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मध्यप्रदेश हाईकोर्ट: पत्नी की सुविधा ही अंतिम आधार नहीं, वीडियो कॉन्फ्रेंस से होगी सुनवाई

Vivek G.
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श्रीमती एकता वैश बनाम दीपक कुचबंदिया, मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने पत्नी की ट्रांसफर याचिका पर फैसला सुनाते हुए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सुनवाई के निर्देश दिए।

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट: पत्नी की सुविधा ही अंतिम आधार नहीं, वीडियो कॉन्फ्रेंस से होगी सुनवाई

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर खंडपीठ में मंगलवार को एक अहम आदेश सुनाया गया। मामला एक पत्नी की ओर से दायर ट्रांसफर याचिका का था। अदालत में बहस के दौरान दोनों पक्षों के तर्क विस्तार से रखे गए। अंत में अदालत ने संतुलित रास्ता अपनाते हुए केस ट्रांसफर करने से इनकार किया, लेकिन पत्नी को राहत देने के लिए विशेष निर्देश जारी किए।

मामले की पृष्ठभूमि

यह याचिका एसएमटी एकता वैष द्वारा दायर की गई थी। उनका विवाह 10 जुलाई 2024 को दीपक कुचबंदिया से हुआ था। कुछ समय बाद वैवाहिक विवाद उत्पन्न हुआ।

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पति ने नर्सिंहपुर फैमिली कोर्ट में हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 9 के तहत वैवाहिक अधिकारों की बहाली का मामला दायर किया। दूसरी ओर, पत्नी ने हरदा फैमिली कोर्ट में धारा 125 दंड प्रक्रिया संहिता के तहत भरण-पोषण का आवेदन प्रस्तुत किया।

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पत्नी की ओर से अदालत को बताया गया कि वह हरदा की निवासी हैं और उनकी कोई आय का स्रोत नहीं है। नर्सिंहपुर और हरदा के बीच 300 किलोमीटर से अधिक की दूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि ससुराल में उनके साथ मारपीट और क्रूरता हुई, जिसके चलते नर्सिंहपुर कोतवाली में दो एफआईआर दर्ज कराई गईं।

उनके वकील ने दलील दी, “मुवक्किल लगातार डर और दबाव में हैं। अकेले इतनी दूरी तय करना उनके लिए कठिन है।”

अदालत की सुनवाई और कानूनी संदर्भ

न्यायालय ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला दिया। विशेष रूप से, Anindita Das vs. Srijit Das और Preeti Sharma vs. Manjit Sharma के निर्णयों का उल्लेख किया गया।

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सुप्रीम कोर्ट ने इन मामलों में स्पष्ट किया था कि केवल इस आधार पर कि याचिकाकर्ता महिला है, हर बार ट्रांसफर की अनुमति नहीं दी जा सकती।

न्यायालय ने यह भी कहा कि अब तकनीकी विकल्प उपलब्ध हैं। “सिर्फ दूरी या असुविधा के आधार पर कार्यवाही स्थानांतरित करना उचित नहीं है,” अदालत ने आदेश में उल्लेख किया।

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की पूर्व समन्वय पीठों के निर्णयों का भी जिक्र किया गया, जिनमें कहा गया था कि पक्षकारों की व्यक्तिगत उपस्थिति हर तारीख पर आवश्यक नहीं होती।

कोर्ट की टिप्पणी

न्यायालय ने ध्यान दिलाया कि पत्नी स्वयं नर्सिंहपुर में दर्ज एफआईआर के सिलसिले में वहां आ-जा चुकी हैं।

अदालत ने कहा, “अब वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग जैसी सुविधा उपलब्ध है, जिससे असुविधा को कम किया जा सकता है।”

साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि यदि पत्नी को गवाही के लिए व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना पड़े, तो उसका खर्च पति को उठाना होगा।

न्यायाधीश ने संतुलन बनाते हुए कहा कि ट्रांसफर अंतिम उपाय है, जबकि वैकल्पिक व्यवस्था पहले देखी जानी चाहिए।

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अंतिम निर्णय

अदालत ने ट्रांसफर याचिका को निरस्त नहीं किया, बल्कि उसे निस्तारित करते हुए विशेष निर्देश दिए।

निर्देशों के अनुसार:

• पत्नी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से नर्सिंहपुर फैमिली कोर्ट में पेश हो सकती हैं।

• गवाही के लिए जब व्यक्तिगत उपस्थिति आवश्यक होगी, उस तारीख को तय कर पति को यात्रा, ठहरने और भोजन का खर्च अग्रिम देना होगा।

• अन्य तारीखों पर वकील के माध्यम से कार्यवाही चल सकती है।

इन निर्देशों के साथ मामला समाप्त कर दिया गया।

Case Title: Smt. Ekta Vaish vs. Deepak Kuchbandiya

Case No.: Misc. Civil Case No. 478 of 2026

Decision Date: 18 February 2026

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