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जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय ने अतिरिक्त भूमि मुआवजे के रूप में दिए गए 2.61 करोड़ रुपये को 6% ब्याज सहित वापस करने का आदेश दिया।

Shivam
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जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने NHAI भूमि अधिग्रहण मामले में ₹2.61 करोड़ अतिरिक्त मुआवजे की वसूली और 6% ब्याज का आदेश बरकरार रखा। - अली मोहम्मद डार बनाम भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और अन्य।

जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय ने अतिरिक्त भूमि मुआवजे के रूप में दिए गए 2.61 करोड़ रुपये को 6% ब्याज सहित वापस करने का आदेश दिया।

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने भूमि अधिग्रहण मुआवजा मामले में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि कोई भी व्यक्ति “कानूनी अधिकार से अधिक” सार्वजनिक धन अपने पास नहीं रख सकता। अदालत ने अनंतनाग के एक भू-स्वामी की याचिका खारिज कर दी, जिसमें उसने कथित अतिरिक्त भुगतान की वसूली को चुनौती दी थी।

मामले की पृष्ठभूमि

मामला श्रीनगर-जम्मू राष्ट्रीय राजमार्ग के फोर-लेनिंग प्रोजेक्ट से जुड़ा है। याचिकाकर्ता अली मोहम्मद डार की लगभग 6 कनाल 2 मरला जमीन और उस पर बने ढांचे अधिग्रहित किए गए थे। बाद में मुआवजे की राशि को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ।

रिकॉर्ड के अनुसार, रेफरेंस कोर्ट ने 15 जुलाई 2014 को विस्तृत अवॉर्ड पारित करते हुए जमीन, संरचनाओं, पेट्रोल पंप पुनर्स्थापना और व्यवसायिक नुकसान समेत विभिन्न मदों में मुआवजा तय किया था। बाद में NHAI ने आरोप लगाया कि याचिकाकर्ता को एक ही भुगतान श्रेणी के तहत अतिरिक्त राशि जारी हो गई थी।

इसके बाद प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, अनंतनाग ने 4 फरवरी 2026 को ₹2.61 करोड़ की वसूली का आदेश दिया था। पुनर्विचार याचिका भी 27 अप्रैल 2026 को खारिज कर दी गई। इन्हीं आदेशों को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी।

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याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि ₹1,02,54,693 की राशि ढांचों को गिराने की लागत के रूप में दी गई थी और इसे मूल मुआवजे का हिस्सा नहीं माना जा सकता। यह भी तर्क दिया गया कि एक बार अवॉर्ड अंतिम रूप ले चुका था, तो निचली अदालत के पास दोबारा हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं था।

याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि कथित अतिरिक्त भुगतान किसी धोखाधड़ी से नहीं बल्कि सरकारी गणना के आधार पर हुआ था, इसलिए ब्याज लगाना अनुचित है।

न्यायमूर्ति वसीम सादिक नरगल ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 227 के तहत हाईकोर्ट का अधिकार सीमित है और इसका उपयोग केवल गंभीर कानूनी त्रुटि या अधिकार क्षेत्र के दुरुपयोग के मामलों में किया जा सकता है।

अदालत ने कहा,

“कोई भी व्यक्ति उस लाभ को अपने पास नहीं रख सकता जो कानूनन उसका अधिकार नहीं है।”

कोर्ट ने माना कि निचली अदालत ने केवल “अतिरिक्त भुगतान की गणना सुधारने” के लिए अपनी अंतर्निहित शक्तियों का उपयोग किया था, न कि मूल अवॉर्ड में बदलाव किया।

फैसले में यह भी कहा गया कि भूमि अधिग्रहण कानून की धारा 17-B स्वयं अतिरिक्त भुगतान की वसूली की अनुमति देती है और सार्वजनिक धन को गलत तरीके से रोके रखना “अनुचित समृद्धि” (unjust enrichment) माना जाएगा।

हाईकोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड से स्पष्ट है कि ₹2,61,34,972 की राशि दो बार जारी हुई थी और उसे वापस लेना कानूनसम्मत है। अदालत ने 6% वार्षिक ब्याज सहित राशि जमा कराने के आदेश को भी सही ठहराया।

कोर्ट ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता एक महीने के भीतर पूरी राशि जमा करे, अन्यथा इसे भूमि राजस्व बकाया की तरह वसूला जाएगा। अंततः अदालत ने याचिका को “मेरिट से रहित” बताते हुए खारिज कर दिया।

Case Details

Case Title: Ali Mohammad Dar v. National Highways Authority of India & Anr.

Case Number: CM(M) No. 149/2026

Judge: Justice Wasim Sadiq Nargal

Decision Date: 07 May 2026

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