Logo

JDA में सहायक अधिवक्ताओं की सेवाएं समाप्त: राजस्थान हाईकोर्ट ने याचिकाएं खारिज कीं, अनुबंध आधारित नियुक्ति पर जोर

Shivam
Add Court Book as a preferred source on Google

राजस्थान हाईकोर्ट ने JDA द्वारा सहायक अधिवक्ताओं की सेवाएं समाप्त करने को सही ठहराया, कहा—संविदा आधारित नियुक्ति में निरंतरता का अधिकार नहीं। - प्रताप सिंह बनाम जयपुर विकास प्राधिकरण और अन्य

JDA में सहायक अधिवक्ताओं की सेवाएं समाप्त: राजस्थान हाईकोर्ट ने याचिकाएं खारिज कीं, अनुबंध आधारित नियुक्ति पर जोर

जयपुर स्थित राजस्थान उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) द्वारा सहायक अधिवक्ताओं (Assistant Advocates) की सेवाएं समाप्त करने के आदेश को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं का निपटारा किया। अदालत ने स्पष्ट किया कि ये नियुक्तियां संविदा (contractual) आधार पर थीं और याचिकाकर्ताओं को निरंतरता का कोई अधिकार प्राप्त नहीं था।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला कई याचिकाओं से जुड़ा था, जिनमें प्रमुख याचिका प्रताप सिंह बनाम जयपुर विकास प्राधिकरण थी। याचिकाकर्ताओं को JDA द्वारा सहायक अधिवक्ता के रूप में नियुक्त किया गया था, जिनका काम JDA और पैनल काउंसल के बीच समन्वय करना और समय पर जवाब दाखिल करना था।

अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार, इन नियुक्तियों की शुरुआत 2009 के आदेश से हुई थी, जिसमें स्पष्ट किया गया था कि यदि कार्य प्रदर्शन संतोषजनक नहीं पाया गया तो बिना नोटिस हटाया जा सकता है। बाद के आदेशों (2014 और 2022) में भी इसी प्रकार की शर्तें दोहराई गईं।

Read also:- राजस्थान उच्च न्यायालय ने बिना अलग कोटा के ट्रांसजेंडर आरक्षण पर राज्य की नीति पर सवाल उठाए

Court Book subscription: bare acts, legal drafts, court judgments and ad-free legal news, plans from ₹30/month

नवंबर 2025 में JDA ने एक आदेश जारी कर कई सहायक अधिवक्ताओं की सेवाएं समाप्त कर दीं, जिसके खिलाफ ये याचिकाएं दायर की गईं।

याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलील दी कि सेवा समाप्ति का आदेश मनमाना और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध है।

उन्होंने कहा,

“कार्य प्रदर्शन संतोषजनक था, फिर भी बिना किसी ठोस कारण के सेवाएं समाप्त की गईं।”

यह भी तर्क दिया गया कि हटाने का निर्णय किसी प्रशासनिक आवश्यकता के बजाय बाहरी दबाव में लिया गया प्रतीत होता है।

Read also:- कलकत्ता हाईकोर्ट में ECI के बड़े ट्रांसफर आदेश को चुनौती, PIL में उठे संवैधानिक सवाल

याचिकाकर्ताओं ने यह भी कहा कि JDA के अपने रिकॉर्ड में उनके काम को “संतोषजनक” बताया गया था, इसलिए सेवा समाप्ति उचित नहीं है।

JDA की ओर से पेश वकीलों ने अदालत को बताया कि सहायक अधिवक्ताओं की नियुक्ति स्थायी नहीं बल्कि पूरी तरह संविदात्मक और अस्थायी प्रकृति की थी।

उन्होंने कहा,

“इन पदों पर नियुक्त व्यक्तियों को सेवा जारी रखने का कोई अधिकार नहीं है।”

JDA ने यह भी तर्क दिया कि संस्था को यह अधिकार है कि वह अपनी आवश्यकता के अनुसार किसी को नियुक्त करे या हटाए, और इसे अदालत द्वारा बाध्य नहीं किया जा सकता।

Read also:- दिल्ली उच्च न्यायालय ने कोविड राहत केंद्र में तैनात स्कूल अधिकारी के परिजनों को 1 करोड़ रुपये की अनुग्रह राशि देने का आदेश दिया।

न्यायमूर्ति गणेश राम मीणा की पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि सभी याचिकाओं में एक समान प्रश्न शामिल है, इसलिए एक ही आदेश से निर्णय किया जा रहा है।

अदालत ने यह भी माना कि सहायक अधिवक्ताओं की नियुक्ति का उद्देश्य केवल प्रशासनिक सहायता था और यह स्थायी पद नहीं था।

पीठ ने कहा,

“संविदा आधारित नियुक्ति में निरंतरता का दावा नहीं किया जा सकता, जब तक कि नियमों में स्पष्ट प्रावधान न हो।”

Read also:- बॉम्बे हाई कोर्ट ने IVF कराने वाली महिलाओं के लिए ART अधिनियम में निर्धारित आयु सीमा को चुनौती देने के मामले में विशेषज्ञों से राय मांगी है।

अदालत ने यह भी नोट किया कि नियुक्ति से संबंधित आदेशों में स्पष्ट शर्तें थीं, जिनके अनुसार सेवाएं समाप्त की जा सकती थीं।

सभी तथ्यों और दलीलों पर विचार करने के बाद राजस्थान उच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ताओं की मांग को स्वीकार करने से इनकार कर दिया।

अदालत ने JDA द्वारा जारी सेवा समाप्ति आदेश को बरकरार रखते हुए सभी याचिकाओं का निपटारा कर दिया।

Case Details

Case Title: Pratap Singh vs Jaipur Development Authority & Ors.

Case Number: S.B. Civil Writ Petition No. 18266/2025 & connected matters

Judge: Hon’ble Mr. Justice Ganesh Ram Meena

Decision Date: March 25, 2026

Counsels:

• Petitioners: Sr. Adv. Kamlakar Sharma, Sr. Adv. R.N. Mathur & others

• Respondents: Abhishek Sharma, Rishabh Khandelwal & others

Download Order

Take CourtBook Everywhere

Access your account on the go with our mobile app.

Get it on Google PlayDownload on the App Store
Join the Court Book WhatsApp channel for latest judgments, notifications, legal news and exam updates