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केरल हाईकोर्ट सख्त: मध्यस्थता केंद्रों की खामियों पर सरकार से मांगी रिपोर्ट, ₹11 करोड़ फंड पर भी स्पष्टता

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केरल हाईकोर्ट ने मध्यस्थता केंद्रों की खराब स्थिति और ₹11 करोड़ मुआवजा फंड के उपयोग पर सरकार से रिपोर्ट मांगी, अगली सुनवाई 25 मई 2026 तय।

केरल हाईकोर्ट सख्त: मध्यस्थता केंद्रों की खामियों पर सरकार से मांगी रिपोर्ट, ₹11 करोड़ फंड पर भी स्पष्टता

केरल हाईकोर्ट ने राज्यभर के मध्यस्थता केंद्रों (Mediation Centres) में बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर स्वतः संज्ञान लेते हुए सुनवाई की। अदालत ने वित्तीय आवंटन, अधूरी परियोजनाओं और पीड़ित मुआवजा राशि के उपयोग पर सरकार से जवाब तलब किया।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला हाईकोर्ट द्वारा स्वतः शुरू किया गया था, जब राज्य के विभिन्न मध्यस्थता केंद्रों में बुनियादी ढांचे की कमी सामने आई। अदालत ने पाया कि कई केंद्रों में पर्याप्त स्टाफ, संसाधन और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं।

इसी दौरान, पीड़ित मुआवजा (Victim Compensation) के लिए जारी ₹11.08 करोड़ की राशि के उपयोग को लेकर भी भ्रम की स्थिति सामने आई।

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सुनवाई के दौरान अदालत ने वित्त विभाग द्वारा जारी आदेश पर ध्यान दिया, जिसमें बड़ी राशि स्वीकृत की गई थी।

अदालत ने कहा कि फंड जारी होने के बावजूद उसका पूर्ण उपयोग नहीं हो पा रहा है।

“ऐसा प्रतीत होता है कि फंड समय पर जारी हुआ, लेकिन उसका पूरा उपयोग इस वित्तीय वर्ष में संभव नहीं हो पाएगा,” पीठ ने संकेत दिया।

कोर्ट ने यह भी नोट किया कि KeLSA (केरल राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण) और सरकार के बीच संचार में भ्रम रहा है, जिससे फंड उपयोग में देरी हुई।

हाईकोर्ट प्रशासन की ओर से बताया गया कि कई परियोजनाएं अभी लंबित हैं और उनके लिए विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा रही है।

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अदालत ने निर्देश दिया कि:

• लंबित परियोजनाओं का पूरा विवरण वित्त विभाग को भेजा जाए

• लॉ सेक्रेटरी प्रस्ताव को आगे बढ़ाएं

• सभी आवश्यक बुनियादी जरूरतों पर जल्द निर्णय लिया जाए

अदालत ने स्पष्ट किया कि जो राशि वर्तमान वित्त वर्ष में खर्च नहीं हो पाई है, उसे सुरक्षित खाते (Special Treasury Savings Bank Account) में ट्रांसफर किया जाए ताकि अगले वित्त वर्ष में उसका उपयोग किया जा सके।

साथ ही, अदालत ने कहा:

“अप्रयुक्त राशि को अगले वर्ष के लिए संरक्षित रखा जाना चाहिए, ताकि उसका उद्देश्य पूरा हो सके।”

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अंत में, हाईकोर्ट ने निम्न निर्देश दिए:

• वित्त विभाग अगली सुनवाई तक हलफनामा (affidavit) दाखिल करे

• KeLSA मुआवजा राशि का शीघ्र वितरण सुनिश्चित करे

• मध्यस्थता केंद्रों की अधूरी परियोजनाओं पर रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए

• मध्यस्थों की फीस बढ़ाने के प्रस्ताव पर विचार किया जाए

• मासिक उपयोग रिपोर्ट संबंधित विभागों को भेजी जाए

मामले की अगली सुनवाई 25 मई 2026 को तय की गई।

Case Details

Case Title: Suo Motu Writ Petition (Civil) vs State of Kerala & Others

Case Number: WP(C) No. 42844 of 2025 (with connected case WP(C) No. 48551 of 2025)

Judge: Chief Justice Soumen Sen & Justice Syam Kumar V.M.

Decision Date: March 30, 2026

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