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सड़क हादसे में मृत शिक्षक के परिवार को बड़ी राहत, कलकत्ता हाईकोर्ट ने बढ़ाया मुआवजा; बीमा कंपनी को अतिरिक्त ₹13.80 लाख देने का आदेश

Zaved Khan
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कलकत्ता हाईकोर्ट ने मोटर दुर्घटना दावे में ट्रिब्यूनल का आदेश रद्द करते हुए मृतक की उम्र 50 वर्ष मानने का निर्देश दिया और अतिरिक्त ₹13.80 लाख मुआवजा ब्याज सहित देने का आदेश दिया।- तारा शर्मा एवं अन्य बनाम नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड एवं अन्य

सड़क हादसे में मृत शिक्षक के परिवार को बड़ी राहत, कलकत्ता हाईकोर्ट ने बढ़ाया मुआवजा; बीमा कंपनी को अतिरिक्त ₹13.80 लाख देने का आदेश

कलकत्ता हाईकोर्ट ने एक सड़क दुर्घटना में जान गंवाने वाले व्यक्ति के परिवार को राहत देते हुए मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT) के मुआवजा निर्धारण को गलत ठहराया है। अदालत ने कहा कि मृतक की उम्र तय करने में ट्रिब्यूनल ने केवल अनुमान का सहारा लिया, जबकि उपलब्ध वैज्ञानिक साक्ष्य कुछ और बताते हैं।

न्यायमूर्ति अनिरुद्ध रॉय ने अपील स्वीकार करते हुए बीमा कंपनी को अतिरिक्त ₹13.80 लाख तथा उस पर ब्याज का भुगतान करने का निर्देश दिया।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला 18 अक्टूबर 2013 को हुई एक सड़क दुर्घटना से जुड़ा है, जिसमें दुर्गा प्रसाद शर्मा उर्फ भट्टाराई की मृत्यु हो गई थी। मृतक के परिवार ने मोटर वाहन अधिनियम के तहत मुआवजे की मांग करते हुए दावा याचिका दायर की थी।

दावा अधिकरण ने दिसंबर 2019 में परिवार के पक्ष में ₹6,00,540 का मुआवजा निर्धारित किया था। हालांकि, ट्रिब्यूनल ने मृतक की उम्र 60 वर्ष मानकर गणना की और भविष्य की आय (फ्यूचर प्रॉस्पेक्ट्स) का लाभ देने से इनकार कर दिया। साथ ही ब्याज भी नहीं दिया गया।

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इसके खिलाफ मृतक की पत्नी और अन्य कानूनी उत्तराधिकारियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

सुनवाई के दौरान मुख्य विवाद मृतक की उम्र को लेकर था। बीमा कंपनी का कहना था कि मृतक पेंशन प्राप्त कर रहे थे, इसलिए उनकी उम्र कम से कम 60 वर्ष रही होगी।

लेकिन हाईकोर्ट ने पाया कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई ठोस प्रमाण नहीं था जिससे यह साबित हो सके कि मृतक 60 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त हुए थे। अदालत ने कहा कि केवल पेंशन मिलने के आधार पर उम्र तय नहीं की जा सकती।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए अदालत ने कहा,

“पोस्टमार्टम रिपोर्ट निर्णायक और विश्वसनीय साक्ष्य है।”

न्यायालय ने आगे कहा कि जब तक विशेषज्ञ राय का खंडन करने वाला कोई ठोस प्रमाण मौजूद न हो, तब तक वैज्ञानिक मूल्यांकन को ही स्वीकार किया जाना चाहिए।

अदालत ने यह भी माना कि ट्रिब्यूनल द्वारा परिवार पेंशन मिलने के आधार पर भविष्य की आय का लाभ न देना सुप्रीम कोर्ट के स्थापित सिद्धांतों के विपरीत था।

“भविष्य की आय के संबंध में ट्रिब्यूनल का निष्कर्ष टिकाऊ नहीं है और उसे निरस्त किया जाता है,” अदालत ने कहा।

हाईकोर्ट ने माना कि दुर्घटना के समय मृतक की उम्र 50 वर्ष थी। इसके आधार पर मुआवजा गणना में प्रयुक्त गुणक (मल्टीप्लायर) को 5 से बढ़ाकर 13 कर दिया गया।

अदालत ने बीमा कंपनी को सुप्रीम कोर्ट के प्रणय सेठी फैसले के अनुसार भविष्य की आय, संपत्ति की हानि, अंतिम संस्कार खर्च और कंसोर्टियम मदों को शामिल कर मुआवजा पुनर्गणना करने का निर्देश दिया।

रिकॉर्ड पर प्रस्तुत गणना के अनुसार, पहले दिए गए मुआवजे को समायोजित करने के बाद बीमा कंपनी पर अतिरिक्त ₹.कि पूरी राशि छह सप्ताह के भीतर दावेदारों को अदा की जाए।

इन्हीं निर्देशों के साथ हाईकोर्ट ने अपील स्वीकार कर ली।

Case Details:

Case Title: Tara Sharma & Ors. vs National Insurance Company Limited & Anr.

Case Number: FMA 41 of 2024

Judge: Justice Aniruddha Roy

Decision Date: May 21, 2026

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