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लिव-इन रिश्ते में रह रहे बालिग जोड़े को दिल्ली हाईकोर्ट से सुरक्षा, पिता को दखल से रोका

Shivam
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कार्तिक और अन्य बनाम दिल्ली राज्य और अन्य - दिल्ली उच्च न्यायालय ने महिला के पिता से मिल रही धमकियों का सामना कर रहे लिव-इन कपल को पुलिस सुरक्षा प्रदान की और अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और स्वतंत्रता के अधिकार को बरकरार रखा।

लिव-इन रिश्ते में रह रहे बालिग जोड़े को दिल्ली हाईकोर्ट से सुरक्षा, पिता को दखल से रोका

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक अहम आदेश में लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे एक बालिग जोड़े को पुलिस सुरक्षा देने का निर्देश दिया। अदालत ने साफ कहा कि दो बालिग व्यक्तियों को अपनी पसंद से साथ रहने का पूरा अधिकार है और कोई भी - चाहे माता-पिता ही क्यों न हों - उनके जीवन और स्वतंत्रता में हस्तक्षेप नहीं कर सकता।

यह मामला दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सौरभ बनर्जी की एकल पीठ के समक्ष आया। आदेश 24 फरवरी 2026 को पारित किया गया।

मामले की पृष्ठभूमि

याचिका एक युवक और युवती की ओर से दायर की गई थी। दोनों वर्ष 2024 से एक-दूसरे को जानते हैं और अब साथ रह रहे हैं। उन्होंने 17 फरवरी 2026 को आपसी सहमति से एक लिव-इन रिलेशनशिप एग्रीमेंट भी किया।

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याचिका में कहा गया कि युवती के पिता इस संबंध से खुश नहीं हैं और लगातार धमकियां दे रहे हैं। जोड़े को आशंका थी कि उन्हें शारीरिक नुकसान पहुंचाया जा सकता है।

याचिकाकर्ताओं के वकील ने अदालत में कहा,

“दोनों बालिग हैं और अपनी इच्छा से साथ रह रहे हैं। इनके मौलिक अधिकार खतरे में हैं, इसलिए इन्हें सुरक्षा दी जानी चाहिए।”

राज्य की ओर से पेश वकील ने नोटिस स्वीकार किया।

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अदालत ने रिकॉर्ड पर मौजूद दस्तावेजों को देखते हुए पाया कि दोनों याचिकाकर्ता 2006 और 2007 में जन्मे हैं और कानूनन बालिग हैं।

न्यायालय ने कहा कि बालिग होने के नाते उन्हें अपनी पसंद का साथी चुनने और साथ रहने का पूरा अधिकार है।

पीठ ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि शादी न होने के बावजूद दो बालिग व्यक्ति साथ रह सकते हैं। अदालत ने कहा,

“लिव-इन रिलेशनशिप को अब कानून की नजर में मान्यता प्राप्त है और इसे कई कानूनों में स्वीकार किया गया है।”

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अदालत ने यह भी कहा कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19 नागरिकों को स्वतंत्रता का अधिकार देता है और अनुच्छेद 21 जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की गारंटी करता है।

पीठ ने टिप्पणी की,

“सामाजिक नैतिकता या पूर्वाग्रह किसी व्यक्ति की पहचान और स्वतंत्रता को सीमित नहीं कर सकते।”

न्यायालय ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब दो बालिग अपनी इच्छा से साथ रह रहे हैं, तो माता-पिता या अन्य रिश्तेदारों को उनके जीवन में बाधा डालने या धमकी देने का कोई अधिकार नहीं है।

मामले के तथ्यों और कानूनी स्थिति को देखते हुए अदालत ने याचिका स्वीकार कर ली।

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हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता जरूरत पड़ने पर दरियागंज थाने के एसएचओ या बीट कांस्टेबल से संपर्क कर सकते हैं, जो उन्हें कानून के अनुसार आवश्यक सहायता देंगे।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि जोड़ा किसी अन्य थाना क्षेत्र में रहने जाता है, तो उन्हें तीन दिन के भीतर संबंधित थाने के एसएचओ को अपना नया पता बताना होगा।

आदेश में कहा गया कि संबंधित थाना प्रभारी और बीट कांस्टेबल याचिकाकर्ताओं को आवश्यक सुरक्षा प्रदान करेंगे।

इसी के साथ अदालत ने याचिका और लंबित आवेदन का निस्तारण कर दिया।

Case Title: Kartik & Anr. vs. State of NCT of Delhi & Ors.

Case Number: W.P. (CRL) 665/2026

Date of Order: February 24, 2026

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