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कर्नाटक हाईकोर्ट ने दोबारा दर्ज FIR रद्द की, कहा-पहले NCR के बाद समान शिकायत पर जांच ‘कानून का दुरुपयोग’

Vivek G.
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रमना रेड्डी जी वी बनाम कर्नाटक राज्य और अन्य। कर्नाटक हाईकोर्ट ने समान शिकायत पर दर्ज दूसरी FIR रद्द की, कहा-पहले NCR के बाद जांच शुरू करना कानून का दुरुपयोग।

कर्नाटक हाईकोर्ट ने दोबारा दर्ज FIR रद्द की, कहा-पहले NCR के बाद समान शिकायत पर जांच ‘कानून का दुरुपयोग’

बेंगलुरु में आज सुनवाई के दौरान अदालत कक्ष में सन्नाटा था। मामला एक ही घटना पर दो अलग-अलग शिकायतों का था। अदालत ने साफ कहा-जब पहले से एनसीआर (गैर-संज्ञेय रिपोर्ट) दर्ज है, तो लगभग उसी शिकायत पर बाद में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू करना सही प्रक्रिया नहीं है।

न्यायमूर्ति एम. जी. उमा की एकल पीठ ने आपराधिक याचिका स्वीकार करते हुए आरोपी के खिलाफ चल रही कार्यवाही रद्द कर दी। आदेश 19 फरवरी 2026 को सुनाया गया।

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मामले की पृष्ठभूमि

याचिकाकर्ता रमणा रेड्डी जी. वी., जो जूनियर वायरलेस अधिकारी बताए गए, पर आरोप था कि उन्होंने सहकर्मी के कक्ष में जाकर हंगामा किया, कुर्सी उठाकर धमकाया और मोबाइल फोन नुकसान पहुंचाया।

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3 फरवरी 2021 को पहली शिकायत के आधार पर पुलिस ने एनसीआर दर्ज किया। एनसीआर का मतलब है-ऐसा अपराध जिसमें पुलिस सीधे जांच शुरू नहीं कर सकती, जब तक मजिस्ट्रेट की अनुमति न हो।

बाद में 15 सितंबर 2021 को लगभग वही आरोप दोबारा शिकायत के रूप में दिए गए। इस बार पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली और भारतीय दंड संहिता की धाराओं 341 (गलत तरीके से रोकना), 427 (नुकसान पहुंचाना), 504 (जानबूझकर अपमान) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत मामला आगे बढ़ाया।

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अदालत में क्या दलीलें रखी गईं

याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि पहली शिकायत पर एनसीआर दर्ज हो चुका था। उसी घटना पर दूसरी, लगभग शब्दशः समान शिकायत पर एफआईआर दर्ज करना गलत है।

राज्य की ओर से दलील दी गई कि शिकायतकर्ता ने राष्ट्रीय महिला आयोग से भी संपर्क किया था, जिसके बाद एफआईआर दर्ज हुई। हालांकि, रिकॉर्ड में ऐसा कोई स्पष्ट निर्देश या कार्यवाही सामने नहीं आई जिससे यह साबित हो कि आयोग ने पुलिस को एफआईआर दर्ज करने को कहा था।

अदालत ने यह भी देखा कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 154(3) के तहत अगर थाना एफआईआर दर्ज न करे, तो शिकायतकर्ता पुलिस अधीक्षक को लिखित रूप से जानकारी दे सकता है। लेकिन इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।

अदालत की टिप्पणी

पीठ ने कहा कि जब पहली बार एनसीआर दर्ज हुआ, तो पुलिस को धारा 155 के अनुसार प्रक्रिया अपनानी चाहिए थी।

अदालत ने अपने आदेश में कहा, “जब एक ही घटना पर पहले से एनसीआर दर्ज है, तो उसी प्रकार की दूसरी शिकायत पर सीधे एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू करना उचित नहीं है। यह कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है।”

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न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई कारण नहीं दिखाया गया कि पहले एनसीआर के बावजूद दूसरी शिकायत पर एफआईआर क्यों दर्ज की गई।

अंतिम निर्णय

सभी तथ्यों और दलीलों पर विचार करने के बाद अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता ने आपराधिक कार्यवाही रद्द कराने के लिए पर्याप्त आधार दिखाए हैं।

अदालत ने आदेश दिया कि चन्नामनाकेरे अचुकट्टू पुलिस स्टेशन के अपराध संख्या 181/2021 में दर्ज एफआईआर और उससे जुड़ी सीसी संख्या 10494/2022 की कार्यवाही रद्द की जाती है।

इसके साथ ही आपराधिक याचिका स्वीकार कर ली गई।

Case Title: Ramana Reddy G V v. State of Karnataka & Anr.

Case No.: Criminal Petition No. 6805 of 2022

Decision Date: 19 February 2026

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