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सुप्रीम कोर्ट ने लालू यादव को नहीं दी राहत, ‘लैंड-फॉर-जॉब्स’ मामला रद्द करने से इनकार, ट्रायल में उठाने की छूट

Vivek G.
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सुप्रीम कोर्ट ने लालू यादव के खिलाफ लैंड-फॉर-जॉब्स केस रद्द करने से इनकार किया, लेकिन ट्रायल के दौरान धारा 17A पर आपत्ति उठाने की अनुमति दी। - लालू प्रसाद यादव बनाम केंद्रीय जांच ब्यूरो

सुप्रीम कोर्ट ने लालू यादव को नहीं दी राहत, ‘लैंड-फॉर-जॉब्स’ मामला रद्द करने से इनकार, ट्रायल में उठाने की छूट

सुप्रीम कोर्ट में सोमवार (13 अप्रैल) को हुई सुनवाई में आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव को राहत नहीं मिली। कोर्ट ने उनके खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने से इनकार कर दिया, लेकिन उन्हें ट्रायल के दौरान कानूनी आपत्तियां उठाने की अनुमति दे दी।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला उस समय का है जब लालू यादव 2004 से 2009 के बीच रेल मंत्री थे। आरोप है कि रेलवे में ग्रुप-डी नौकरियों के बदले जमीन के टुकड़े लिए गए। इस मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) कर रही है।

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यादव ने कोर्ट से कहा था कि जांच शुरू करने से पहले भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17A के तहत मंजूरी जरूरी थी, जो नहीं ली गई।

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जस्टिस एमएम सुन्द्रेश और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने इस कानूनी मुद्दे पर तुरंत फैसला देने से परहेज किया। सुनवाई के दौरान जस्टिस सुन्द्रेश ने कहा,

“अगर आपका मामला यह है कि उन्होंने अपने पद के कारण फैसलों को प्रभावित किया, तो उस प्रभाव की जांच करनी होगी।”

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सरकार की ओर से पेश हुए वकील ने दलील दी कि धारा 17A केवल निर्णय लेने वाले अधिकारियों पर लागू होती है और यादव उस श्रेणी में नहीं आते।

वहीं, वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि आरोप खुद यह दिखाते हैं कि यह सब उनके आधिकारिक पद से जुड़ा था, इसलिए जांच से पहले मंजूरी जरूरी थी।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह अभी इस बात पर कोई राय नहीं दे रहा है कि धारा 17A लागू होती है या नहीं।

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“याचिकाकर्ता को ट्रायल के दौरान यह मुद्दा उठाने की स्वतंत्रता है,” पीठ ने कहा।

कोर्ट ने यह भी कहा कि हाई कोर्ट के पहले के आदेश इस मुद्दे को उठाने में बाधा नहीं बनेंगे।

साथ ही, लालू यादव को ट्रायल कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश होने से छूट दे दी गई।

Case Details:

Case Title: Lalu Prasad Yadav v. Central Bureau of Investigation

Case Number: SLP (Crl) No. 6125/2026

Judge: Justices MM Sundresh and N Kotiswar Singh

Decision Date: April 13, 2026

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