Logo

नियोक्ता की चूक के लिए कर्मचारियों को दंडित नहीं किया जा सकता: बॉम्बे हाई कोर्ट ने EPFO की उच्च पेंशन याचिका की अस्वीकृति रद्द की

Shivam
Add Court Book as a preferred source on Google

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड की कमी के आधार पर कर्मचारी का पेंशन दावा खारिज नहीं किया जा सकता, EPFO को मामले की दोबारा जांच का निर्देश दिया। - किरण राजाराम जाधव बनाम कर्मचारी भविष्य निधि संगठन और अन्य।

नियोक्ता की चूक के लिए कर्मचारियों को दंडित नहीं किया जा सकता: बॉम्बे हाई कोर्ट ने EPFO की उच्च पेंशन याचिका की अस्वीकृति रद्द की

मुंबई में सुनवाई के दौरान बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि कर्मचारी को केवल इसलिए पेंशन से वंचित नहीं किया जा सकता क्योंकि नियोक्ता आवश्यक रिकॉर्ड प्रस्तुत करने में असफल रहा। अदालत ने EPFO के आदेश को रद्द करते हुए मामले को पुनर्विचार के लिए भेज दिया।

मामले की पृष्ठभूमि

याचिकाकर्ता किरण राजाराम जाधव, जिन्होंने करीब 37 वर्षों तक फार्मासिस्ट के रूप में सेवा दी, ने उच्च वेतन के आधार पर पेंशन का लाभ मांगा था। उन्होंने 2023 में EPFO के ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदन किया था, जो सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद शुरू किया गया था।

Read also:- दिल्ली दंगा केस में पुलिस जांच पर सवाल,दिल्ली उच्च न्यायालय ने रिहाई आदेश बरकरार रखा

हालांकि, EPFO ने 28 मार्च 2025 को उनका आवेदन यह कहते हुए खारिज कर दिया कि नियोक्ता द्वारा Form 6A और अन्य जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए।

Court Book subscription: bare acts, legal drafts, court judgments and ad-free legal news, plans from ₹30/month

न्यायमूर्ति अमित बोरकर की एकल पीठ ने स्पष्ट किया कि Form 6A जैसे दस्तावेजों का रख-रखाव नियोक्ता की जिम्मेदारी है, न कि कर्मचारी की।

अदालत ने कहा,

“यदि कर्मचारी ने सेवा और योगदान के बुनियादी तथ्य स्थापित कर दिए हैं, तो केवल रिकॉर्ड की कमी के आधार पर उसका दावा खारिज नहीं किया जा सकता।”

Read also:- गुरुग्राम POCSO मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त: पुलिस जांच पर उठाए सवाल, SIT गठित

पीठ ने यह भी माना कि Form 3A, EPF खाते का विवरण और अन्य दस्तावेज उपलब्ध होने पर भी EPFO ने उचित जांच नहीं की।

एक और महत्वपूर्ण टिप्पणी में अदालत ने कहा,

“पेंशन योजना सामाजिक सुरक्षा का उपाय है, इसे तकनीकी कारणों से नकारा नहीं जा सकता।”

मुख्य सवाल यह था कि क्या कर्मचारी का पेंशन दावा केवल इसलिए अस्वीकार किया जा सकता है क्योंकि नियोक्ता कुछ रिकॉर्ड प्रस्तुत नहीं कर पाया।

अदालत ने इस दृष्टिकोण को “अत्यधिक तकनीकी” और अनुचित बताया।

Read also:- सुप्रीम कोर्ट ने किरायेदार की बेदखली रोकने की आखिरी कोशिश को खारिज करते हुए ₹5 लाख का जुर्माना भरने का आदेश दिया।

कोर्ट ने पाया कि:

• कर्मचारी ने नियमित योगदान दिया था

• EPF रिकॉर्ड और Form 3A उपलब्ध थे

• नियोक्ता ने भी सेवा और योगदान को नकारा नहीं

ऐसी स्थिति में, केवल Form 6A के अभाव में दावा खारिज करना उचित नहीं है।

अदालत ने निम्न आदेश पारित किए:

• EPFO का 28 मार्च 2025 का आदेश रद्द किया गया

• मामले को पुनर्विचार के लिए EPFO को वापस भेजा गया

• निर्देश दिया गया कि सभी उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर नया निर्णय लिया जाए

• केवल Form 6A या चालान की अनुपस्थिति के आधार पर दावा खारिज न किया जाए

• पूरी प्रक्रिया 8 सप्ताह के भीतर पूरी की जाए

Case Details

Case Title: Kiran Rajaram Jadhav v. Employees Provident Fund Organisation & Anr.

Case Number: Writ Petition No. 632 of 2026

Judge: Justice Amit Borkar

Decision Date: March 26, 2026

Download Judgment

Take CourtBook Everywhere

Access your account on the go with our mobile app.

Get it on Google PlayDownload on the App Store
Join the Court Book WhatsApp channel for latest judgments, notifications, legal news and exam updates