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मद्रास हाईकोर्ट में 50 लाख रिश्वत के आरोप से हड़कंप, जस्टिस नर्मल कुमार ने खुद को किया अलग

Vivek G.
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एन. गणेश अग्रवाल बनाम पुलिस निरीक्षक, एसीबी सीबीआई और संबंधित मामला, मद्रास हाईकोर्ट में 50 लाख रिश्वत के आरोप पर जस्टिस एम. निर्मल कुमार ने खुद को अलग किया, विजिलेंस जांच के आदेश।

मद्रास हाईकोर्ट में 50 लाख रिश्वत के आरोप से हड़कंप, जस्टिस नर्मल कुमार ने खुद को किया अलग

मद्रास हाईकोर्ट में गुरुवार को एक आपराधिक पुनरीक्षण याचिका की सुनवाई के दौरान अचानक माहौल बदल गया। कोर्ट के सामने एक ऐसा पत्र आया, जिसमें एक वरिष्ठ वकील पर 50 लाख रुपये लेने और वह रकम न्यायाधीश को देने का दावा करने का आरोप लगाया गया था। आरोप गंभीर थे। अदालत ने तुरंत कार्रवाई करते हुए खुद को मामले की सुनवाई से अलग कर लिया और पूरे प्रकरण की जांच के आदेश दे दिए।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला CRL RC No.1191 of 2015 और उससे जुड़ी याचिका Crl.O.P.No.21243 of 2014 से संबंधित है। याचिकाकर्ता एन. गणेश अग्रवाल और नरेश प्रसाद अग्रवाल ने निचली अदालत के आदेश को चुनौती दी थी। मामला सीबीआई के भ्रष्टाचार प्रकरण से जुड़ा है, जो चेन्नई की विशेष अदालत में लंबित है।

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5 फरवरी 2026 को जब यह मामला आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध था, तब रजिस्ट्री को विधि एवं न्याय मंत्रालय, नई दिल्ली से एक पत्र प्राप्त हुआ। इस पत्र के साथ ऑल इंडिया लॉयर्स एसोसिएशन फॉर जस्टिस (AILAJ) का प्रतिनिधित्व भी संलग्न था।

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पत्र में आरोप लगाया गया था कि एक वरिष्ठ अधिवक्ता ने अपने मुवक्किल से 50 लाख रुपये यह कहकर लिए कि वह राशि न्यायाधीश को दी जानी है, लेकिन कथित भुगतान के बाद भी मामले में कोई आदेश पारित नहीं हुआ।

अदालत में क्या हुआ

पत्र की प्रति अदालत में पढ़ी गई। न्यायमूर्ति एम. निर्मल कुमार ने इसे रिकॉर्ड पर लिया और दोनों पक्षों को इसकी जानकारी दी।

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने साफ शब्दों में आरोपों को झूठा बताया। उन्होंने कहा, “इन आरोपों में कोई सच्चाई नहीं है। हम किसी भी प्रकार की जांच में पूरा सहयोग देने को तैयार हैं।”

वहीं सीबीआई के विशेष लोक अभियोजक ने कहा कि ऐसे पत्र अदालत की गरिमा को प्रभावित करते हैं। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि इस प्रकार की शिकायत के पीछे कौन है, इसका पता लगाकर कड़ी कार्रवाई की जाए।

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कोर्ट का अवलोकन

न्यायमूर्ति एम. निर्मल कुमार ने अपने आदेश में कहा कि शिकायत में विशिष्ट और गंभीर आरोप लगाए गए हैं। ऐसे में निष्पक्षता बनाए रखना आवश्यक है।

कोर्ट ने टिप्पणी की,“प्रतिनिधित्व में लगाए गए आरोपों को देखते हुए यह उचित होगा कि इस विषय को मद्रास हाईकोर्ट की विजिलेंस सेल को सौंपा जाए।”

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक इस मामले की जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक वह स्वयं इस याचिका की सुनवाई नहीं करेंगे।

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फैसला

कोर्ट ने आदेश दिया कि पूरा मामला माननीय मुख्य न्यायाधीश के समक्ष रखा जाए ताकि इसे किसी अन्य पीठ को सौंपा जा सके। साथ ही, विजिलेंस सेल को निर्देश दिए गए कि वह आरोपों की जांच करे और आवश्यक कार्रवाई करे।

इस प्रकार, न्यायमूर्ति एम. निर्मल कुमार ने मामले से स्वयं को अलग कर लिया और सुनवाई स्थगित कर दी।

Case Title: N. Ganesh Agarwal vs Inspector of Police, ACB CBI & Connected Matter

Case No.: CRL RC No.1191 of 2015 & Crl.O.P.No.21243 of 2014

Decision Date: 05 February 2026

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