेदन है और उसके खारिज होने के खिलाफ सीधे अपील का प्रावधान नहीं है।

हाईकोर्ट की टिप्पणी

न्यायमूर्ति देसाई ने आदेश 43 नियम 1(सी) का उल्लेख करते हुए कहा कि आदेश 9 नियम 9 के तहत बहाली की अर्जी खारिज होने पर अपील का अधिकार है।

अदालत ने कहा, “जब देरी माफ करने से इनकार किया जाता है, तो परिणामस्वरूप बहाली की अर्जी भी खारिज हो जाती है। ऐसे में यह आदेश अपील योग्य माना जाएगा।”

कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि अपील का अधिकार एक “सार्थक अधिकार” है और इसे संकीर्ण रूप में नहीं पढ़ा जा सकता।

न्यायालय ने कहा, “कानून में जहां ‘रिजेक्टिंग एन एप्लीकेशन’ शब्द इस्तेमाल हुआ है, वहां अतिरिक्त शर्तें जोड़ना उचित नहीं होगा।”

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अंतिम निर्णय

अदालत ने पाया कि जिला अदालत ने अपील को गैर-मान्य बताकर अधिकार क्षेत्र की गलती की है।

हाईकोर्ट ने 30 जून 2022 का जिला अदालत का आदेश रद्द कर दिया और निर्देश दिया कि सिविल मिक्स अपील को मेरिट पर सुना जाए।

साथ ही स्पष्ट किया गया कि जिला अदालत मामले की सुनवाई करते समय हाईकोर्ट की टिप्पणियों से प्रभावित न हो।

याचिका इसी निर्देश के साथ स्वीकार कर ली गई।

Case Title: Rathva Meenaben Pahadsinh & Anr. vs Solanki Karansinh Gemalsinh & Ors.

Case No.: R/Special Civil Application No. 19963 of 2022

Decision Date: 02 February 2026

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