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मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने अवैध खनन मामले में तथ्यों को नजरअंदाज करने के लिए अधिकारियों को फटकार लगाई, आदेश रद्द किया

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MP हाईकोर्ट ने अवैध खनन मामले में कलेक्टर का ट्रक जब्ती आदेश रद्द कर दिया, कहा कि बिना जांच के निर्णय लेना दुर्भाग्यपूर्ण है, ₹50,000 लागत लगाई। - सारंग रघुवंशी बनाम मध्य प्रदेश राज्य एवं अन्य

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने अवैध खनन मामले में तथ्यों को नजरअंदाज करने के लिए अधिकारियों को फटकार लगाई, आदेश रद्द किया

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की जबलपुर पीठ ने अवैध खनन से जुड़े एक मामले में कलेक्टर द्वारा पारित ट्रक जब्ती आदेश को रद्द कर दिया है। अदालत ने टिप्पणी की कि बिना तथ्यों की सही जांच किए आदेश पारित करना “बेहद दुर्भाग्यपूर्ण” है।

मामले की पृष्ठभूमि

यह याचिका सारंग रघुवंशी द्वारा दायर की गई थी, जिसमें 27 जनवरी 2025 के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें कलेक्टर, छिंदवाड़ा ने एक ट्रक को जब्त करने का निर्देश दिया था।

मामले के अनुसार, राजस्व अधिकारी ने एक ट्रक को पकड़ा था जो बिना अनुमति खनिज परिवहन कर रहा था। मौके पर मौजूद ड्राइवर ने कथित रूप से बताया कि ट्रक याचिकाकर्ता का है। इसी आधार पर खनन अधिकारी ने रिपोर्ट तैयार कर कलेक्टर को भेजी।

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हालांकि, याचिकाकर्ता ने जवाब में स्पष्ट किया कि वह ट्रक का मालिक नहीं है और वाहन किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर पंजीकृत है।

अदालत ने रिकॉर्ड का अवलोकन करते हुए पाया कि ट्रक का पंजीकरण बलवीर सिंह के नाम पर था और यह 2027 तक वैध था। इसके बावजूद अधिकारियों ने वास्तविक मालिक से संपर्क करने या उसका बयान दर्ज करने का कोई प्रयास नहीं किया।

पीठ ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा,

“पूरी कार्यवाही बेहद यांत्रिक और लापरवाहीपूर्ण तरीके से की गई है।”

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अदालत ने आगे कहा कि कलेक्टर, जो एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी हैं, उनसे अपेक्षा की जाती है कि वे मामले की गहराई से जांच करें।

“यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि कलेक्टर ने तथ्यों की जांच किए बिना अधीनस्थ अधिकारी की रिपोर्ट को आंख मूंदकर स्वीकार कर लिया।”

पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि जब भारी जुर्माना और जब्ती जैसी कार्यवाही की जाती है, तो उसे न्यायिक तरीके से और उचित जांच के बाद ही किया जाना चाहिए।

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उच्च न्यायालय ने कलेक्टर द्वारा पारित आदेश को अस्थिर (unsustainable) मानते हुए रद्द कर दिया। साथ ही, राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह याचिकाकर्ता को ₹50,000 की लागत अदा करे और यह राशि संबंधित दोषी अधिकारियों से वसूल की जाए।

अदालत ने याचिका को स्वीकार करते हुए कार्यवाही समाप्त कर दी।

Case Details

Case Title: Sarang Raguwanshi vs State of Madhya Pradesh & Others

Case Number: Writ Petition No. 11018 of 2025

Decision Date: March 13, 2026

Counsels:

• For Petitioner: Shri Shoeb Hasan Khan

• For State: Smt. Janhavi Pandit, Additional Advocate General

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