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Ansal Crown केस में सुप्रीम कोर्ट का साफ संदेश: बिल्डर कंपनी जिम्मेदार, डायरेक्टरों पर सीधे कार्रवाई नहीं

Vivek G.
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अंसल क्राउन हाइट्स फ्लैट बायर्स एसोसिएशन बनाम अंसल क्राउन इंफ्राबिल्ड प्राइवेट लिमिटेड, Ansal Crown केस में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बिल्डर कंपनी की देनदारी डायरेक्टरों पर अपने-आप नहीं डाली जा सकती। जानिए खरीदारों के लिए फैसले का मतलब।

Ansal Crown केस में सुप्रीम कोर्ट का साफ संदेश: बिल्डर कंपनी जिम्मेदार, डायरेक्टरों पर सीधे कार्रवाई नहीं

दिल्ली में मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट की अदालत में रियल एस्टेट खरीदारों के एक बड़े विवाद पर अहम फैसला आया। Ansal Crown Heights प्रोजेक्ट से जुड़े फ्लैट खरीदारों ने उम्मीद की थी कि बिल्डर कंपनी के साथ-साथ उसके डायरेक्टरों से भी वसूली हो सकेगी, लेकिन अदालत ने कानून की सीमा साफ कर दी।

मामले की पृष्ठभूमि

फ्लैट खरीदारों की एसोसिएशन ने आरोप लगाया था कि तय समय पर उन्हें घर नहीं मिले। नेशनल कंज्यूमर कमीशन ने 2022 में बिल्डर कंपनी Ansal Crown Infrabuild Pvt. Ltd. को आदेश दिया था कि या तो फ्लैट सौंपे जाएं या पैसा ब्याज समेत लौटाया जाए।

जब कंपनी ने आदेश का पालन नहीं किया, तो खरीदारों ने एग्जीक्यूशन यानी वसूली की प्रक्रिया शुरू की। इसी बीच कंपनी पर IBC के तहत दिवालिया कार्यवाही शुरू हो गई।

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अदालत का अवलोकन

सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने साफ कहा कि, “कानून में कंपनी और उसके डायरेक्टरों की पहचान अलग होती है। जब तक किसी आदेश में डायरेक्टरों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय न हो, तब तक उनसे वसूली नहीं की जा सकती।”

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अदालत ने यह भी दोहराया कि एग्जीक्यूशन कोर्ट डिक्री से आगे नहीं जा सकती। यानी जो फैसला सिर्फ कंपनी के खिलाफ है, उसे डायरेक्टरों पर जबरन लागू नहीं किया जा सकता।

खरीदारों की दलील थी कि पहले सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि IBC का मोराटोरियम डायरेक्टरों को नहीं बचाता।

इस पर बेंच ने स्पष्ट किया कि,“मोराटोरियम हटने से रास्ता खुलता है, लेकिन जिम्मेदारी तभी बनेगी जब पहले से तय हो कि डायरेक्टर व्यक्तिगत रूप से दोषी हैं।”

यहां न तो शिकायत में डायरेक्टरों के खिलाफ आरोप तय हुए थे और न ही कोई फैसला उनके विरुद्ध आया था।

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फैसला

अदालत ने नेशनल कंज्यूमर कमीशन के फैसले को सही ठहराते हुए सभी अपीलें खारिज कर दीं।

हालांकि, जजों ने यह भी कहा कि फ्लैट खरीदार कानून के तहत अन्य रास्ते अपना सकते हैं - जैसे कंपनी कानून, IBC या सिविल कोर्ट में अलग से कार्यवाही - अगर उसके लिए जरूरी कानूनी आधार मौजूद हो।

Case Title: Ansal Crown Heights Flat Buyers Association vs. Ansal Crown Infrabuild Pvt. Ltd.

Case No.: Civil Appeals 8465–8466/2024 & connected matters

Decision Date: January 12, 2026

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