नई दिल्ली में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम कर विवाद में स्पष्ट किया कि किसी कंपनी के विलय (amalgamation) के बाद पुरानी कंपनी के घाटे को नई कंपनी अपने मुनाफे से समायोजित (set-off) नहीं कर सकती, जब तक कानून इसकी अनुमति न दे।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला एस्पिनवॉल एंड कंपनी लिमिटेड और निरीक्षण सहायक आयुक्त के बीच कर विवाद से संबंधित था। कंपनी ने दावा किया कि जिस कंपनी का उसके साथ विलय हुआ था, उसके पुराने नुकसान को वह अपने वर्तमान मुनाफे से समायोजित कर सकती है।
विलय योजना (amalgamation scheme) वर्ष 2006 में मंजूर हुई थी, और उसमें एक क्लॉज भी शामिल था जो इस तरह के समायोजन की अनुमति देता था।
लेकिन टैक्स विभाग ने इस दावे को खारिज कर दिया। इसके बाद मामला ट्रिब्यूनल, हाईकोर्ट और अंततः सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा।
सुनवाई के दौरान अदालत ने साफ कहा कि केवल विलय योजना में लिखी शर्तें अपने आप कानून नहीं बन जातीं।
बेंच ने कहा:
“केरल एग्रीकल्चरल इनकम टैक्स एक्ट में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जो मर्जर के बाद नई कंपनी को पुरानी कंपनी के नुकसान का लाभ लेने की अनुमति देता हो।”
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि:
• कानून के अनुसार नुकसान वही व्यक्ति (assessee) आगे ले जा सकता है जिसने वह नुकसान उठाया हो।
• यहां पुरानी कंपनी (जिसने नुकसान उठाया) विलय के बाद अस्तित्व में ही नहीं रही।
कंपनी ने अपने पक्ष में एक पुराने फैसले (Dalmia Power Ltd.) का हवाला दिया।
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इस पर अदालत ने कहा:
“वह मामला अलग परिस्थितियों में था, जहां टैक्स विभाग को नोटिस दिया गया था और उसने कोई आपत्ति नहीं की थी।”
जबकि इस मामले में:
• राज्य सरकार को विलय प्रक्रिया के दौरान नोटिस ही नहीं दिया गया था
• इसलिए उस फैसले को यहां लागू नहीं किया जा सकता
हाईकोर्ट ने पहले ही यह तथ्य दर्ज किया था कि संबंधित नुकसान 8 साल से ज्यादा पुराना था।
सुप्रीम कोर्ट ने इस निष्कर्ष को भी सही माना और कहा कि:
• कानून के तहत नुकसान केवल 8 साल तक ही carry forward किया जा सकता है
• इस अवधि के बाद उसका लाभ नहीं लिया जा सकता
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कंपनी का दावा कानून के अनुरूप नहीं है और इसमें कोई मेरिट नहीं है।
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“हम इन अपीलों में कोई दम नहीं पाते। सभी अपीलें खारिज की जाती हैं,” बेंच ने आदेश देते हुए कहा।
कोर्ट ने सभी संबंधित अपीलों को खारिज कर दिया और किसी भी पक्ष को लागत (cost) देने का आदेश नहीं दिया।
Case Details
Case Title: Aspinwall and Co. Ltd. vs Inspecting Assistant Commissioner
Case Number: Civil Appeal No. 7796 of 2012 & connected mattersJudge: Justice Rajesh Bindal and Justice Vijay BishnoiDecision Date: April 13, 2026Download Judgment



