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अवैध रेत खनन की याचिका पर हाईकोर्ट सख्त: ‘व्यक्तिगत रंजिश या प्रायोजित मुकदमे’ का आरोप, याचिका खारिज

Vivek G.
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वीरेंद्र पाटिल बनाम मध्य प्रदेश राज्य और अन्य, मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने अवैध रेत खनन को लेकर दायर याचिका को लोकस स्टैंडी के अभाव में खारिज किया, कहा– यह व्यक्तिगत रंजिश या प्रायोजित मुकदमा।

अवैध रेत खनन की याचिका पर हाईकोर्ट सख्त: ‘व्यक्तिगत रंजिश या प्रायोजित मुकदमे’ का आरोप, याचिका खारिज

जबलपुर स्थित मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में अवैध रेत खनन और कथित भ्रष्टाचार को लेकर दायर एक याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने कड़ा रुख अपनाया। लंबी दलीलों के बाद खंडपीठ ने याचिका को सुनवाई योग्य मानने से इनकार करते हुए खारिज कर दिया। अदालत ने साफ कहा कि इस तरह की शिकायतें सक्षम वैधानिक प्राधिकरणों के समक्ष उठाई जानी चाहिए, न कि रिट याचिका के जरिए।

मामले की पृष्ठभूमि

याचिकाकर्ता विरेंद्र पाटिल ने राज्य सरकार और अन्य अधिकारियों के खिलाफ रिट याचिका दायर की थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि कुछ फर्मों द्वारा बड़े पैमाने पर अवैध रेत खनन किया जा रहा है, जबकि वे कथित तौर पर ब्लैकलिस्टेड हैं।

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याचिका में यह भी कहा गया कि कुछ सरकारी अधिकारी इस अवैध गतिविधि में मिलीभगत कर रहे हैं और बिना रॉयल्टी भुगतान के रेत का उत्खनन हो रहा है। याचिकाकर्ता ने अदालत से रॉयल्टी वसूली, अधिकारियों की भूमिका की जांच और नदी तल से नीचे तक खनन की जांच के निर्देश देने की मांग की थी।

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अदालत का अवलोकन

सुनवाई के दौरान अदालत ने सबसे पहले याचिकाकर्ता के लोकस स्टैंडी (याचिका दायर करने का अधिकार) पर सवाल उठाया। खंडपीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता यह स्पष्ट नहीं कर पाया कि उसे इस मामले में व्यक्तिगत रूप से क्या नुकसान हुआ है।

पीठ ने टिप्पणी की,

“याचिकाकर्ता किसी व्यक्तिगत अधिकार के हनन की बात नहीं कर रहा है। ऐसे में संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत इस तरह की राहत नहीं दी जा सकती।”

अदालत ने यह भी नोट किया कि याचिका का फोकस मुख्य रूप से एक निजी व्यक्ति पर केंद्रित है, जिससे यह संदेह पैदा होता है कि मामला किसी व्यक्तिगत रंजिश से प्रेरित हो सकता है।

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खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि खनन से जुड़े मामलों के लिए खनन अधिनियम और नियम एक संपूर्ण कानूनी ढांचा प्रदान करते हैं। इन्हीं कानूनों के तहत संबंधित अधिकारी अवैध खनन पर कार्रवाई कर सकते हैं, भारी जुर्माना लगा सकते हैं, वाहन जब्त कर सकते हैं और अभियोजन भी चला सकते हैं।

पीठ ने कहा,

“जब कानून में पहले से प्रभावी उपाय मौजूद हैं, तो ऐसे मुद्दों को रिट याचिका के जरिए उठाना उचित नहीं है।”

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फ़ैसला

अदालत ने अंत में यह निष्कर्ष निकाला कि यह याचिका एक ‘अजनबी व्यक्ति’ द्वारा दायर की गई है और इसे या तो व्यक्तिगत हिसाब चुकता करने का प्रयास या प्रायोजित मुकदमा माना जा सकता है।

इन टिप्पणियों के साथ खंडपीठ ने याचिका को खारिज कर दिया।

Case Title: Virendra Patil vs State of Madhya Pradesh & Others

Case No.: Writ Petition No. 47294 of 2025

Decision Date: 5 January 2026

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