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केरल हाईकोर्ट ने टेंडर प्रक्रिया पर रोक से किया इनकार, सहकारी बैंक की याचिका पर सीमित आदेश

Vivek G.
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कल्लेटुमकारा सर्विस को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड बनाम भारत संघ एवं अन्य। केरल हाईकोर्ट ने कलेट्टुमकारा सहकारी बैंक की याचिका पर टेंडर प्रक्रिया पर रोक से इनकार किया, बोली विवरण पेश करने का निर्देश दिया।

केरल हाईकोर्ट ने टेंडर प्रक्रिया पर रोक से किया इनकार, सहकारी बैंक की याचिका पर सीमित आदेश

केरल हाईकोर्ट ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश पारित करते हुए टेंडर प्रक्रिया पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। मामला कलेट्टुमकारा सर्विस को-ऑपरेटिव बैंक की ओर से दायर याचिका से जुड़ा है, जिसमें एक प्रस्ताव आमंत्रण (RFP) के खिलाफ कार्रवाई रोकने की मांग की गई थी।

न्यायमूर्ति गोपीनाथ पी. की एकल पीठ ने साफ कहा कि फिलहाल टेंडर की आगे की कार्यवाही पर रोक लगाने का कोई आधार नहीं बनता।

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मामले की पृष्ठभूमि

यह याचिका कलेट्टुमकारा सर्विस को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, त्रिशूर की ओर से दायर की गई थी। बैंक ने केंद्र और राज्य सरकार सहित सहकारिता विभाग के अधिकारियों को पक्षकार बनाया था।

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याचिका में 3 नवंबर 2025 को जारी एक प्रस्ताव आमंत्रण (RFP) को चुनौती दी गई थी। बैंक की ओर से दलील दी गई कि इस प्रस्ताव के आधार पर आगे की कार्रवाई से उसके अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। इसलिए अदालत से आग्रह किया गया कि अंतिम निर्णय तक पूरी प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए।

सुनवाई के दौरान बैंक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने विस्तार से अपना पक्ष रखा। वहीं केंद्र सरकार और राज्य सरकार की ओर से भी जवाब प्रस्तुत किया गया।

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अदालत की टिप्पणी

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति ने संबंधित फाइलों का अवलोकन किया, जिन्हें राज्य सरकार के विशेष सरकारी अधिवक्ता ने सीलबंद लिफाफे में प्रस्तुत किया था।

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि प्रथम दृष्टया (prima facie) ऐसा कोई कारण नजर नहीं आता जिससे टेंडर प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए।

पीठ ने कहा, “मैं प्रथम दृष्टया आरोपित आदेशों के अंतर्गत आगे की कार्यवाही पर रोक लगाने के पक्ष में नहीं हूं।”

इस टिप्पणी से साफ हो गया कि अदालत फिलहाल प्रशासनिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप के मूड में नहीं है।

अदालत का अंतरिम निर्णय

अदालत ने स्पष्ट किया कि प्रतिवादी - यानी राज्य के संबंधित विभाग - टेंडर प्रक्रिया को आगे बढ़ा सकते हैं और सफल बोलीदाता को काम भी सौंप सकते हैं।

हालांकि, अदालत ने एक महत्वपूर्ण शर्त जोड़ी। न्यायालय ने निर्देश दिया कि अंतिम समझौते (agreement) पर हस्ताक्षर करने से पहले बोली का पूरा विवरण अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया जाए।

इसका मतलब यह है कि प्रक्रिया पूरी तरह स्वतंत्र नहीं होगी, बल्कि उस पर न्यायालय की निगरानी बनी रहेगी।

सीलबंद लिफाफे में प्रस्तुत दस्तावेजों को अदालत ने वापस सरकार के अधिवक्ता को लौटा दिया।

इस प्रकार, फिलहाल टेंडर प्रक्रिया जारी रहेगी, लेकिन अंतिम अनुबंध से पहले अदालत को पूरी जानकारी दी जाएगी।

Case Title: Kallettumkara Service Co-operative Bank Ltd. v. Union of India & Ors.

Case No.: WP(C) No. 1603 of 2026

Decision Date: 18 February 2026

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