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नाबालिग की जेल में बंदी असंवैधानिक: पटना हाईकोर्ट ने पुलिस कार्रवाई पर उठाए गंभीर सवाल

Shivam
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मोहम्मद जाहिद (नाबालिग) बनाम बिहार राज्य और अन्य - पटना उच्च न्यायालय ने अवैध रूप से गिरफ्तार किए गए एक नाबालिग को रिहा करने का आदेश दिया, 5 लाख रुपये का मुआवजा दिया और अनुच्छेद 21 के अधिकारों का उल्लंघन करने के लिए पुलिस की निंदा की।

नाबालिग की जेल में बंदी असंवैधानिक: पटना हाईकोर्ट ने पुलिस कार्रवाई पर उठाए गंभीर सवाल

पटना हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में पुलिस की कार्यशैली पर कड़ा सवाल उठाते हुए कहा है कि कानून की अनदेखी कर की गई गिरफ्तारी सीधे नागरिक की स्वतंत्रता पर हमला है। अदालत ने एक नाबालिग छात्र की अवैध गिरफ्तारी को असंवैधानिक बताते हुए न सिर्फ उसकी तत्काल रिहाई का आदेश दिया, बल्कि राज्य सरकार को ₹5 लाख मुआवज़ा देने का भी निर्देश दिया।

यह फैसला पटना हाईकोर्ट की खंडपीठ ने सुनाया, जिसमें न्यायमूर्ति राजीव रंजन प्रसाद और न्यायमूर्ति रितेश कुमार शामिल थे।

मामले की पृष्ठभूमि

मामला मधेपुरा जिले के पुरैनी थाना क्षेत्र से जुड़ा है। भूमि विवाद को लेकर दर्ज एक प्राथमिकी में कई लोगों को आरोपी बनाया गया था। जांच के दौरान पुलिस ने पाया कि दस नामजद आरोपियों, जिनमें याचिकाकर्ता भी शामिल था, के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं। इसलिए चार्जशीट में उन्हें “नॉट चार्जशीटेड” दिखाया गया।

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इसके बावजूद, एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की समीक्षा टिप्पणी के बाद, बिना किसी नए साक्ष्य और बिना अदालत से आगे की जांच की अनुमति लिए, जांच अधिकारी ने 23 अक्टूबर 2025 को याचिकाकर्ता को गिरफ्तार कर लिया। उसे जेल भेज दिया गया, जबकि बाद में यह स्पष्ट हुआ कि वह नाबालिग है।

कोर्ट की टिप्पणियां

अदालत ने केस डायरी और रिकॉर्ड देखने के बाद पुलिस की कार्रवाई को गंभीर लापरवाही बताया। पीठ ने कहा कि जब चार्जशीट दाखिल हो चुकी थी और आरोपी को ट्रायल के लिए नहीं भेजा गया था, तब बिना मजिस्ट्रेट की अनुमति गिरफ्तारी नहीं की जा सकती थी।

पीठ ने स्पष्ट शब्दों में कहा,

“किसी भी नागरिक की गिरफ्तारी केवल संदेह या दबाव के आधार पर नहीं हो सकती। यह स्वतंत्रता के मूल अधिकार का सीधा उल्लंघन है।”

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अदालत ने यह भी नोट किया कि गिरफ्तारी के समय याचिकाकर्ता की उम्र को लेकर कोई जांच नहीं की गई, जबकि दस्तावेज़ साफ़ तौर पर उसे नाबालिग दर्शाते थे। इससे किशोर न्याय कानून के प्रावधानों का खुला उल्लंघन हुआ।

किशोर न्याय का दृष्टिकोण

सुनवाई के दौरान सामने आया कि स्कूल रिकॉर्ड के अनुसार याचिकाकर्ता की जन्मतिथि 1 जनवरी 2010 है। बाद में किशोर न्याय बोर्ड की रिपोर्ट ने पुष्टि की कि घटना के समय उसकी उम्र लगभग 15 वर्ष थी।

कोर्ट ने टिप्पणी की,

“नाबालिग को वयस्क जेल में रखना न सिर्फ अवैध है, बल्कि अमानवीय भी है।”

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अदालत का फैसला

सभी तथ्यों और कानून की स्थिति को देखते हुए पटना हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि:

• नाबालिग याचिकाकर्ता को तुरंत रिहा किया जाए।

• राज्य सरकार एक महीने के भीतर ₹5,00,000 का मुआवज़ा दे।

• ₹15,000 मुकदमे का खर्च भी राज्य वहन करे।

• यह राशि संबंधित दोषी अधिकारियों से वसूली जाए।

• पुलिस अधिकारियों की भूमिका की विभागीय जांच कराई जाए।

अदालत ने कहा कि संवैधानिक अदालत होने के नाते वह ऐसे मामलों में “मूक दर्शक” नहीं रह सकती।

Case Title: Md. Jahid (Minor) v. State of Bihar & Ors.

Case Number: Criminal Writ Jurisdiction Case No. 3077 of 2025

Date of Judgment: 9 January 2026

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