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नाता विवाह को मान्यता: राजस्थान हाईकोर्ट ने मृत कर्मचारी की पत्नी को पारिवारिक पेंशन देने का आदेश

Shivam
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राम प्यारी सुमन बनाम राजस्थान राज्य और अन्य - राजस्थान उच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया कि नाता विवाह के तहत शादी करने वाली महिला पारिवारिक पेंशन की हकदार है, नामांकन की कमी के आधार पर इनकार को खारिज करते हुए।

नाता विवाह को मान्यता: राजस्थान हाईकोर्ट ने मृत कर्मचारी की पत्नी को पारिवारिक पेंशन देने का आदेश

जयपुर स्थित राजस्थान हाईकोर्ट में बुधवार को एक अहम सामाजिक और कानूनी सवाल पर फैसला आया। अदालत ने साफ किया कि यदि महिला को मृत सरकारी कर्मचारी ने जीवनकाल में पत्नी के रूप में स्वीकार किया है, तो केवल सरकारी रिकॉर्ड में नाम न होने से उसका पारिवारिक पेंशन का अधिकार खत्म नहीं हो जाता।

यह मामला राम प्यारी सुमन बनाम राजस्थान राज्य से जुड़ा था, जिसमें नाता विवाह की वैधता और पारिवारिक पेंशन का मुद्दा उठा

मामले की पृष्ठभूमि

याचिकाकर्ता राम प्यारी सुमन ने अदालत को बताया कि पहली पत्नी की मृत्यु के बाद दिवंगत सरकारी कर्मचारी पूरन लाल सैनी ने उनसे नाता विवाह किया था। इस संबंध से एक बेटी भी पैदा हुई।

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बाद में वैवाहिक विवाद के चलते राम प्यारी ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 125 के तहत भरण-पोषण का मामला दायर किया, जिसमें पारिवारिक अदालत ने उन्हें गुजारा भत्ता मंजूर किया।

पूरन लाल सैनी, जो सेवानिवृत्त पटवारी थे, के निधन के बाद राम प्यारी ने पारिवारिक पेंशन के लिए आवेदन किया, लेकिन प्रशासन ने यह कहते हुए मना कर दिया कि उनका नाम सेवा रिकॉर्ड में दर्ज नहीं है।

अदालत की टिप्पणी

न्यायमूर्ति अशोक कुमार जैन ने रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्यों पर ध्यान दिया, खासकर उस पारिवारिक अदालत के फैसले पर जिसमें पूरन लाल सैनी ने खुद राम प्यारी को अपनी पत्नी बताया था।

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अदालत ने नाता विवाह की सामाजिक प्रथा पर भी विस्तार से चर्चा की।

पीठ ने कहा,

“राजस्थान के ग्रामीण इलाकों में नाता विवाह एक प्रचलित सामाजिक व्यवस्था है और यदि यह समुदाय की परंपराओं के अनुसार हुआ हो, तो हिंदू विवाह अधिनियम इसे मान्यता देता है।”

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि पत्नी का नाम नामांकन में न होना, अपने आप में पेंशन से वंचित करने का आधार नहीं हो सकता।

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अंतिम निर्णय

हाईकोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए राज्य सरकार और पेंशन विभाग को निर्देश दिया कि राम प्यारी सुमन को दिवंगत कर्मचारी की पत्नी और कानूनी लाभार्थी माना जाए।

अदालत ने आदेश दिया कि राजस्थान सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 1996 के नियम 66 के तहत उन्हें पारिवारिक पेंशन दी जाए।

मामले में किसी प्रकार की लागत नहीं लगाई गई और याचिका का निपटारा कर दिया गया।

Case Title: Ram Pyari Suman v. State of Rajasthan & Others

Case Number: S.B. Civil Writ Petition No. 17330/2022

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