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मद्रास उच्च न्यायालय ने भूमि मामले में एकतरफा फैसले को लेकर कलेक्टर के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही की मांग की है।

Shivam
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सेतुमाधवन और अन्य बनाम सिगमणि और अन्य - मद्रास उच्च न्यायालय ने सरकारी नाथम पोरम्बोके भूमि मामले में एक पक्षीय डिक्री पर रामनाथपुरम कलेक्टर के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई का निर्देश दिया।

मद्रास उच्च न्यायालय ने भूमि मामले में एकतरफा फैसले को लेकर कलेक्टर के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही की मांग की है।

मद्रास हाईकोर्ट ने सरकारी जमीन से जुड़े एक पुराने दीवानी मुकदमे में राज्य सरकार की लापरवाही पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि जब सरकारी भूमि दांव पर हो, तब अधिकारी “मूक दर्शक” नहीं बने रह सकते।

यह मामला CRP(MD) No.111 of 2026 में सुनवाई के दौरान सामने आया, जिसमें 9 मार्च 2001 को पारित एक एक्स-पार्टी (एकतरफा) डिक्री को चुनौती दी गई थी।

मामले की पृष्ठभूमि

मूल वाद O.S. No.6 of 2001, उपन्यायालय रामनाथपुरम में दायर किया गया था। विवादित संपत्ति को सरकारी “नथम पोरम्बोक” भूमि (सरकारी खाली जमीन) के रूप में दर्ज बताया गया।

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इस भूमि पर स्वामित्व की घोषणा और स्थायी निषेधाज्ञा (किसी को हस्तक्षेप से रोकने का आदेश) के लिए मुकदमा दायर हुआ। इसमें जिला कलेक्टर और तहसीलदार को प्रतिवादी बनाया गया था।

रिकॉर्ड के अनुसार, दोनों अधिकारी अदालत में उपस्थित नहीं हुए और परिणामस्वरूप 9 मार्च 2001 को उनके खिलाफ एक्स-पार्टी डिक्री पारित हो गई।

बाद में 384 दिनों की देरी से डिक्री रद्द कराने के लिए आवेदन दायर किया गया, जिसे 14 जून 2004 को खारिज कर दिया गया। इस आदेश को उच्चतर अदालत में चुनौती भी नहीं दी गई

सुनवाई के दौरान अतिरिक्त महाधिवक्ता ने बताया कि अदालत के निर्देश के बाद तहसीलदार और तत्कालीन सरकारी वकील के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई है।

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हालांकि, न्यायालय ने पाया कि जिला कलेक्टर के खिलाफ कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, जबकि वे भी मुकदमे में पक्षकार थे और एक्स-पार्टी घोषित हुए थे।

न्यायालय ने स्पष्ट कहा कि केवल तहसीलदार के खिलाफ कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। आदेश में कहा गया,

“सरकार सार्वजनिक भूमि की संरक्षक है। जब ऐसी भूमि मुकदमे का विषय हो, तो जिम्मेदार अधिकारी निष्क्रिय नहीं रह सकते।”

अदालत ने यह भी कहा कि देरी से दायर आवेदन खारिज होने के बाद उसे आगे चुनौती न देना “सरकारी संपत्ति की सुरक्षा में गंभीर लापरवाही” को दर्शाता है।

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न्यायालय ने चौथे प्रतिवादी, यानी राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव को निर्देश दिया कि:

1. उस समय के जिला कलेक्टर के खिलाफ विधि अनुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की जाए

2. पूरे राज्य के लिए एक विस्तृत सरकारी आदेश (Government Order) जारी किया जाए, जिसमें स्पष्ट दिशा-निर्देश हों: सरकारी मुकदमों में अधिकारियों की जिम्मेदारियां एक्स-पार्टी घोषित होने पर अनिवार्य कदम लिखित बयान, अपील और देरी माफी याचिकाओं की समय-सीमा कर्तव्य में लापरवाही पर अनुशासनात्मक परिणाम

अदालत ने हर तालुक में एक लीगल सेल गठित करने पर भी विचार करने को कहा, जो नियमित रूप से सरकारी मामलों की समीक्षा करे।

साथ ही, चार महीने के भीतर एक स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया गया, जिसमें मदुरै पीठ के क्षेत्राधिकार में ऐसे सभी मामलों का विवरण हो, जहां सरकार एक्स-पार्टी रही है।

इन निर्देशों के साथ मामला 16 मार्च 2026 को आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया

Case Title:- Sethumadhavan & Another v. Sigamani & Others

Case Number:- CRP (MD) No. 111 of 2026

Date of Order:- 26 February 2026

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