Logo

‘द केरल स्टोरी 2: गोज़ बियॉन्ड’ के टाइटल बदलने की मांग वाली PIL पर केरल हाईकोर्ट ने सुनवाई से किया इनकार

Shivam
Add Court Book as a preferred source on Google

चंद्रमोहन के.सी. और अन्य बनाम भारत संघ और अन्य - केरल उच्च न्यायालय ने फिल्म 'द केरल स्टोरी 2: गोज बियॉन्ड' के शीर्षक से "केरल" शब्द हटाने की मांग वाली जनहित याचिका को यह देखते हुए खारिज कर दिया कि इसी तरह के मुद्दे एक अन्य पीठ के समक्ष लंबित हैं।

‘द केरल स्टोरी 2: गोज़ बियॉन्ड’ के टाइटल बदलने की मांग वाली PIL पर केरल हाईकोर्ट ने सुनवाई से किया इनकार

केरल हाईकोर्ट ने गुरुवार को उस जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया जिसमें हाल ही में रिलीज हुई फिल्म “The Kerala Story 2: Goes Beyond” के शीर्षक से “Kerala” या “Keralam” शब्द हटाने का निर्देश देने की मांग की गई थी।

मुख्य न्यायाधीश सौमेन सेन और न्यायमूर्ति श्याम कुमार वी.एम. की खंडपीठ ने कहा कि इसी मुद्दे से जुड़े मामले पहले से ही एक अन्य समन्वय (कोऑर्डिनेट) खंडपीठ के सामने लंबित हैं, इसलिए इस चरण पर दखल देना उचित नहीं होगा।

मामले की पृष्ठभूमि

याचिकाकर्ताओं ने केंद्र सरकार और केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) को निर्देश देने की मांग की थी कि फिल्म को “Kerala” शब्द वाले शीर्षक के साथ प्रदर्शित, प्रसारित या प्रचारित न किया जाए।

Read also:- बॉम्बे हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: केवल WhatsApp चैट के आधार पर नहीं दिया जा सकता तलाक, फैमिली कोर्ट का आदेश रद्द

Court Book subscription: bare acts, legal drafts, court judgments and ad-free legal news, plans from ₹30/month

याचिका में यह भी कहा गया था कि फिल्म के साथ एक स्पष्ट अस्वीकरण (डिस्क्लेमर) दिखाया जाए जिसमें बताया जाए कि यह फिल्म काल्पनिक है और इसका केरल राज्य, उसके लोगों या किसी धार्मिक समुदाय से सीधा संबंध नहीं है।

इसके अलावा, याचिकाकर्ताओं ने सरकार से यह भी मांग की कि फिल्मों के शीर्षक और प्रचार सामग्री को लेकर स्पष्ट दिशानिर्देश बनाए जाएं ताकि किसी राज्य, क्षेत्र या समुदाय की छवि को नुकसान न पहुंचे।

इससे पहले फिल्म की रिलीज को लेकर भी अदालत में विवाद हुआ था। एकल न्यायाधीश ने फिल्म के टीज़र में दिखाए गए कुछ दृश्यों को देखते हुए इसकी रिलीज पर अंतरिम रोक लगा दी थी, यह कहते हुए कि इससे सांप्रदायिक सद्भाव प्रभावित हो सकता है। बाद में निर्माता की अपील पर खंडपीठ ने यह रोक हटा दी और कहा कि CBFC ने पूरी फिल्म देखने के बाद प्रमाणन दिया है।

Read also:- कलकत्ता हाईकोर्ट ने प्रोफेसर के खिलाफ धोखाधड़ी केस रद्द किया, कहा-सबूत केवल शक पैदा करते हैं, मजबूत आरोप नहीं

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि इस मुद्दे से जुड़े एक रिट याचिका और एक अपील पहले से ही दूसरी खंडपीठ के सामने लंबित हैं।

पीठ ने मौखिक रूप से कहा,

“एक रिट याचिका और एक अपील पहले से लंबित है। ऐसे में इस चरण पर इस जनहित याचिका में हस्तक्षेप करना उचित नहीं होगा।”

अदालत ने यह भी कहा कि यदि इस समय कोई आदेश दिया गया तो इससे उस आदेश पर असर पड़ सकता है जिसमें पहले ही फिल्म की रिलीज की अनुमति दी जा चुकी है।

मुख्य न्यायाधीश सेन ने याचिका में दूसरे बेंच के बारे में की गई टिप्पणियों पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा,

“आप किसी फैसले की आलोचना कर सकते हैं, लेकिन किसी समन्वय पीठ पर आरोप नहीं लगा सकते। न्यायिक संस्था का सम्मान करना आवश्यक है।”

Read also:- तमिलनाडु विवाह सहायता योजना पर मद्रास हाईकोर्ट का अहम फैसला, सिंगल जज का आदेश रद्द; आय प्रमाणपत्र बना विवाद का केंद्र

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकील ने विवादित टिप्पणियों के लिए बिना शर्त माफी मांगी और याचिका में संशोधन की अनुमति मांगी।

इसके बाद अदालत ने PIL को वापस लेने की अनुमति दे दी और नई याचिका दायर करने की स्वतंत्रता दी, साथ ही कहा कि इस मुद्दे को उस पीठ के सामने उठाया जा सकता है जो पहले से जुड़े मामलों की सुनवाई कर रही है।

मामला: चंद्रमोहन के.सी. एवं अन्य बनाम भारत संघ एवं अन्य

केस नंबर: WP(PIL) 49/2026

Take CourtBook Everywhere

Access your account on the go with our mobile app.

Get it on Google PlayDownload on the App Store
Join the Court Book WhatsApp channel for latest judgments, notifications, legal news and exam updates