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कर्नाटक हाईकोर्ट: स्वतंत्रता दिवस पर उल्टा फहराया गया तिरंगा, अदालत ने कहा- 'जानबूझकर अपमान नहीं', केस रद्द

Vivek G.
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भीमसिंह बनाम कर्नाटक राज्य एवं अन्य। कर्नाटक हाईकोर्ट ने स्वतंत्रता दिवस पर उल्टा तिरंगा फहराने के मामले में कहा-बिना नीयत के अपमान नहीं, केस रद्द।

कर्नाटक हाईकोर्ट: स्वतंत्रता दिवस पर उल्टा फहराया गया तिरंगा, अदालत ने कहा- 'जानबूझकर अपमान नहीं', केस रद्द

कलाबुरगी बेंच में सुनवाई के दौरान अदालत ने एक ऐसे मामले पर अहम टिप्पणी की, जिसमें स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान राष्ट्रीय ध्वज उल्टा फहराए जाने का आरोप था। अदालत ने साफ कहा कि अगर कृत्य में अपमान की नीयत न हो, तो केवल लापरवाही को राष्ट्रीय सम्मान कानून के तहत अपराध नहीं माना जा सकता।

मामले की पृष्ठभूमि

मामला 15 अगस्त 2021 का है। कलाबुरगी जिले के चित्तापुर तालुक के अलोली ग्राम पंचायत में स्वतंत्रता दिवस समारोह आयोजित किया गया था। याचिकाकर्ता, जो ग्राम पंचायत में सेकेंड डिवीजन असिस्टेंट (SDA) थे, को ध्वजारोहण की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

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शिकायत के अनुसार, ध्वज सुबह 8 बजे फहराया गया, लेकिन वह गलती से उल्टा (केसरिया पट्टी नीचे) लगा दिया गया। यह बात अगले दिन पंचायत विकास अधिकारी (PDO) को पता चली, जिसके बाद 16 अगस्त 2021 को चित्तापुर थाने में शिकायत दर्ज कराई गई।

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पुलिस ने धारा 2, Prevention of Insults to National Honour Act, 1971 के तहत मामला दर्ज किया और चार्जशीट दाखिल की। ट्रायल कोर्ट में मामला लंबित था, जिसे रद्द करने की मांग लेकर याचिकाकर्ता उच्च न्यायालय पहुंचे।

याचिकाकर्ता की दलील

याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि ध्वज उल्टा फहराना पूरी तरह से अनजाने में हुई गलती थी।

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अदालत में दलील दी गई, “यह घटना किसी दुर्भावना या अपमान की नीयत से नहीं हुई। याचिकाकर्ता एक सरकारी कर्मचारी हैं और राष्ट्रीय ध्वज के प्रति पूरा सम्मान रखते हैं।”

वकील ने यह भी कहा कि कानून की धारा 2 तभी लागू होती है जब किसी ने जानबूझकर राष्ट्रीय ध्वज का अपमान किया हो।

सरकारी वकील ने दलील दी कि जांच के दौरान यह पाया गया कि ध्वज गलत तरीके से फहराया गया, जो राष्ट्रीय सम्मान के विपरीत है।

उन्होंने कहा कि एक जिम्मेदार सरकारी कर्मचारी से ऐसी चूक अपेक्षित नहीं है और इस कारण मुकदमा चलना चाहिए।

अदालत की टिप्पणी

न्यायमूर्ति राजेश राय के. ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद रिकॉर्ड का अवलोकन किया।

अदालत ने पाया कि चार्जशीट में मौजूद गवाहों के बयान यह दर्शाते हैं कि घटना लापरवाही से हुई थी, न कि किसी अपमानजनक मंशा से।

अदालत ने अपने आदेश में कहा, “रिकॉर्ड से यह स्पष्ट है कि ध्वज उल्टा फहराया जाना एक भूल थी। इसमें राष्ट्रीय ध्वज का जानबूझकर अपमान करने की कोई मंशा नहीं थी।”

न्यायालय ने यह भी उल्लेख किया कि समान परिस्थितियों में अन्य उच्च न्यायालयों ने भी अनजाने में हुई त्रुटियों को आपराधिक दायरे से बाहर माना है।

अदालत ने कहा, “जब तक अपमान की स्पष्ट नीयत या जानबूझकर किया गया कृत्य साबित न हो, तब तक 1971 के अधिनियम की धारा 2 लागू नहीं होती।”

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फैसला

अदालत ने माना कि ऐसे हालात में मुकदमे की कार्यवाही जारी रखना “न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग” होगा।

इसी आधार पर, अदालत ने चित्तापुर की ट्रायल कोर्ट में लंबित आपराधिक मामला (C.C. No.1307/2022), जो क्राइम नंबर 81/2021 से संबंधित था, को रद्द कर दिया।

याचिका स्वीकार कर ली गई और याचिकाकर्ता के खिलाफ कार्यवाही समाप्त कर दी गई।

Case Title: Bhimsingh vs State of Karnataka & Anr.

Case No.: Criminal Petition No. 200201 of 2026

Decision Date: 12 February 2026

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