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तेलंगाना उच्च न्यायालय ने आपराधिक मामले में एनओसी के बिना पासपोर्ट देने से इनकार करने के फैसले को बरकरार रखा।

Shivam
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तेलंगाना हाई कोर्ट ने कहा कि लंबित आपराधिक मामले में पासपोर्ट जारी करने से पहले ट्रायल कोर्ट से NOC लेना जरूरी है। - डॉ. राघवेंद्र शिव विजया चिवुकुला बनाम भारत संघ और अन्य।

तेलंगाना उच्च न्यायालय ने आपराधिक मामले में एनओसी के बिना पासपोर्ट देने से इनकार करने के फैसले को बरकरार रखा।

हैदराबाद स्थित तेलंगाना हाई कोर्ट में एक दिलचस्प मामला सामने आया, जहाँ एक वैज्ञानिक ने पासपोर्ट दोबारा जारी न किए जाने के खिलाफ याचिका दायर की। मामला सिर्फ एक व्यक्ति के पासपोर्ट तक सीमित नहीं था, बल्कि यह सवाल भी उठा कि क्या लंबित आपराधिक मामला (pending criminal case) अपने आप में पासपोर्ट रोकने का आधार बन सकता है।

मामले की पृष्ठभूमि

याचिकाकर्ता, डॉ. राघवेंद्र सिवा विजय चिवुकुला, अमेरिका में रिसर्च साइंटिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। उनका पासपोर्ट भारत आने के दौरान खो गया, जिसके बाद उन्होंने पुनः जारी (reissue) के लिए आवेदन किया।

लेकिन पासपोर्ट प्राधिकरण ने आवेदन पर आपत्ति जताई। कारण था उनके खिलाफ दर्ज एक आपराधिक मामला, जिसमें दहेज और अन्य आरोप शामिल हैं। यह मामला अभी ट्रायल कोर्ट में लंबित है।

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याचिकाकर्ता का कहना था कि उन्होंने पुलिस जांच में सहयोग किया है और केवल मामला लंबित होने के आधार पर पासपोर्ट रोकना उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।

याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि:

• “सिर्फ आपराधिक मामला लंबित होना पासपोर्ट देने से इनकार करने का आधार नहीं हो सकता।”

• उन्होंने अदालत को आश्वासन दिया कि वे हर सुनवाई में उपस्थित रहेंगे।

• उनका पेशेवर करियर अमेरिका में है और पासपोर्ट न मिलने से नौकरी पर खतरा है।

उन्होंने यह भी कहा कि पासपोर्ट का अधिकार व्यक्तिगत स्वतंत्रता (personal liberty) का हिस्सा है।

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सरकार और पासपोर्ट प्राधिकरण की ओर से यह तर्क दिया गया कि:

• पासपोर्ट अधिनियम, 1967 की धारा 6(2)(f) के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक मामला लंबित है, तो पासपोर्ट जारी करने से इनकार किया जा सकता है।

• याचिकाकर्ता ने आवेदन में लंबित केस की जानकारी नहीं दी, जो एक गंभीर चूक है।

• नियमों के अनुसार, ऐसे मामलों में संबंधित ट्रायल कोर्ट से No Objection Certificate (NOC) लेना अनिवार्य है।

पत्नी (प्रतिवादी) की ओर से यह भी कहा गया कि पासपोर्ट जारी होने से याचिकाकर्ता देश छोड़ सकते हैं।

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सुनवाई के दौरान अदालत ने पहले के फैसलों और कानूनी प्रावधानों का हवाला दिया।

अदालत ने कहा कि:

“जहाँ आपराधिक कार्यवाही लंबित हो, वहाँ पासपोर्ट के लिए संबंधित ट्रायल कोर्ट से NOC लेना आवश्यक है।”

अदालत ने स्पष्ट किया कि पासपोर्ट प्राधिकरण सीधे पासपोर्ट जारी नहीं कर सकता, यदि कानून में निर्धारित प्रक्रिया पूरी नहीं की गई हो।

तेलंगाना हाई कोर्ट ने यह निर्देश दिया कि:

• याचिकाकर्ता को पहले संबंधित ट्रायल कोर्ट में जाकर NOC प्राप्त करना होगा।

• उसके बाद ही पासपोर्ट के लिए आवेदन पर विचार किया जा सकता है।

अदालत ने पासपोर्ट जारी करने का सीधा आदेश देने से इनकार कर दिया और याचिका को इसी दिशा में निपटाया।

Case Details

Case Title: Dr. Raghavender Siva Vijaya Chivukula v. Union of India & Ors.

Case Number: Writ Petition No. 25543 of 2025

Judge: Justice Nagesh Bheemapaka

Decision Date: 18 March 2026

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