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पंचायत चुनाव से पहले हुई गोलीबारी पर कलकत्ता हाईकोर्ट का सख्त फैसला, आजीवन कारावास बरकरार

Shivam
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सजल कांति रॉय @ सुब्रता @ सुभो और अन्य बनाम पश्चिम बंगाल राज्य - कलकत्ता उच्च न्यायालय ने बीरभूम हत्याकांड में आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा, जिसमें चुनाव की पूर्व संध्या पर हुई गोलीबारी से संबंधित मौखिक मृत्यु पूर्व बयान और प्रत्यक्षदर्शी साक्ष्यों पर भरोसा किया गया।

पंचायत चुनाव से पहले हुई गोलीबारी पर कलकत्ता हाईकोर्ट का सख्त फैसला, आजीवन कारावास बरकरार

पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में पंचायत चुनाव से ठीक एक रात पहले हुई सनसनीखेज गोलीबारी के मामले में कलकत्ता उच्च न्यायालय ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए दो दोषियों की आजीवन कारावास की सजा को सही ठहराया है। अदालत ने कहा कि मृतक द्वारा हमले के तुरंत बाद लिए गए आरोपियों के नाम कानूनी रूप से स्वीकार्य और विश्वसनीय हैं।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला 22 जुलाई 2013 की रात का है, जब बीरभूम के बंदनाबाग्राम गांव में सागर घोष को उनके ही घर में गोली मार दी गई। अगले दिन पंचायत चुनाव होना था और इलाके में भारी पुलिस बल तैनात था। अभियोजन के अनुसार, राजनीतिक रंजिश के चलते हमलावरों ने खुद को पुलिस बताकर घर का दरवाजा खुलवाने की कोशिश की। जब दरवाजा नहीं खुला, तो वे दीवार फांदकर अंदर आए और ग्रिल गेट के पास से गोलियां चलाईं।

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गोली लगने के बाद गंभीर रूप से घायल सागर घोष को पहले सियान अस्पताल और फिर बर्दवान मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

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अदालत की टिप्पणियां

न्यायमूर्ति राजशेखर मंथा और न्यायमूर्ति अजय कुमार गुप्ता ने मृतक की पत्नी और बहू की गवाही को अहम माना, जो घटना के समय घर में मौजूद थीं। अदालत ने कहा कि घायल अवस्था में मृतक द्वारा आरोपियों के नाम लेना एक स्वाभाविक और तत्काल प्रतिक्रिया थी।

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अदालत ने अपने आदेश में कहा,

“पीड़ित द्वारा गोली लगने के तुरंत बाद लिए गए नाम उसी घटना का हिस्सा हैं और इन्हें भारतीय साक्ष्य अधिनियम के तहत नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।”

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि मौखिक मृत्यु-पूर्व कथन (oral dying declaration) भी स्वीकार्य साक्ष्य है, बशर्ते वह स्वाभाविक और बिना किसी बनावट के हो। मेडिकल साक्ष्यों से यह साबित हुआ कि पीड़ित दर्द में था, लेकिन होश में था और हमलावरों को पहचानने की स्थिति में था।

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पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मौत का कारण गोली लगना बताया गया। फॉरेंसिक जांच से यह भी सामने आया कि 9 एमएम पिस्टल का इस्तेमाल किया गया था। अदालत ने कहा कि जांच में कुछ खामियां जरूर रहीं, लेकिन प्रत्यक्षदर्शी गवाहों और चिकित्सा साक्ष्यों की श्रृंखला दोष सिद्ध करने के लिए पर्याप्त है।

अंतिम फैसला

सभी तथ्यों और साक्ष्यों पर विचार करते हुए हाईकोर्ट ने निचली अदालत द्वारा दी गई दोषसिद्धि और सजा को बरकरार रखा। अदालत ने आदेश दिया कि दोनों दोषी आजीवन कारावास की सजा भुगतेंगे और जुर्माने की राशि पीड़ित की पत्नी और बहू को बराबर-बराबर दी जाएगी।

Case Title: Sajal Kanti Roy @ Subrata @ Subho & Another vs State of West Bengal

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