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पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्या मामला: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने गुरमीत राम रहीम समेत आरोपियों को बरी किया

Vivek G.
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बाबा गुरमीत सिंह @ महाराज गुरमीत सिंह @ गुरमीत राम रहीम सिंह बनाम सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन, पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्या मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने गुरमीत राम रहीम समेत आरोपियों को बरी किया, ट्रायल कोर्ट की सजा रद्द।

पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्या मामला: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने गुरमीत राम रहीम समेत आरोपियों को बरी किया

पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या से जुड़े चर्चित मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह समेत अन्य आरोपियों को ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई सजा को रद्द करते हुए बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में असफल रहा।

यह फैसला हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने विस्तृत सुनवाई के बाद सुनाया।

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मामले की पृष्ठभूमि

मामला वर्ष 2002 का है। सिरसा के पत्रकार रामचंद्र छत्रपति, जो ‘पूरा सच’ नामक अखबार निकालते थे, पर 24 अक्टूबर 2002 को गोली चलाने का आरोप लगाया गया था। बाद में उन्होंने अस्पताल में दम तोड़ दिया।

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प्राथमिक शिकायत उनके बेटे अरिदमन ने दर्ज कराई थी, जिसके आधार पर सिरसा सिटी थाने में मामला दर्ज किया गया। जांच के दौरान हत्या, आपराधिक साजिश और हथियार कानून की धाराएँ जोड़ी गईं।

बाद में जांच हरियाणा पुलिस से लेकर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंप दी गई।

ट्रायल कोर्ट का फैसला

सीबीआई कोर्ट, पंचकुला ने 2019 में फैसला सुनाते हुए गुरमीत राम रहीम सिंह सहित चार आरोपियों को दोषी ठहराया था। अदालत ने उन्हें भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) और 120-B (आपराधिक साजिश) के तहत आजीवन कारावास की सजा दी थी।

इस फैसले के खिलाफ सभी आरोपियों ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में अपील दायर की।

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हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान उठे सवाल

अपील की सुनवाई के दौरान आरोपियों की ओर से कई अहम दलीलें रखी गईं।

उनका कहना था कि:

• जांच में गंभीर खामियाँ थीं।

• कुछ महत्वपूर्ण गवाहों के बयान दर्ज नहीं किए गए।

• घटनास्थल और बरामदगी से जुड़े साक्ष्यों में विरोधाभास है।

अदालत के समक्ष यह भी कहा गया कि प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और मेडिकल साक्ष्यों के बीच भी अंतर दिखाई देता है।

अदालत की टिप्पणियां

हाईकोर्ट ने मामले के रिकॉर्ड और गवाहों के बयानों का विस्तृत परीक्षण किया।

अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए साक्ष्य कई जगहों पर स्पष्ट और भरोसेमंद नहीं हैं।

पीठ ने कहा कि आपराधिक मामलों में दोष सिद्ध करने के लिए आरोपों को “संदेह से परे” साबित करना जरूरी होता है, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं हो पाया।

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हाईकोर्ट का निर्णय

सभी पक्षों की दलीलें सुनने और रिकॉर्ड का अध्ययन करने के बाद अदालत ने ट्रायल कोर्ट का फैसला रद्द कर दिया।

पीठ ने अपीलों को स्वीकार करते हुए गुरमीत राम रहीम सिंह और अन्य आरोपियों को इस मामले में बरी कर दिया।

Case Title: Baba Gurmeet Singh @ Maharaj Gurmeet Singh @ Gurmeet Ram Rahim Singh vs Central Bureau of Investigation

Case No.: CRA-D-240-D-2019 and connected cases

Decision Date: 07 March 2026

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