Logo

राजस्थान हाईकोर्ट ने मंत्री की कथित ऑनलाइन आलोचना पर शिक्षक का निलंबन रद्द किया, कहा- कानून से बाहर जाकर कार्रवाई नहीं कर सकते अधिकारी

Shivam
Add Court Book as a preferred source on Google

राजस्थान हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया टिप्पणियों के आधार पर शिक्षक का निलंबन रद्द करते हुए कहा कि बिना वैधानिक अधिकार के ऐसी कार्रवाई नहीं की जा सकती। - लाल सिंह चौहान बनाम राजस्थान राज्य और अन्य।

राजस्थान हाईकोर्ट ने मंत्री की कथित ऑनलाइन आलोचना पर शिक्षक का निलंबन रद्द किया, कहा- कानून से बाहर जाकर कार्रवाई नहीं कर सकते अधिकारी

राजस्थान हाईकोर्ट ने एक सरकारी शिक्षक के निलंबन आदेश को रद्द करते हुए कहा है कि किसी कर्मचारी के खिलाफ केवल प्रशासनिक नाराजगी के आधार पर कार्रवाई नहीं की जा सकती। अदालत ने स्पष्ट किया कि निलंबन जैसी गंभीर कार्रवाई के लिए स्पष्ट वैधानिक अधिकार होना जरूरी है।

जस्टिस फरजंद अली की एकलपीठ ने यह फैसला शिक्षक लाल सिंह चौहान की याचिका पर सुनाया, जिन्हें कथित तौर पर मंत्री के खिलाफ सोशल मीडिया पर टिप्पणी करने के आरोप में निलंबित किया गया था।

मामले की पृष्ठभूमि

याचिकाकर्ता लाल सिंह चौहान वर्ष 2003 से बांसवाड़ा जिले में शिक्षक ग्रेड-III के पद पर कार्यरत हैं। 23 सितंबर 2025 को जिला शिक्षा अधिकारी (मुख्यालय), प्रारंभिक शिक्षा, बांसवाड़ा ने उन्हें निलंबित कर दिया था। उसी दिन उनके खिलाफ चार्जशीट भी जारी की गई।

विभाग का आरोप था कि शिक्षक ने व्हाट्सएप और सोशल मीडिया पर ऐसी टिप्पणियां कीं, जिनसे संबंधित मंत्री और विभाग की छवि धूमिल हुई।

Court Book subscription: bare acts, legal drafts, court judgments and ad-free legal news, plans from ₹30/month

याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में दलील दी कि राजस्थान सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1958 के तहत जिला शिक्षा अधिकारी को उन्हें निलंबित करने का अधिकार ही नहीं था।

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि इस मामले में मुख्य प्रश्न यह नहीं है कि कथित सोशल मीडिया टिप्पणियां उचित थीं या नहीं, बल्कि यह है कि निलंबन आदेश कानून के अनुसार पारित किया गया था या नहीं।

अदालत ने पाया कि निलंबन आदेश में किसी भी वैधानिक प्रावधान का उल्लेख नहीं किया गया था, जिसके तहत यह शक्ति इस्तेमाल की गई हो। कोर्ट ने कहा कि आदेश पूरी तरह “वैधानिक आधार” से रहित है।

पीठ ने कहा:

“प्रशासनिक असंतोष या कथित शर्मिंदगी, वैधानिक अधिकार का स्थान नहीं ले सकती।”

कोर्ट ने यह भी कहा कि निलंबन कोई साधारण प्रशासनिक कदम नहीं है, बल्कि इसका कर्मचारी के सेवा अधिकारों पर गंभीर प्रभाव पड़ता है, इसलिए इसे केवल कानून के दायरे में रहकर ही लागू किया जा सकता है।

अदालत ने नियम 13 का हवाला देते हुए कहा कि सरकारी कर्मचारी को निलंबित करने की शक्ति और परिस्थितियां कानून में स्पष्ट रूप से निर्धारित हैं। राज्य सरकार यह साबित नहीं कर सकी कि जिला शिक्षा अधिकारी को इस मामले में ऐसा आदेश पारित करने का कोई स्वतंत्र अधिकार था।

जस्टिस फरजंद अली ने टिप्पणी की:

“कानून द्वारा प्रदत्त शक्ति के बिना अधिकारी स्वयं अपने लिए अधिकार नहीं मान सकते।”

हाईकोर्ट ने 23 सितंबर 2025 के निलंबन आदेश को अधिकार क्षेत्र से परे और कानूनन अस्थिर मानते हुए रद्द कर दिया। साथ ही राज्य सरकार को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता को तत्काल सेवा में बहाल किया जाए और कानून के अनुसार सभी परिणामी लाभ दिए जाएं।

हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि विभागीय जांच लंबित है तो उसे कानून के अनुसार जारी रखा जा सकता है।

Case Details

Case Title: Lal Singh Chouhan v. State of Rajasthan & Ors.

Case Number: S.B. Civil Writ Petition No. 21163/2025

Judge: Justice Farjand Ali

Decision Date: May 12, 2026

Download Order

Take CourtBook Everywhere

Access your account on the go with our mobile app.

Get it on Google PlayDownload on the App Store
Join the Court Book WhatsApp channel for latest judgments, notifications, legal news and exam updates