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छात्राओं से भरी बस रोकने व हमला करने के आरोपियों को अग्रिम जमानत से इनकार: मद्रास हाईकोर्ट

Shivam
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मद्रास हाईकोर्ट ने छात्राओं से भरी बस पर हमले के आरोप में अग्रिम जमानत खारिज की और अंतिम यात्राओं को नियंत्रित करने हेतु कानून पर विचार करने का निर्देश दिया। - के. शंकर एवं अन्य बनाम राज्य

छात्राओं से भरी बस रोकने व हमला करने के आरोपियों को अग्रिम जमानत से इनकार: मद्रास हाईकोर्ट

मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने एक गंभीर मामले में हस्तक्षेप करते हुए अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया। मामला उस घटना से जुड़ा है जिसमें अंतिम यात्रा के दौरान कुछ लोगों द्वारा छात्राओं से भरी बस को रोका गया और कथित रूप से दुर्व्यवहार किया गया। अदालत ने इसे सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला माना।

मामले की पृष्ठभूमि

रिकॉर्ड के अनुसार, 5 मार्च 2026 को करीब 25 छात्राओं को लेकर जा रही एक कॉलेज बस को अलंगुलम गांव के पास रोका गया। आरोप है कि अंतिम यात्रा में शामिल कुछ लोग, कथित रूप से नशे की हालत में, बस के सामने आ गए।

एफआईआर के मुताबिक, उन्होंने बस को रोका, छात्राओं के साथ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया और ड्राइवर पर हेलमेट व चप्पलों से हमला किया। साथ ही बस को नुकसान पहुंचाने का भी आरोप लगाया गया।

याचिकाकर्ताओं ने अदालत में कहा कि बस ने अंतिम यात्रा के बीच से निकलने की कोशिश की, जिससे स्थिति बिगड़ी और घटना को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया।

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सुनवाई के दौरान न्यायालय ने स्पष्ट किया कि आरोपों को हल्के में नहीं लिया जा सकता।

अदालत ने कहा,

“सार्वजनिक वाहन को रोकना और उसमें सवार लोगों को डराना-धमकाना एक गंभीर घटना है, खासकर जब उसमें छात्राएं हों।”

न्यायालय ने यह भी जोड़ा कि अंतिम यात्रा एक सामाजिक परंपरा हो सकती है, लेकिन इससे सार्वजनिक व्यवस्था या सुरक्षा को खतरे में डालने का अधिकार नहीं मिल जाता।

“ऐसी गतिविधियां केवल व्यक्तिगत व्यवहार नहीं बल्कि सार्वजनिक व्यवस्था को प्रभावित करती हैं,” अदालत ने टिप्पणी की।

अदालत ने इस मामले से आगे बढ़ते हुए एक बड़ी चिंता भी जताई। आदेश में कहा गया कि राज्य में अंतिम यात्राओं के दौरान अव्यवस्थित और जोखिम भरे व्यवहार की घटनाएं बढ़ रही हैं।

अदालत ने पहले के एक जनहित मामले का भी उल्लेख किया, जिसमें सड़कों पर फूल-मालाएं फेंकने से दुर्घटनाएं होने की बात सामने आई थी।

पेज 8–9 पर संलग्न दस्तावेज में एक ऐसी घटना का जिक्र है, जहां सड़क पर पड़ी माला के कारण एक व्यक्ति की जान चली गई।

न्यायालय ने पाया कि मौजूदा दिशा-निर्देश पर्याप्त नहीं हैं और ऐसी घटनाएं लगातार हो रही हैं।

इसलिए अदालत ने राज्य सरकार के मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि अंतिम यात्राओं को नियंत्रित करने के लिए उचित कानून बनाने की आवश्यकता पर विचार करें।

“सार्वजनिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आवश्यक विधायी ढांचा तैयार करना जरूरी है,” अदालत ने कहा।

मुख्य सचिव को 31 जुलाई तक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया।

अदालत ने कहा कि मामले की प्रकृति गंभीर है और जांच के लिए हिरासत में पूछताछ आवश्यक है।

इसी आधार पर अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी गई।

Case Details:

Case Title: K. Shankar & Ors. vs State

Case Number: Crl.O.P (MD) No. 5267 of 2026

Judge: Justice K.K. Ramakrishnan

Decision Date: 20 April 2026

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