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मद्रास हाईकोर्ट ने स्कूल को ‘रेतीले टीलों’ की जमीन देने वाला सरकारी आदेश रद्द किया, नई जमीन देने का निर्देश

Vivek G.
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सेंट जोसेफ्स मैट्रिकुलेशन हायर सेकेंडरी स्कूल बनाम अतिरिक्त मुख्य सचिव एवं अन्य, मद्रास हाईकोर्ट ने स्कूल को सैंड ड्यून जमीन देने वाला तमिलनाडु सरकार का आदेश रद्द किया, समान मूल्य की नई जमीन देने का निर्देश।

मद्रास हाईकोर्ट ने स्कूल को ‘रेतीले टीलों’ की जमीन देने वाला सरकारी आदेश रद्द किया, नई जमीन देने का निर्देश

मद्रास हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में तमिलनाडु सरकार के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें एक स्कूल की जमीन वापस लेकर बदले में “सैंड ड्यून” यानी रेतीले टीलों वाली जमीन देने का फैसला किया गया था। अदालत ने कहा कि यह आदेश न केवल पहले दिए गए न्यायिक निर्देशों के खिलाफ है, बल्कि पर्यावरणीय दृष्टि से भी अनुचित है।

न्यायमूर्ति डी. भरत चक्रवर्ती की पीठ ने स्पष्ट किया कि सरकार को स्कूल को समान मूल्य और उपयोग योग्य जमीन उपलब्ध करानी होगी, और यदि ऐसा संभव न हो तो जमीन की कीमत का भुगतान करना पड़ेगा।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला कडलूर जिले के कूथपक्कम गांव में स्थित सेंट जोसेफ्स मैट्रिकुलेशन हायर सेकेंडरी स्कूल से जुड़ा है। स्कूल ने वर्ष 1979 में सरकार के आदेश के तहत लगभग 5.77 एकड़ जमीन खरीदी थी और वहीं से अपनी गतिविधियां चला रहा था।

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बाद में विवाद उठा कि जमीन का एक हिस्सा पहले मंदिर से जुड़ा हुआ था। इस आधार पर सरकार ने 2009 में जमीन को फिर से अपने नियंत्रण में लेने का आदेश जारी किया। इस फैसले को स्कूल ने हाईकोर्ट में चुनौती दी।

सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों ने सामुदायिक सौहार्द बनाए रखने के लिए जमीन के बदले दूसरी जमीन देने के विकल्प पर सहमति जताई। अदालत ने भी सरकार को निर्देश दिया था कि स्कूल को कम से कम 4.5 एकड़ वैकल्पिक जमीन दी जाए, जो शहर या मुख्य सड़क के पास हो और शिक्षा संस्थान के लिए उपयुक्त हो।

सरकार ने 2025 में एक नया आदेश जारी कर स्कूल की जमीन का मूल्य लगभग 8.14 करोड़ रुपये तय किया और बदले में लगभग 2.17 करोड़ रुपये मूल्य की जमीन आवंटित करने का प्रस्ताव दिया।

यह जमीन भुवनागिरी तालुक के पेरियापट्टु गांव में थी, जो कडलूर शहर से लगभग 34 किलोमीटर दूर स्थित है। इसके अलावा यह जमीन “गवर्नमेंट पोरंबोक – सैंड ड्यून” यानी रेतीले टीलों के रूप में वर्गीकृत थी और वहां सड़क तक सीधी पहुंच भी नहीं थी।

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स्कूल ने अदालत में कहा कि:

“हमारी जमीन शहर के बीचों-बीच थी, जबकि सरकार ने जो जमीन दी है वह दूर है, कम कीमत की है और शिक्षा संस्थान के लिए उपयुक्त भी नहीं है।”

सुनवाई के दौरान अदालत ने सरकार के निर्णय पर कड़ी टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि जिस जमीन को वैकल्पिक रूप में दिया गया है वह पर्यावरणीय दृष्टि से संवेदनशील ‘सैंड ड्यून’ क्षेत्र है।

पीठ ने कहा:

“रेतीले टीले प्राकृतिक सुरक्षा कवच की तरह काम करते हैं। वे तूफानों से भूमि की रक्षा करते हैं और कई जीव-जंतुओं के लिए आवास होते हैं। ऐसे क्षेत्र को विकास के लिए देना सार्वजनिक हित के खिलाफ है।”

अदालत ने यह भी कहा कि राज्य सरकार सार्वजनिक संसाधनों की “ट्रस्टी” है और उसे इनका संरक्षण करना चाहिए।

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सुनवाई के दौरान सरकार ने अन्य संभावित जमीनों का भी जिक्र किया। इनमें कुछ जमीनें बस स्टैंड के पास थीं या आकार में बहुत छोटी थीं, जिससे स्कूल की जरूरतें पूरी नहीं हो सकती थीं।

एक अन्य जमीन, थिरुवंथिपुरम गांव में, स्कूल के लिए उपयुक्त बताई गई। हालांकि सरकार ने कहा कि उसका कुछ हिस्सा सरकारी उपयोग के लिए आवश्यक हो सकता है।

अदालत ने कहा कि यदि इस जमीन का कोई हिस्सा कानूनी रूप से आवंटित किया जा सकता है, तो उसे प्राथमिक विकल्प के रूप में देखा जाए।

अदालत ने अपने आदेश में कहा:

• सरकार का G.O. Ms. No. 414 (1 जुलाई 2025) अवैध है और इसे रद्द किया जाता है।

• जिला कलेक्टर को निर्देश दिया गया कि वह थिरुवंथिपुरम गांव की जमीन की जांच कर स्कूल को समान मूल्य की उपयुक्त जमीन देने पर विचार करें।

• यदि यह जमीन संभव न हो, तो कडलूर शहर या उसके आसपास 10-12 किलोमीटर के भीतर दूसरी उपयुक्त जमीन खोजी जाए।

• पूरी प्रक्रिया तय समयसीमा में पूरी की जाए।

• यदि सरकार उचित जमीन उपलब्ध कराने में असफल रहती है, तो स्कूल को जमीन की कीमत का भुगतान किया जाए।

इसके साथ ही अदालत ने याचिका का निपटारा कर दिया।

Case Title: St. Josephs Matriculation Higher Secondary School vs Additional Chief Secretary & Others

Case No.: W.P. No. 25256 of 2025

Decision Date: 25 February 2026

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