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वैवाहिक जिम्मेदारियों के चलते नौकरी छोड़ने वाली पत्नी को संरक्षण: मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने ₹40,000 मेंटेनेंस को बरकरार रखा।

Shivam
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मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पत्नी को ₹40,000 मासिक भरण-पोषण देने के आदेश को सही ठहराया, कहा-कमाने की क्षमता और वास्तविक आय अलग बातें हैं। - सौरभ मालविया बनाम अपूर्व मालविया

वैवाहिक जिम्मेदारियों के चलते नौकरी छोड़ने वाली पत्नी को संरक्षण: मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने ₹40,000 मेंटेनेंस को बरकरार रखा।

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ ने एक महत्वपूर्ण आदेश में पत्नी को दिए गए ₹40,000 प्रतिमाह भरण-पोषण (maintenance) को सही ठहराते हुए पति की आपत्ति खारिज कर दी। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल “कमाने की क्षमता” (may earn) और “वास्तव में कमाई” (is earning) में फर्क होता है।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला सौरभ मालवीय बनाम अपूर्वा मालवीय से जुड़ा है, जिसमें पति ने परिवार न्यायालय, मंदसौर के आदेश को चुनौती दी थी। परिवार न्यायालय ने 24 जून 2025 को पत्नी को आवेदन की तारीख (03 अप्रैल 2023) से ₹40,000 मासिक भरण-पोषण देने का निर्देश दिया था।

पति का कहना था कि पत्नी शिक्षित है और स्वयं कमाने में सक्षम है, जबकि पत्नी ने आरोप लगाया कि वह बिना आय के है और पति की आय पर्याप्त है।

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सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति गजेन्द्र सिंह ने कहा कि:

“‘कमाने की संभावना’ और ‘वास्तविक कमाई’ अलग-अलग बातें हैं। जब पत्नी वैवाहिक कारणों से नौकरी छोड़ देती है, तो उसे भरण-पोषण का अधिकार है।”

अदालत ने यह भी माना कि पति एक अच्छी आय वाली नौकरी में है और पहले विदेश में कार्यरत रहा है, इसलिए पत्नी के जीवन स्तर के अनुसार भरण-पोषण उचित है।

साथ ही, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि “स्त्रीधन महिला की पूर्ण संपत्ति है और इस आधार पर भरण-पोषण से इंकार नहीं किया जा सकता।”

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हाईकोर्ट ने पाया कि परिवार न्यायालय द्वारा दिया गया भरण-पोषण आदेश साक्ष्यों के आधार पर उचित है और इसमें किसी प्रकार के हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।

अदालत ने पति की पुनरीक्षण याचिका को खारिज करते हुए कहा कि:

“परिवार न्यायालय के निष्कर्षों में कोई त्रुटि नहीं है, अतः याचिका निरस्त की जाती है।”

हालांकि, पति को यह स्वतंत्रता दी गई कि यदि भविष्य में परिस्थितियों में बदलाव होता है, तो वह संबंधित न्यायालय में आदेश संशोधन के लिए आवेदन कर सकता है।

Case Details

Case Title: Saurabh Malviya vs Apurva Malviya

Case Number: Criminal Revision No. 3453 of 2025

Judge: Hon’ble Justice Gajendra Singh

Decision Date: 23 March 2026

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