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हिमाचल हाईकोर्ट ने SJVNL में FTA नियमितीकरण नीति को दी मंजूरी, सुपरवाइज़र कर्मचारियों की याचिका खारिज

Vivek G.
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युग राज ठाकुर और अन्य बनाम सतलुज जल विद्युत निगम लिमिटेड और अन्य। हिमाचल हाईकोर्ट ने SJVNL में FTA कर्मचारियों के नियमितीकरण को वैध ठहराया, सुपरवाइज़र कर्मचारियों की याचिका खारिज।

हिमाचल हाईकोर्ट ने SJVNL में FTA नियमितीकरण नीति को दी मंजूरी, सुपरवाइज़र कर्मचारियों की याचिका खारिज

हिमाचल हाईकोर्ट ने SJVNL में फिक्स्ड टेन्योर अपॉइंटीज़ (FTA) के नियमितीकरण को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने कहा कि कंपनी को अपनी मानव संसाधन नीति बदलने और जरूरत के अनुसार नियमित नियुक्ति करने का अधिकार है।

यह मामला SJVNL के सुपरवाइज़र श्रेणी के कर्मचारियों द्वारा दायर किया गया था, जिन्हें आशंका थी कि FTA कर्मचारियों को सीधे एग्जीक्यूटिव कैटेगरी में नियमित करने से उनके प्रमोशन के अवसर प्रभावित होंगे।

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मामले की पृष्ठभूमि

याचिकाकर्ता SJVNL में S1 और S2 स्तर के सुपरवाइज़र के रूप में कार्यरत हैं। उनका कहना था कि कंपनी ने पहले फिक्स्ड टेन्योर योजना के तहत नियुक्तियां कीं, जिनमें स्पष्ट शर्त थी कि इन कर्मचारियों को नियमित नियुक्ति का कोई अधिकार नहीं होगा।

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बाद में, कंपनी ने 29 अगस्त 2023 और 21 मई 2024 के सर्कुलर जारी कर FTA कर्मचारियों के नियमितीकरण की नीति बना दी।

याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि यह कदम मूल योजना के खिलाफ है और संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के तहत समान अवसर के अधिकार का उल्लंघन करता है। उनका कहना था कि यदि विज्ञापन में भविष्य में नियमितीकरण की संभावना बताई जाती, तो वे भी आवेदन करते।

कोर्ट की टिप्पणियां

डिवीजन बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि FTA नियुक्तियां बैकडोर एंट्री नहीं थीं। चयन प्रक्रिया नियमित भर्ती जैसी ही थी।

अदालत ने साफ कहा,

“कंपनी को अपनी आवश्यकता के अनुसार नीति में बदलाव करने का अधिकार है। फिक्स्ड टेन्योर योजना को समय की जरूरत के अनुसार बदला जा सकता है।”

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कोर्ट ने यह भी नोट किया कि याचिकाकर्ताओं ने बाद में 2025 की नियमित भर्ती प्रक्रिया में भाग लिया, लेकिन चयनित नहीं हो सके।

पीठ ने कहा कि केवल प्रमोशन की आशंका के आधार पर नीति को रद्द नहीं किया जा सकता। प्रमोशन का अधिकार पूर्ण अधिकार नहीं है, बल्कि पात्रता पूरी करने पर विचार का अधिकार है।

याचिकाकर्ताओं की दलील

याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट के कुछ फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि अस्थायी नियुक्तियों को सीधे नियमित करना उचित नहीं है।

उन्होंने यह भी कहा कि FTA कर्मचारियों को सीधे एग्जीक्यूटिव स्तर पर नियमित करना, उनके करियर ग्रोथ को प्रभावित करेगा।

लेकिन अदालत ने पाया कि SJVNL ने यह आश्वासन दिया है कि प्रमोशन के लिए आवश्यक पद सुरक्षित रखे जाएंगे।

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अदालत का निष्कर्ष

कोर्ट ने माना कि:

• FTA नियुक्तियां विधिसम्मत प्रक्रिया से हुई थीं।

• कंपनी को नीति में संशोधन का अधिकार है।

• याचिकाकर्ताओं की आशंका फिलहाल समय से पहले (premature) है।

• 2025 की नियमित भर्ती में असफल रहने के बाद उनका यह दावा कि वे अधिक योग्य हैं, टिक नहीं पाया।

अंत में अदालत ने कहा कि नीति में भविष्य में नियमितीकरण की संभावना का उल्लेख न होना एक कमी हो सकती है, लेकिन इससे पूरी नीति अवैध नहीं हो जाती।

फैसला

9 जनवरी 2026 को अदालत ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि SJVNL द्वारा FTA कर्मचारियों के नियमितीकरण में कोई कानूनी बाधा नहीं है।

सभी लंबित आवेदन भी निरस्त कर दिए गए।

Case Title: Yug Raj Thakur and Ors. vs Satluj Jal Vidyut Nigam Limited and Ors.

Case No.: CWP No. 11021 of 2024

Decision Date: 09 January 2026

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