Logo

15 साल बाद भी नहीं मिली राहत: सुप्रीम कोर्ट ने नीलू उर्फ निलेश कोष्टी की उम्रकैद बरकरार रखी

Vivek G.
Add Court Book as a preferred source on Google

नीलू उर्फ ​​नीलेश कोष्टी बनाम मध्य प्रदेश राज्य, सुप्रीम कोर्ट ने नीलू उर्फ निलेश कोष्टी की हत्या और फिरौती मामले में उम्रकैद बरकरार रखी, कहा-परिस्थितिजन्य साक्ष्य पूरी तरह साबित।

15 साल बाद भी नहीं मिली राहत: सुप्रीम कोर्ट ने नीलू उर्फ निलेश कोष्टी की उम्रकैद बरकरार रखी

नई दिल्ली की ठंडी सुबह में जब कोर्ट नंबर में यह मामला पुकारा गया, तो माहौल शांत था, लेकिन फैसला बेहद अहम। सुप्रीम कोर्ट ने अपहरण, फिरौती और हत्या के एक पुराने मामले में दोषी ठहराए गए आरोपी नीलू उर्फ निलेश कोष्टी की अपील खारिज कर दी। अदालत ने साफ कहा-परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की कड़ी पूरी है, और यह सीधे आरोपी की ओर इशारा करती है।

यह फैसला 20 फरवरी 2026 को सुनाया गया ।

मामले की पृष्ठभूमि

मामला जुलाई 2009 का है। इंदौर की रहने वाली अर्चना उर्फ पिंकी 25 जुलाई को लापता हो गईं। तीन दिन बाद उनकी मां ने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। इसके बाद घटनाओं ने गंभीर मोड़ लिया।

Read also:-पुराने आपराधिक मामले के बावजूद नौकरी का हक: गुजरात HC ने भर्ती रोके जाने का आदेश किया रद्द

Court Book subscription: bare acts, legal drafts, court judgments and ad-free legal news, plans from ₹30/month

परिजनों के मुताबिक, अर्चना के पति को उसी मोबाइल नंबर से फोन आया जो अर्चना का था। कॉल करने वाले ने 5 लाख रुपये की फिरौती मांगी। बाद में जांच में सामने आया कि अर्चना का मोबाइल फोन आरोपी नीलू के पास था, जिसने उसे आगे बेच दिया था।

10 अगस्त 2009 को पुलिस ने आरोपी के बयान के आधार पर एक कुएं से बोरे में बंद शव बरामद किया। पोस्टमार्टम में गला दबाकर हत्या की पुष्टि हुई।

ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) और 201 (सबूत मिटाना) के तहत दोषी ठहराया। Madhya Pradesh High Court ने भी इस सजा को बरकरार रखा। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।

अदालत में क्या दलीलें दी गईं?

आरोपी की ओर से कहा गया कि गुमशुदगी रिपोर्ट दर्ज करने में तीन दिन की देरी हुई, जो संदेह पैदा करती है। यह भी तर्क दिया गया कि फिरौती कॉल के ठोस सबूत नहीं हैं और शव की पहचान डीएनए टेस्ट से नहीं कराई गई।

राज्य की ओर से दलील दी गई कि सबूतों की कड़ी मजबूत है-मोबाइल फोन की बरामदगी, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, शव की बरामदगी और स्कूटी की रिकवरी, सब आरोपी की ओर इशारा करते हैं।

Read also:-मानसिक रूप से अस्वस्थ बेटी को ज़हर देने का मामला: मद्रास हाईकोर्ट ने माता-पिता की उम्रकैद बरकरार रखी

कोर्ट की अहम टिप्पणियां

न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने कहा, “जब मामला केवल परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित हो, तो हर कड़ी का पूरा और ठोस होना जरूरी है।”

अदालत ने 1984 के मशहूर फैसले Sharad Birdhichand Sarda v. State of Maharashtra का हवाला देते हुए कहा कि दोष सिद्ध करने के लिए परिस्थितियों की कड़ी ऐसी होनी चाहिए, जो किसी और संभावना को बाहर कर दे।

गुमशुदगी रिपोर्ट में तीन दिन की देरी पर कोर्ट ने कहा, “परिवार पहले खुद तलाश करता है, फिर पुलिस के पास जाता है। यह देरी अस्वाभाविक नहीं है।”

मोबाइल फोन की बरामदगी को कोर्ट ने महत्वपूर्ण कड़ी माना। अदालत ने कहा कि आरोपी के पास मृतका का मोबाइल होना और उसे बेचना एक गंभीर परिस्थिति है।

सबसे अहम था-कुएं से शव की बरामदगी। अदालत ने स्पष्ट किया कि आरोपी के बयान पर ही शव मिला। इसे भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 27 के तहत मान्य माना गया। “जिस स्थान से शव मिला, उसकी जानकारी आरोपी के पास ही थी। यह तथ्य अपने आप में बहुत मजबूत है,” पीठ ने कहा।

शव की पहचान पर कोर्ट ने माना कि भले डीएनए टेस्ट नहीं हुआ, लेकिन परिजनों और एक परिचित गवाह ने कपड़ों और चेहरे से पहचान की। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गला दबाकर हत्या की पुष्टि हुई।

Read also:-चाइनीज मांझा पर सख्त हुई इलाहाबाद हाईकोर्ट, राज्य से पूछा- आदेश क्यों नहीं हो रहे लागू?

परिस्थितियों की पूरी कड़ी

अदालत ने एक-एक परिस्थिति को जोड़कर देखा-

• 25 जुलाई को महिला लापता हुईं।

• उनके मोबाइल से फिरौती कॉल आए।

• मोबाइल आरोपी ने बेचा।

• आरोपी के बताने पर शव कुएं से मिला।

• स्कूटी भी आरोपी की निशानदेही पर बरामद हुई।

• मेडिकल रिपोर्ट ने हत्या की पुष्टि की।

पीठ ने कहा, “इन सभी तथ्यों को एक साथ देखने पर कोई और निष्कर्ष संभव नहीं है, सिवाय इसके कि हत्या आरोपी ने की।”

Read also:-सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: पारसनाथ डेवलपर्स को 8% ब्याज के साथ देना होगा कब्जा, NCDRC आदेश बरकरार

अंतिम निर्णय

सुप्रीम कोर्ट ने नीलू उर्फ निलेश कोष्टी की अपील खारिज कर दी और निचली अदालतों के फैसले को बरकरार रखा।

हालांकि अदालत ने यह भी नोट किया कि आरोपी 15 साल से अधिक समय जेल में बिता चुका है। इसलिए उसे राज्य सरकार की नीति के अनुसार रिमिशन (सजा में छूट) के लिए आवेदन करने की स्वतंत्रता दी गई। राज्य सरकार इस पर नियमानुसार विचार करेगी।

Case Title: Neelu @ Nilesh Koshti v. State of Madhya Pradesh

Case No.: Criminal Appeal No. 5357 of 2025

Decision Date: 20 February 2026

Download Judgment

Take CourtBook Everywhere

Access your account on the go with our mobile app.

Get it on Google PlayDownload on the App Store
Join the Court Book WhatsApp channel for latest judgments, notifications, legal news and exam updates