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इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एफआईआर में केंद्रीय मंत्री के सम्मानसूचक शब्द के न होने पर यूपी पुलिस से सवाल किया

Shivam
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एफआईआर में केंद्रीय मंत्री के नाम के आगे सम्मानसूचक शब्द न लिखने पर UP सरकार से जवाब मांगा और पुलिस की जिम्मेदारी पर जोर दिया।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एफआईआर में केंद्रीय मंत्री के सम्मानसूचक शब्द के न होने पर यूपी पुलिस से सवाल किया

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब तलब किया है। मामला एक एफआईआर में केंद्रीय मंत्री के नाम के आगे ‘Hon’ble’ या ‘Mr.’ न लिखे जाने से जुड़ा है।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला हर्षित शर्मा और 2 अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और 2 अन्य में उठाया गया, जिसमें एफआईआर को रद्द करने की मांग की गई है। शिकायत के अनुसार, आरोपियों ने नौकरी दिलाने के नाम पर ₹80 लाख लिए, लेकिन न पैसा लौटाया और न ही वादा पूरा किया। साथ ही जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप है।

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हालांकि, संबंधित केंद्रीय मंत्री इस मामले में आरोपी नहीं हैं, लेकिन उनका नाम एफआईआर में दर्ज है।

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न्यायमूर्ति जे.जे. मुनीर और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की पीठ ने इस बात पर आपत्ति जताई कि मंत्री के नाम के साथ सम्मानसूचक शब्द नहीं जोड़े गए।

पीठ ने कहा,

“अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह)… यह स्पष्ट करें कि एफआईआर में ‘Hon’ble’ क्यों नहीं लिखा गया… यदि शिकायतकर्ता ने ऐसा नहीं किया, तब भी पुलिस का कर्तव्य था कि प्रोटोकॉल का पालन करे।”

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इसी दौरान, अदालत ने एक अन्य मामले में पुलिस अधिकारी द्वारा “court below” शब्द प्रयोग करने पर भी नाराज़गी जताई और स्पष्टीकरण मांगा।

अदालत ने उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) को हलफनामा दाखिल कर स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 6 अप्रैल 2026 को होगी।

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