Logo

27 साल पुराने डबल मर्डर केस में बड़ा मोड़: सुप्रीम कोर्ट ने चालक की सजा पलटी, सबूतों को बताया कमजोर

Vivek G.
Add Court Book as a preferred source on Google

जसविंदर सिंह @ शिंदर सिंह बनाम पंजाब राज्य, 1999 के डबल मर्डर केस में सुप्रीम कोर्ट ने चालक को बरी किया। अदालत ने कहा-केवल वाहन चलाने का आरोप, बिना ठोस सबूत, सजा का आधार नहीं।

27 साल पुराने डबल मर्डर केस में बड़ा मोड़: सुप्रीम कोर्ट ने चालक की सजा पलटी, सबूतों को बताया कमजोर

नई दिल्ली की अदालत संख्या में उस दिन खामोशी थी, जब 1999 के एक सनसनीखेज डबल मर्डर केस पर Supreme Court of India ने अपना फैसला सुनाया। वर्षों से दोषी ठहराए गए जसविंदर सिंह उर्फ शिंदर सिंह के लिए यह सुनवाई निर्णायक साबित हुई। अदालत ने कहा-केवल वाहन चलाने का आरोप, बिना ठोस सबूत के, किसी को हत्या का दोषी ठहराने के लिए पर्याप्त नहीं है।

मामले की पृष्ठभूमि

मामला 14 अक्टूबर 1999 का है। पंजाब के गांव पूनिया के बस स्टैंड के पास एक युवक की गोली मारकर हत्या कर दी गई। अगले ही घंटों में, उसी परिवार के दूसरे बेटे की भी अलग स्थान पर हत्या हुई। अभियोजन का दावा था कि हमलावर एक नीली टाटा मोबाइल में आए थे और जसविंदर सिंह उस वाहन का चालक था।

Read also:-सप्लायर की चूक का खामियाजा खरीदार क्यों भुगते? ₹1.11 करोड़ ITC मामले में त्रिपुरा हाईकोर्ट की सख़्त टिप्पणी

एफआईआर अगले दिन दर्ज हुई। मुख्य आरोप दो शूटरों पर था, जबकि जसविंदर सिंह की भूमिका सिर्फ वाहन चलाने तक सीमित बताई गई। बावजूद इसके, ट्रायल कोर्ट ने उसे भी दोषी ठहराया। हाईकोर्ट ने एक बार उसे बरी किया, लेकिन बाद में पुनः सुनवाई में सजा बहाल कर दी गई, जिसके खिलाफ यह अपील सुप्रीम कोर्ट पहुंची।

Court Book subscription: bare acts, legal drafts, court judgments and ad-free legal news, plans from ₹30/month

सुप्रीम कोर्ट ने रिकॉर्ड खंगालते हुए पाया कि अभियोजन के दो प्रमुख गवाह-मृतकों के पिता और एक मृतक की पत्नी-ने जसविंदर सिंह के खिलाफ कोई ठोस और सीधा कृत्य नहीं बताया।

अदालत ने नोट किया कि पिता (PW-7) ने शुरुआत में पुलिस को दिए बयान में यह नहीं कहा था कि जसविंदर सिंह ने किसी को खींचा या गोली चलाने में सक्रिय भूमिका निभाई। यह बात पहली बार अदालत में जोड़ी गई, जिसे पीठ ने गंभीर चूक माना।

पीठ ने कहा,

“जांच के शुरुआती बयानों में जिस तथ्य का उल्लेख ही नहीं है, उसे बाद में जोड़ना अभियोजन की कहानी को कमजोर करता है।”

दूसरी अहम गवाह (PW-10) ने भी सिर्फ इतना कहा कि आरोपी वाहन चला रहा था। उनका बयान भी घटना के तुरंत बाद दर्ज नहीं किया गया था।

Read also:-सुप्रीम कोर्ट ने IFGL Refractories को राहत दी, ओडिशा औद्योगिक नीति के तहत सब्सिडी रोकना गलत ठहराया

जांच में खामियां

रक्षा पक्ष ने उस समय के डीएसपी को गवाह के रूप में पेश किया। अधिकारी ने स्पष्ट कहा कि शुरुआती जांच में जसविंदर सिंह निर्दोष पाया गया था और उसे आरोपी नहीं बनाया गया था। टाटा मोबाइल की जब्ती में भी उसके खिलाफ कोई आपत्तिजनक सामग्री नहीं मिली।

यह भी सामने आया कि वाहन अदालत में पेश तक नहीं किया गया और न ही गवाहों से उसकी पहचान कराई गई। वाहन के मालिक के पिता ने बयान दिया कि उन्होंने वह गाड़ी किसी भी आरोपी को नहीं सौंपी थी।

अदालत की अहम टिप्पणियां

पीठ ने दोनों पक्षों के तर्क सुनने के बाद कहा कि यह मामला आपसी रंजिश और पुराने टकरावों से जुड़ा है, जहां कई बार आरोप-प्रत्यारोप हुए। लेकिन केवल संदेह या सामान्य आरोपों के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।

अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा,“रिकॉर्ड पर ऐसा कोई ठोस, भरोसेमंद और निरंतर सबूत नहीं है, जिससे यह साबित हो कि अपीलकर्ता ने हत्या में सक्रिय भागीदारी निभाई।”

Read also:-सेवानिवृत्ति के बाद विभागीय जांच पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, MSWC का रिकवरी आदेश रद्द

अंतिम फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट और हाईकोर्ट द्वारा जसविंदर सिंह के खिलाफ दिए गए दोषसिद्धि आदेश को रद्द कर दिया। अदालत ने उसे सभी आरोपों से बरी करते हुए तत्काल रिहाई के निर्देश दिए।

हालांकि, पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि यह फैसला केवल अपीलकर्ता तक सीमित है और अन्य आरोपियों के मामले पर कोई टिप्पणी नहीं की गई है।

Case Title: Jaswinder Singh @ Shinder Singh vs State of Punjab

Case No.: Criminal Appeal (@ SLP Crl. Diary No. 46882 of 2024)

Decision Date: January 06, 2026

Download Judgment

Take CourtBook Everywhere

Access your account on the go with our mobile app.

Get it on Google PlayDownload on the App Store
Join the Court Book WhatsApp channel for latest judgments, notifications, legal news and exam updates