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NEET-UG 2026 रद्द: FAIMA ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की याचिका, अदालत की निगरानी में पुनर्परीक्षा और NTA सुधार की मांग

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NEET-UG 2026 रद्द: FAIMA ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की याचिका, अदालत की निगरानी में पुनर्परीक्षा और NTA सुधार की मांग

NEET-UG 2026 परीक्षा रद्द होने के बाद फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (FAIMA) ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। संगठन ने राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे “सिस्टमिक फेल्योर” बताया और मेडिकल प्रवेश परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की मांग की है।

यह याचिका उस समय दायर की गई है जब पेपर लीक के आरोपों के बाद केंद्र सरकार ने मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी है।

मामले की पृष्ठभूमि

NEET-UG 2026 परीक्षा 3 मई को आयोजित हुई थी। यह परीक्षा देशभर के मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए आयोजित की जाती है, जिसमें इस वर्ष 22 लाख से अधिक छात्रों ने भाग लिया था।

परीक्षा के बाद सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म्स जैसे व्हाट्सएप और टेलीग्राम पर कथित “गेस पेपर्स” वायरल होने लगे। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि इन गेस पेपर्स के 100 से अधिक सवाल वास्तविक परीक्षा से मेल खाते थे।

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विवाद बढ़ने के बाद NTA ने 12 मई को परीक्षा रद्द कर दी।

FAIMA ने अधिवक्ता तन्वी दुबे के माध्यम से दाखिल याचिका में मांग की है कि NTA को या तो पूरी तरह बदला जाए या फिर उसकी संरचना में बड़े स्तर पर सुधार किए जाएं।

याचिका में कहा गया कि मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं के लिए “तकनीकी रूप से अधिक सुरक्षित और स्वायत्त संस्था” बनाई जानी चाहिए।

संगठन ने एक हाई-पावर्ड मॉनिटरिंग कमेटी गठित करने की भी मांग की है, जिसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश करें। समिति में साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ और फॉरेंसिक विशेषज्ञों को शामिल करने का सुझाव दिया गया है।

याचिका में कहा गया,

“प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता गंभीर खतरे में है।”

FAIMA ने प्रश्नपत्रों के लिए “डिजिटल लॉकिंग सिस्टम” लागू करने और परीक्षा को पूरी तरह कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) मॉडल में बदलने की मांग भी की है। संगठन का कहना है कि इससे पेपर की फिजिकल हैंडलिंग और ट्रांसपोर्टेशन से जुड़े जोखिम कम होंगे।

इसके अलावा, सीबीआई को चार सप्ताह के भीतर जांच की स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश देने की भी मांग की गई है।

याचिका में कहा गया है कि परीक्षा रद्द होने से लाखों छात्र और उनके परिवार नई परीक्षा तिथि, एडमिट कार्ड, रिजल्ट और काउंसलिंग प्रक्रिया को लेकर असमंजस में हैं।

मामले के आने वाले दिनों में सुप्रीम कोर्ट में सूचीबद्ध होने की संभावना है। फिलहाल अदालत की ओर से कोई आदेश पारित नहीं किया गया है।

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