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मनी लॉन्ड्रिंग केस में राहत: मणिपुर हाईकोर्ट ने सनसम जैकी सिंह को लंबी हिरासत के आधार पर जमानत दी

CB News Desk
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श्री सनसम जैकी सिंह बनाम प्रवर्तन निदेशालय - मणिपुर उच्च न्यायालय ने लंबी कैद और अनुसूचित अपराधों के मुकदमों में देरी का हवाला देते हुए ₹600 करोड़ के पीएमएलए मामले में लामजिंगबा समूह के प्रमुख को जमानत दे दी।

मनी लॉन्ड्रिंग केस में राहत: मणिपुर हाईकोर्ट ने सनसम जैकी सिंह को लंबी हिरासत के आधार पर जमानत दी

मणिपुर हाईकोर्ट ने एक अहम आदेश में लमजिंगबा ग्रुप से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोपी सनसम जैकी सिंह को जमानत दे दी है। अदालत ने माना कि लंबी न्यायिक हिरासत और मुकदमे में हो रही देरी को देखते हुए आरोपी को आगे जेल में रखना उचित नहीं होगा। यह आदेश 23 दिसंबर 2025 को सुनाया गया।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला कथित तौर पर एक अनियमित निवेश योजना से जुड़ा है, जिसमें लमजिंगबा ग्रुप ऑफ कंपनियों पर करीब ₹600 करोड़ की राशि 15,000 से अधिक निवेशकों से जमा कराने का आरोप है। जांच एजेंसी का कहना है कि निवेशकों को ऊंचे रिटर्न का लालच देकर धन इकट्ठा किया गया और बाद में कंपनी ने भुगतान बंद कर दिया।

राज्य पुलिस ने इस मामले में कई FIR दर्ज की थीं। इन सभी मामलों में जांच समय पर पूरी न होने के कारण आरोपी को डिफॉल्ट बेल मिल चुकी थी। हालांकि, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इन्हीं आरोपों के आधार पर अलग से मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया, जिसमें आरोपी अब तक हिरासत में था।

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अदालत में दलीलें

आरोपी की ओर से वरिष्ठ वकील ने दलील दी कि वे जनवरी 2023 से जेल में हैं और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अधिकतम सजा सात साल है। ऐसे में वे न्यूनतम सजा की आधी अवधि से अधिक समय जेल में बिता चुके हैं।

वकील ने यह भी कहा कि जिन मूल अपराधों (प्रेडिकेट ऑफेंस) के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग का मामला बना है, उनकी जांच अभी पूरी नहीं हुई है। ऐसे में मुकदमे के जल्द खत्म होने की कोई संभावना नहीं दिखती।

वहीं, ईडी ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि मामला गंभीर है और इसमें बड़ी संख्या में आम निवेशक प्रभावित हुए हैं। एजेंसी ने यह भी तर्क दिया कि मनी लॉन्ड्रिंग कानून में जमानत के लिए सख्त शर्तें हैं।

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कोर्ट की टिप्पणियां

न्यायमूर्ति ए. गुनेश्वर शर्मा ने दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करते हुए कहा कि

“लंबी अवधि तक विचाराधीन कैदी को जेल में रखना, जबकि मुकदमे के जल्द निपटारे की कोई संभावना न हो, व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार के खिलाफ है।”

कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि यदि ट्रायल में असामान्य देरी हो और आरोपी लंबे समय से जेल में हो, तो मनी लॉन्ड्रिंग कानून की सख्त जमानती शर्तों को नरम किया जा सकता है।

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अदालत का निर्णय

रिकॉर्ड और कानूनी मामलों की जांच करने के बाद, उच्च न्यायालय ने निष्कर्ष निकाला कि लंबे समय तक कारावास और संबंधित मुकदमों को पूरा करने में देरी के कारण PMLA की धारा 45 के सख्त प्रावधान कमजोर पड़ गए हैं।

अदालत ने कुछ सख्त शर्तों के साथ जमानत दी, जिनमें 25 लाख रुपये का निजी मुआवज़ा, दो राजपत्रित अधिकारी ज़मानतदार, अदालत में अनिवार्य उपस्थिति, पासपोर्ट जमा करना और मणिपुर छोड़ने या गवाहों को प्रभावित करने पर प्रतिबंध शामिल हैं।

“इन परिस्थितियों में, निरंतर हिरासत उचित नहीं है,” अदालत ने फैसला सुनाते हुए जमानत याचिका स्वीकार कर ली और मामले का निपटारा कर दिया।

Case Title: Shri Sanasam Jacky Singh vs Directorate of Enforcement

Case Number: Bail Application No. 10 of 2025

Date of Order: 23 December 2025

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