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NDPS केस में HP हाई कोर्ट से राहत, कहा– सिर्फ पैसों का लेन-देन ड्रग कारोबार का सबूत नहीं

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NDPS केस में HP हाई कोर्ट से राहत, कहा– सिर्फ पैसों का लेन-देन ड्रग कारोबार का सबूत नहीं

Himachal Pradesh High Court ने NDPS एक्ट से जुड़े एक मामले में दो आरोपियों को बड़ी राहत देते हुए जमानत मंजूर कर ली। कोर्ट ने साफ कहा कि केवल बैंक ट्रांजैक्शन और कॉल डिटेल रिकॉर्ड के आधार पर किसी को ड्रग तस्करी से जोड़ना पर्याप्त नहीं है।

यह आदेश को वेकेशन बेंच में न्यायमूर्ति राकेश कंठला ने सुनाया। अदालत ने सचिन और सौरभ की जमानत याचिकाओं को स्वीकार करते हुए कहा कि फिलहाल उनके खिलाफ ऐसा कोई ठोस सबूत सामने नहीं है, जिससे उन्हें सीधे तौर पर अपराध से जोड़ा जा सके।

यह मामला चंबा जिले का है, जहां 22 नवंबर 2025 को पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर एक घर पर छापा मारा था। तलाशी के दौरान पुलिस ने 20.65 ग्राम हेरोइन, नकदी, कई मोबाइल फोन और अन्य सामान बरामद किया था।

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जांच के दौरान पुलिस ने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने मुख्य आरोपियों के खातों में पैसे ट्रांसफर किए थे। इसी आधार पर सचिन और सौरभ को भी गिरफ्तार कर लिया गया और उनके खिलाफ NDPS एक्ट की धाराएं लगाई गईं।

आरोपियों की ओर से अदालत को बताया गया कि उनके पास से कोई भी मादक पदार्थ बरामद नहीं हुआ है। उनके खिलाफ केवल यह आरोप है कि उन्होंने पैसे ट्रांसफर किए और फोन पर बातचीत हुई। वकील ने दलील दी कि यह अपने आप में अपराध साबित नहीं करता।

वहीं, राज्य सरकार ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि ड्रग्स से जुड़े अपराध समाज और खासकर युवाओं को नुकसान पहुंचाते हैं, इसलिए ऐसे मामलों में सख्ती जरूरी है।

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न्यायमूर्ति राकेश कंठला की अगुवाई वाली पीठ ने कहा कि सिर्फ बैंक ट्रांजैक्शन होना यह साबित नहीं करता कि आरोपी ड्रग कारोबार में शामिल थे।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि NDPS एक्ट की धारा 27A, जो “ड्रग्स की फंडिंग” से जुड़ी है, उसे हर पैसे के लेन-देन पर लागू नहीं किया जा सकता। अदालत के शब्दों में,

“ड्रग्स की खरीद के लिए पैसा देना, अपने आप में फाइनेंसिंग नहीं मानी जा सकती।”

कोर्ट ने पहले के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि कॉल डिटेल रिकॉर्ड भी अकेले किसी को दोषी ठहराने का आधार नहीं बन सकता।

हाई कोर्ट ने दोनों याचिकाएं मंजूर करते हुए आरोपियों को एक-एक लाख रुपये के निजी मुचलके और समान राशि की जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया।

साथ ही, कोर्ट ने शर्तें लगाईं कि आरोपी गवाहों को प्रभावित नहीं करेंगे, हर सुनवाई में पेश होंगे, बिना अनुमति इलाके से बाहर नहीं जाएंगे और अपने मोबाइल व सोशल मीडिया विवरण पुलिस को देंगे।

अदालत ने साफ किया कि ये टिप्पणियां केवल जमानत के लिए हैं और ट्रायल के दौरान मामले के मेरिट पर इनका कोई असर नहीं पड़ेगा।

Case Title

Sachin vs State of Himachal Pradesh

Sorabh vs State of Himachal Pradesh

Case Number

• Cr.MP(M) No. 3042 of 2025 – Sachin vs State of Himachal Pradesh

• Cr.MP(M) No. 3054 of 2025 – Sorabh vs State of Himachal Pradesh

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